उत्तराखंड में तपिश से पिघलने लगे ग्लेशियर, काफी बढ़ गया प्रमुख नदियों का जलस्तर………

पिथौरागढ़: पिथौरागढ़ के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में बढ़ती तपिश से ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं। इससे गोरी, काली और धौलीगंगा जैसी प्रमुख नदियों का जलस्तर काफी बढ़ गया है। सीमांत जनपद के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में पिछले कुछ दिनों से लगातार खिली चटख धूप और बढ़ते तापमान ने हिमनदों को पिघलाना शुरू कर दिया है।

मुनस्यारी और धारचूला के उच्च पर्वतीय शिखरों पर पारा चढ़ने से मुख्य ग्लेशियरों से रिकार्ड मात्रा में बर्फ पिघल रही है। इसके चलते सीमांत की प्रमुख नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है।

मदकानी नदी का पानी भी तेजी से बढ़ा
मौसम विभाग और स्थानीय केंद्रों के अनुसार, उच्च हिमालयी ट्रांस-हिमालयन क्षेत्रों में अधिकतम तापमान 14 डिग्री सेल्सियस के आसपास रिकार्ड किया जा रहा है, जो अमूमन इस मौसम में कम रहता है। इस बढ़ी हुई तपिश का सीधा असर मिलम, पंचाचूली, नामिक जैसे बड़े ग्लेशियरों पर पड़ रहा है।

हिमनदों के तेजी से पिघलने के कारण मुनस्यारी तहसील के मल्ला जोहार स्थित मिलम ग्लेशियर से निकलने वाली गोरी नदी उफान पर आ गई है। इसके साथ ही, रलाम ग्लेशियर से आने वाली रलाम गाड़ और मदकानी नदी का पानी भी तेजी से बढ़ा है।

दूसरी ओर, धारचूला के उच्च हिमालयी क्षेत्र भी इस जल-उछाल से अछूते नहीं हैं। लिपुलेख के पास कालापानी से निकलने वाली काली नदी और व्यास घाटी के कुटी यांग्ती क्षेत्र के जलस्रोतों में पानी का स्तर काफी ऊपर आ गया है।

इसके अलावा दारमा घाटी के ग्लेशियर से उद्गम होने वाली पूर्वी धौलीगंगा नदी भी पूरे वेग के साथ बह रही है, जो तवाघाट में जाकर काली नदी में मिलती है। यही स्थिति नामिक ग्लेशियर से निकलने वाली पूर्वी रामगंगा नदी की भी है।

जोहार, व्यास और दारमा घाटी की इन सभी प्रमुख नदियों के तटीय और मैदानी संगम स्थलों पर मटमैले पानी का तेज प्रवाह साफ देखा जा सकता है।

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