उत्तराखंड में एमडीडीए वीसी बंशीधर तिवारी ने ताश के पत्तों की तरह फेंट दिए इंजीनियर, प्रतिनियुक्ति वालों को भेजा वापस…….

देहरादून: मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (MDDA) ने प्रशासनिक कार्यों में अधिक पारदर्शिता और दक्षता लाने के उद्देश्य से अधिकारियों एवं कर्मचारियों के कार्यों का पुनर्वितरण किया है। प्राधिकरण के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी द्वारा जारी कार्यालय आदेश के अनुसार पूर्व में जारी आदेशों में आंशिक संशोधन करते हुए विभिन्न अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।

इनके हुए तबादले :-
राजेन्द्र बहुगुणा को सेक्टर-03, 04 एवं 05 में अवैध निर्माण की निगरानी का दायित्व दिया गया है।

सुनील कुमार गुप्ता सेक्टर-06, 07 एवं 08 में अवैध निर्माण से जुड़े मामलों की निगरानी करेंगे।

निशान्त कुकरेती को पूर्व कार्यों के साथ सेक्टर-09 की जिम्मेदारी भी दी गई है।

संजीव कुमार अग्रवाल सेक्टर-10 एवं 12 में अवैध निर्माण संबंधी मामलों की निगरानी करेंगे।

अभिषेक भारद्वाज को परवादून क्षेत्र में अवैध निर्माण की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

अधिशासी अभियंता शांति सिंह रावत को पूर्व दायित्वों के साथ सिंगल विंडो, बोर्ड बैठकों की तैयारी, नजूल, सीएम हेल्पलाइन, सुप्रीम कोर्ट मॉनिटरिंग कमेटी और विभिन्न बैठकों से जुड़े कार्यों की जिम्मेदारी भी दी गई है।

अजय कुमार मलिक तथा प्रमोद कुमार मेहरा को सिंगल विंडो प्रणाली से संबंधित कार्य सौंपे गए हैं।

अधिशासी अभियंता सुनील कुमार को उद्यान (गार्डन) संबंधी कार्यों का अतिरिक्त दायित्व सौंपा है।

शशांक सक्सेना को हरबर्टपुर स्थित प्राधिकरण की भूमि के विकास के लिए परियोजना तैयार करने, डिजाइन एवं लेआउट विकसित करने की जिम्मेदारी दी गई है।

RTI अपीलों के निस्तारण की जिम्मेदारी
कार्यालय आदेश के अनुसार सेक्टर-01 से 12, परवादून, पछवादून, ऋषिकेश और मसूरी क्षेत्र के सभी पटल सहायकों को अपने नियमित कार्यों के साथ सूचना का अधिकार अधिनियम-2005 के तहत विभागीय अपीलीय अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत अपीलों के निस्तारण का कार्य भी करना होगा।

आदेश में स्पष्ट किया गया है कि सभी अधिकारी एवं कर्मचारी समय-समय पर उच्चाधिकारियों द्वारा सौंपे जाने वाले अतिरिक्त दायित्वों का भी निर्वहन करेंगे। यह नई कार्य व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है।

मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण द्वारा किया गया यह प्रशासनिक पुनर्गठन विकास कार्यों में तेजी लाने, अवैध निर्माण पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने और नागरिक सेवाओं को अधिक पारदर्शी एवं जवाबदेह बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। नई जिम्मेदारियों के साथ अब विभिन्न विभागों की कार्यप्रणाली पर भी प्रशासन की पैनी नजर रहेगी।

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