उत्तराखंड में मसूरी का सफर होगा और आसान, तैयार हो रहा 44 KM का नया रास्ता; जाम से मिलेगी मुक्ति……

देहरादून: मसूरी तक का सफर आने वाले दिनों में और आसान होने वाला है। शहर के व्यस्त रूट में फंसने से लोगों का समय बर्बाद होता है। सरकार 44 किलोमीटर का नया रास्ता बनाने जा रही है जिससे देहरादून के जाम में बिना फंसे ही मसूरी तक आसानी से पहुंचा जा सकेगा।

देहरादून की लाइफलाइन मानी जाने वाली राजपुर रोड को भविष्य में भीषण ट्रैफिक जाम से मुक्त कराने के लिए झाझरा से मसूरी तक एक नए वैकल्पिक मार्ग के रूप में देखा जा रहा है। 44 किलोमीटर के इस मार्ग में भूस्खलन संभावित क्षेत्र हैं और काफी हिस्सा जंगल से घिरा हुआ है। इस मार्ग के निर्माण के लिए शासन की ओर से कवायद तेज हो गई है। इस नई सड़क के एलाइनमेंट को मंजूरी मिलने के बाद अब एनएचएआई ने इसकी विस्तृत डीपीआर तैयार करने का काम शुरू कर दिया है।

44 किलोमीटर प्रस्तावित लंबी यह नई वैकल्पिक सड़क पूरी तरह से टू-लेन (डबल लेन) होगी। यह मार्ग झाझरा से शुरू होकर ढूंगा चौक, बकराना और प्रसिद्ध पर्यटन स्थल जॉर्ज एवरेस्ट पीक के समीप से गुजरते हुए सीधे मुख्य मसूरी रोड पर जाकर मिल जाएगा। यह रूट न केवल कम ट्रैफिक वाला होगा, बल्कि पहाड़ों के खूबसूरत और अछूते दृश्यों से भरपूर होगा। इससे पर्यटकों का सफर सुगम और रोमांचक होने के साथ-साथ उनके समय और ईंधन की भी भारी बचत होगी। एनएचएआई डीपीआर में भूस्खलन संभावित क्षेत्रों के उपचार और सुरक्षा दीवारों पर विशेष ध्यान दे रहा है। डीपीआर के भीतर पर्यावरण को कम से कम नुकसान पहुंचाने वाली तकनीकों को शामिल किया जा रहा है।

शहर के व्यस्त चौराहों में घुसे बिना सीधे मसूरी पहुंचेंगे वाहन
वर्तमान में दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे और पांवटा साहिब हाईवे से आने वाले हजारों पर्यटकों को मसूरी जाने के लिए देहरादून शहर के मुख्य बाजारों, आईएसबीटी, जाखन और राजपुर रोड जैसे व्यस्ततम इलाकों से होकर गुजरना पड़ता है। वीकेंड और छुट्टियों के दिनों में राजपुर रोड पर वाहनों का सैलाब उमड़ पड़ता है, जिससे स्थानीय निवासियों को भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। राजपुर रोड अपनी वहन क्षमता के अंतिम छोर पर पहुंच चुकी है।

इस मार्ग पर बने प्रसिद्ध कैफे, रेस्टोरेंट और शॉपिंग मॉल्स के कारण स्थानीय यातायात पहले से ही बहुत ज्यादा है। नई बाईपास सड़क के बनने के बाद दिल्ली और पांवटा साहिब की तरफ से आने वाले पर्यटक वाहन देहरादून शहर के व्यस्ततम बाजारों और चौराहों में प्रवेश किए बिना, सीधे शहर के बाहर-बाहर से ही मसूरी के लिए प्रस्थान कर सकेंगे।

वन भूमि हस्तांतरण और पेड़ों का कटान बनेगा बड़ी बाधा
झाझरा से मसूरी के लिए प्रस्तावित 44 किलोमीटर लंबी वैकल्पिक सड़क दून वासियों और पर्यटकों के लिए जितनी बड़ी राहत लेकर आएगी, इसे धरातल पर उतारना राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के लिए उतना ही चुनौतीपूर्ण होगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के मार्ग में सबसे बड़ी चुनौती पर्यावरण और वन कानून हैं। यह नई टू-लेन सड़क मुख्य रूप से घने जंगल क्षेत्र और संवेदनशील पहाड़ी हिस्सों से होकर गुजरेगी। ऐसे में एनएचएआई को परियोजना शुरू करने से पहले बड़े पैमाने पर वन भूमि हस्तांतरण की जटिल प्रक्रिया से गुजरना होगा। इसके अलावा सड़क निर्माण के लिए भी पेड़ों के कटान की भी अनुमति लेनी होगी।

पर्यटकों का सफर जल्द होगा आसान और तेज
नई सड़क बनने के बाद दिल्ली, हरियाणा, यूपी और पांवटा साहिब की ओर से आने वाले पर्यटकों को देहरादून शहर के भीड़भाड़ वाले इलाकों से नहीं गुजरना पड़ेगा। वाहन सीधे बाहरी मार्ग से मसूरी पहुंच सकेंगे। इससे यात्रा समय घटेगा, ईंधन की बचत होगी और राजपुर रोड पर दबाव कम होगा।

70 फीसदी तक पूरा हुआ आशारोड़ी-झाझरा हाईवे
आशारोड़ी-झाझरा लिंक हाईवे का करीब 70 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। 12 किलोमीटर लंबे इस प्रोजेक्ट में सात किलोमीटर रिटेनिंग रोड तैयार हो गई है। 11 में से नौ माइनर ब्रिज पूरे हो चुके हैं।

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