उत्तराखंड की राजधानी में क्रिप्टो ट्रेडिंग के नाम पर 25 करोड़ का निवेश घोटाला, छह आरोपित नामजद………

देहरादून: देहरादून में बोटब्रो, क्रास मार्केट और माइन क्रिप्टो जैसे प्लेटफार्मों के माध्यम से 20-25 करोड़ रुपये की ठगी का नया मामला सामने आया है। उत्तराखंड में निवेश के नाम पर बड़े घोटालों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है।

लोनी अर्बन मल्टी स्टेट क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट को-आपरेटिव सोसाइटी (एलयूसीसी) प्रकरण के बाद अब देहरादून में बोटब्रो, क्रास मार्केट व माइन क्रिप्टो नामक प्लेटफार्म के जरिये करोड़ों रुपये की ठगी का मामला सामने आया है।

आरोप है कि निवेशकों को हर महीने पांच से 10 प्रतिशत तक रिटर्न का लालच देकर करीब 20 से 25 करोड़ रुपये जुटाए गए और बाद में कंपनी बंद कर दी गई। इस मामले में रायपुर थाना पुलिस ने छह आरोपितों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया है।

रायपुर क्षेत्र निवासी दुर्गा बहादुर की तहरीर के अनुसार करीब दो वर्ष पहले नवीन सिंह नेगी ने उन्हें पहले बोटब्रो, फिर क्रास मार्केट और बाद में माइन क्रिप्टो प्लेटफार्म में निवेश के लिए प्रेरित किया। कंपनियों को पूरी तरह वैध बताते हुए व्यक्तिगत गारंटी तक दी गई और प्रतिमाह मोटे मुनाफे का दावा किया गया।

निवेशकों को ट्रेडिंग प्लेटफार्म पर बिजनेस आईडी दी जाती थी। इसके लिए पहले 10 हजार रुपये लाइसेंस शुल्क लिया जाता, फिर बड़ी धनराशि निवेश कराई जाती थी।

यह भरोसा भी दिलाया गया कि छह महीने बाद मूल रकम बिना किसी कटौती के वापस ली जा सकेगी। देहरादून में ठगी के शिकार हुए लोगों की संख्या 100 से अधिक जबकि पूरे उत्तराखंड में हजारों लोगों ठगी के शिकार बताए जा रहे हैं।

रायपुर थानाध्यक्ष संजीत कुमार ने बताया कि प्राथमिक जांच के बाद नवीन सिंह नेगी, दीपेश, जगपाल सिंह, सुरेंद्र प्रसाद, अहिल कुमार और कमल सिंह के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया है। मामले की जांच शुरू कर दी गई है। निवेशकों से जुड़े दस्तावेज व लेनदेन का विवरण जुटाया जा रहा है।

जूम मीटिंग, सेमिनार व वाट्सएप से फैलाया नेटवर्क
निवेशकों को जोड़ने के लिए बड़े स्तर पर प्रचार अभियान चलाया। जूम मीटिंग, होटल सेमिनार, इंटरनेट मीडिया प्रचार, वाट्सएप ग्रुप और व्यक्तिगत संपर्क के जरिये प्लेटफार्म को भरोसेमंद बताया जाता था।

निवेशकों को नए सदस्य जोड़ने पर कमीशन देने का लालच दिया जाता था। इसके लिए ‘हाट लिस्ट’ और ‘कोल्ड लिस्ट’ जैसी श्रेणियां बनाई गई थीं। अधिक सदस्य जोड़ने वालों को अतिरिक्त लाभ और बोनस का भरोसा दिया जाता था।

प्लाट और पीडसी चेक का भी झांसा
शुरुआती दौर में निवेशकों का भरोसा जीतने के लिए बिहारीगढ़ क्षेत्र सहारनपुर में प्लाट देने और पीडीसी चेक उपलब्ध कराने का आश्वासन भी दिया गया।

अक्टूबर 2025 में प्लेटफार्म अचानक बंद हो गया। निवेशकों ने जब रकम वापस मांगी तो उन्हें टालमटोल जवाब मिलने लगे।

400 करोड़ का हुआ था एलयूसीसी घोटाला
प्रदेश में एलयूसीसी चिटफंड घोटाला सामने आया था, जिसमें निवेशकों से 400 करोड़ रुपये का घोटाला किया गया है। प्रदेश के कई राज्यों में मुकदमे दर्ज होने के बाद प्रकरण की जांच अब सेंट्रल ब्यूरो आफ इन्वेस्टिगेशन (सीबीआइ) को सौंपी गई है।

इस मामले में सुशील गोखरू, राजेंद्र सिंह बिष्ट, तरुण कुमार मौर्य, गौरव रोहिल्ला और ममता भंडारी को सीबीआइ ने कुछ दिन पूर्व ही गिरफ्तार किया था। गिरोह का मास्टरमाइंड समीर अग्रवाल और उसकी पत्नी सानिया अग्रवाल विदेश भाग चुके हैं।

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