उत्तराखंड में 18 हजार फीट की ऊंचाई, 4 फीट बर्फ और पूरी तरह जमी झील, देवताल पहुंचकर रोमांचित हुए पर्यटक………

रुद्रप्रयाग: बद्रीनाथ से 52 किलोमीटर दूर 18 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित देवताल इन दिनों चार से पांच फीट बर्फ से ढका है। पवित्र झील पूरी तरह जम चुकी है। बीआरओ के सड़क मार्ग खोलने के बाद तिलक सोनी के नेतृत्व में बाइकर्स और पर्यटकों का दल यहां पहुंचा। भारत-चीन सीमा के करीब इस अद्भुत नजारे ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।

बर्फ की चादर में ढका देवताल.(Photo: Kamal Nayan
बद्रीनाथ धाम से करीब 52 किलोमीटर दूर भारत-चीन सीमा से सटे 18 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित देवताल इन दिनों बर्फ की सफेद मखमली चादर से ढका हुआ है। ताजा हिमपात के बाद पूरे इलाके में चार से पांच फीट तक बर्फ जम गई है। ऊंची चोटियों से लेकर रास्तों और आसपास के क्षेत्र तक हर तरफ सफेदी दिखाई दे रही है।

बर्फबारी ने देवताल की खूबसूरती को और निखार दिया है. यहां का दृश्य ऐसा नजर आ रहा है, जैसे प्रकृति ने खुद इस दुर्गम क्षेत्र का श्रृंगार किया हो। सबसे खास बात यह है कि देवताओं का पवित्र सरोवर भी पूरी तरह जम चुका है। झील में पानी की एक बूंद तक नजर नहीं आ रही और चारों तरफ सिर्फ बर्फ दिखाई देती है।

बीआरओ की ओर से सड़क मार्ग सुचारु किए जाने के बाद तिलक सोनी के नेतृत्व में बाइकर्स और पर्यटकों का एक दल देवताल पहुंचा। इसे बर्फबारी के बाद यहां पहुंचने वाला पहला बाइकर्स ग्रुप बताया जा रहा है। दुर्गम रास्ते और कड़ाके की ठंड के बावजूद दल के सदस्य जब यहां पहुंचे तो हर कोई अद्भुत नजारा देखकर रोमांचित हो उठा।

चार से पांच फीट बर्फ में जमी झील।
देवताल भारत-चीन सीमा के बेहद करीब स्थित है. यहां से कुछ दूरी पर माणा पास और सीमा क्षेत्र मौजूद है। भारतीय सेना और आईटीबीपी के जवान इस संवेदनशील इलाके में लगातार तैनात रहते हैं। इस समय भारी बर्फबारी के कारण क्षेत्र तक पहुंचना मुश्किल जरूर है, लेकिन बीआरओ द्वारा सड़क खोलने के बाद पर्यटक यहां तक पहुंच सके हैं।

18 हजार फीट की ऊंचाई पर पहुंचना अपने आप में चुनौतीपूर्ण है। इस ऊंचाई पर ऑक्सीजन की कमी रहती है और फिलहाल पूरा इलाका चार से पांच फीट बर्फ से ढका है। इसके बावजूद दल के सदस्यों का उत्साह कम नहीं हुआ। पर्यटकों ने यहां पहुंचने को बेहद रोमांचक अनुभव बताया और खुद को भाग्यशाली माना।
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पर्यटकों ने कहा कि उन्होंने अपने जीवन में इससे पहले इतना शानदार प्राकृतिक दृश्य नहीं देखा। उन्होंने भारतीय सेना, आईटीबीपी और अपने टूर गाइड तिलक सोनी का विशेष रूप से आभार जताया। उनका कहना था कि इन सभी की मदद के बिना इतने दुर्गम इलाके तक पहुंचना आसान नहीं था।

माइनस 30 डिग्री में जवानों का हौसला।
देवताल पहुंचे बाइकर्स ने कहा कि हर व्यक्ति को इस क्षेत्र का अनुभव जरूर करना चाहिए, खासकर उन लोगों को जो सीमा पर तैनात जवानों की मुश्किल परिस्थितियों को करीब से नहीं देख पाते.उनका कहना था कि सर्दियों में यहां तापमान माइनस 25 से माइनस 30 डिग्री तक पहुंच जाता है।

इतनी कठिन परिस्थितियों के बावजूद भारतीय सेना और आईटीबीपी के जवान हर मौसम में सीमा की सुरक्षा में डटे रहते हैं। बर्फ से रास्ते बंद होने और कड़ाके की ठंड के बीच भी उनकी तैनाती जारी रहती है। पर्यटकों ने जवानों के साहस और समर्पण को प्रेरणादायक बताया।

इस समय देवताल का बर्फ से ढका स्वरूप पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। चारों ओर सफेद चादर, जमी हुई झील और 18 हजार फीट की ऊंचाई से दिखाई देने वाला हिमालयी दृश्य लोगों को मंत्रमुग्ध कर रहा है। यहां पहुंचने वाले दल ने इस नजारे को किसी जन्नत से कम नहीं बताया।

देवताओं की झील कहलाता है देवताल।
देवताल को देवताओं की झील भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि भगवान इस पवित्र सरोवर में स्नान करने आते हैं। पिछले कुछ वर्षों से भारत सरकार की सीमा दर्शन योजना के तहत पर्यटकों और स्थानीय लोगों को इस क्षेत्र में जाने के लिए इनर लाइन परमिट उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

परमिट मिलने के बाद लोग ऑनलाइन और ऑफलाइन प्रक्रिया के जरिए अनुमति लेकर देवताल क्षेत्र तक पहुंच सकते हैं। इसी व्यवस्था के तहत तिलक सोनी के नेतृत्व में बाइकर्स और पर्यटकों का दल यहां पहुंचा। देवताल पहुंचते ही सदस्यों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला।

तिलक सोनी ने बताया कि देवताल से कुछ ही दूरी पर भारत-चीन सीमा है और फिलहाल यहां का दृश्य बेहद खूबसूरत है। उन्होंने कहा कि देवताओं की झील कही जाने वाली इस जगह पर इतनी बर्फ के बीच पहुंचना अपने आप में अद्भुत अनुभव है। सफेद बर्फ की चादर और हिमालय का विहंगम दृश्य इस सफर को यादगार बना रहा है।

By admin

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