उत्तराखंड में पर्यटन बना आर्थिकी की रीढ़, होमस्टे और नई योजनाओं से बदल रहा स्वरूप………
देहरादून: उत्तराखंड में साल 2017 के बाद से पर्यटन को केवल धार्मिक यात्राओं तक सीमित न रखकर इसे राज्य की आर्थिकी की मुख्य रीढ़ बनाने के प्रयास तेज हुए हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व तक राज्य ने कई दूरदर्शी नीतियां और योजनाएं लागू की हैं। इन योजनाओं का मुख्य उद्देश्य ‘ऑल सीजन टूरिज्म’ को बढ़ावा देना, नए पर्यटन स्थलों का विकास करना और स्थानीय युवाओं के लिए पहाड़ों में ही रोजगार के साधन पैदा कर ‘पलायन’ रोकना है।
पंडित दीनदयाल उपाध्याय गृह आवास (होमस्टे) विकास योजना: यह योजना उत्तराखंड के ग्रामीण पर्यटन के लिए गेम-चेंजर साबित हुई है। इस योजना से पर्यटक उत्तराखंड की पारंपरिक संस्कृति और खान-पान से रूबरू हो रहे हैं। इससे ग्रामीणों को अपने घर पर ही रोजगार मिल रहा है।
सरकार ने हाल ही में नियमों को सख्त करते हुए अब होमस्टे पंजीकरण का लाभ केवल उत्तराखंड के स्थायी निवासियों के लिए अनिवार्य कर दिया है। इसके अलावा, करीब 5,000 होमस्टे मालिकों को मुफ्त डिजिटल विजिबिलिटी देने के लिए ‘उत्तरस्टे’ (www.uttarastays.com) (https://www.uttarastays.com) पोर्टल लॉन्च किया गया है। होमस्टे चलाने वालों को कमर्शियल के बजाय घरेलू दरों पर बिजली-पानी की सुविधा मिलती है।
उत्तराखंड के सभी 13 जिलों में पर्यटन की असीम संभावनाओं को देखते हुए पर्यटन नीति के तहत यह योजना शुरू की गई थी। इसके तहत हर जिले में एक नए अनछुए पर्यटन स्थल (जैसे पिथौरागढ़ में मोस्टमानु, टिहरी में टिहरी लेक, चमोली में ओली) को थीम-बेस्ड (जैसे एडवेंचर, वेलनेस, ईको-टूरिज्म) विकसित किया जा रहा है ताकि नैनीताल और मसूरी जैसी जगहों पर पर्यटकों का दबाव कम हो सके।
नई उत्तराखंड पर्यटन नीति (2023) और उद्योग का दर्जा
राज्य सरकार ने पर्यटन को बाकायदा उद्योग का दर्जा दिया है, जिससे निवेशकों को विनिर्माण क्षेत्र की तरह ही भारी वित्तीय छूट मिलती है। इस नीति के तहत पर्यटन के लिहाज से अनछुए और सुदूर क्षेत्रों में रिसॉर्ट या होटल बनाने पर सरकार द्वारा 50 फीसदी तक की सब्सिडी दी जा रही है। हेली टूरिज्म, कैरावान टूरिज्म (वैन में घूमना), एडवेंचर स्पोर्ट्स और इलेक्ट्रिक कैब ऑपरेटरों को बढ़ावा देने के लिए सौ फीसदी तक की छूट का प्रावधान किया गया है।
वीर चंद्र सिंह गढ़वाली पर्यटन स्वरोजगार योजना
यह उत्तराखंड की सबसे पुरानी योजनाओं में से एक है, लेकिन 2017 के बाद इसमें कई महत्वपूर्ण संशोधन किए गए। अब इसके तहत स्थानीय युवाओं को बस, टैक्सी या इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने के साथ-साथ फास्ट फूड सेंटर, साहसिक खेल उपकरण खरीदने और छोटे होटल खोलने के लिए ₹25 लाख तक के लोन पर भारी सब्सिडी दी जा रही है। युवाओं को सफल उद्यमी बनाने के लिए अल्मोड़ा होटल मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट के जरिए विशेष ट्रेनिंग भी दी जा रही है।
रोपवे कनेक्टिविटी और ईको-फ्रेंडली माउंटेन ट्रेल्स
उत्तराखंड अब दुनिया के सबसे बड़े रोपवे नेटवर्क में शामिल होने की ओर अग्रसर है। विश्व प्रसिद्ध केदारनाथ रोपवे (13 किमी सोनप्रयाग-केदारनाथ) और गोविंदघाट-हेमकुंड साहिब रोपवे परियोजनाओं पर तेजी से काम चल रहा है। केंद्रीय बजट 2026 के तहत उत्तराखंड के दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में ईको-फ्रेंडली माउंटेन ट्रेल्स (प्रकृति के अनुकूल पैदल रास्ते) विकसित किए जा रहे हैं, जो पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना ट्रैकिंग और प्रकृति प्रेमियों को आकर्षित करेंगे।

