उत्तराखंड के इन शिक्षकों को राहत, लेकिन सुगम-दुर्गम स्थानांतरण पर रोक बरकरार……

देहरादून: माध्यमिक शिक्षा विभाग में लंबे समय से लंबित स्थानांतरण मामलों के निस्तारण की दिशा में शासन ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। शासन ने गंभीर बीमारी, दिव्यांगता और अन्य मानवीय परिस्थितियों के आधार पर स्थानांतरण की मांग कर रहे शिक्षकों के मामलों में नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। हालांकि सुगम से दुर्गम और दुर्गम से दुर्गम क्षेत्रों में स्थानांतरण के मामलों पर फिलहाल रोक बरकरार रहेगी।

शिक्षा सचिव रविनाथ रामन की ओर से बुधवार को जारी आदेश में महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा, निदेशक माध्यमिक शिक्षा और अपर शिक्षा निदेशकों को उत्तराखंड लोक सेवकों के लिए वार्षिक स्थानांतरण अधिनियम के तहत गठित समिति की संस्तुतियों के अनुरूप कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है।

शिक्षकों की सूची का नए सिरे से परीक्षण
शिक्षा विभाग के सूत्रों के अनुसार पात्र शिक्षकों की सूची का नए सिरे से परीक्षण किया जाएगा। कारण यह कि आवेदन काफी पहले मांगे गए थे, ऐसे में अब परिस्थितियां बदल गई हैं। ऐसे में नए सिरे से आवेदन आमंत्रित किए जा सकते हैं। इसके लिए स्थानांतरण के लिए आवेदन की समयावधि भी बढ़ाई जा सकती है।

वहीं, सचिव शिक्षा ने आदेश में स्पष्ट किया है कि कुछ समय पूर्व मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति ने गंभीर बीमारी से पीडि़त कर्मचारी, दिव्यांग शिक्षक, मानसिक रूप से अस्वस्थ अथवा गंभीर रूप से बीमार बच्चों की देखभाल कर रहे अभिभावक, विधवा, विधुर, तलाकशुदा, परित्यक्ता, आपदा प्रभावित तथा माता-पिता की गंभीर बीमारी के कारण अनुरोध के आधार पर प्राप्त आवेदनों को विभागीय स्तर पर ही निस्तारित करने को कहा है।

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ऐसे में लंबित आवेदनों का निस्तारण समिति की संस्तुतियों तथा न्यायालय के आदेशों के अनुरूप निर्धारित समयावधि में किया जाए।

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