उत्तराखंड में यहाँ फर्जी प्रमाणपत्र से बनी शिक्षिका। पहले बर्खास्त, अब मुकदमा……..

देहरादून: फर्जी जाति प्रमाणपत्र के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल करने के मामले में शिक्षा विभाग ने सख्त कार्रवाई की है। उपशिक्षा अधिकारी डोईवाला की शिकायत पर पुलिस ने सहायक अध्यापिका के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। आरोपी शिक्षिका पर अनुसूचित जाति का कूटरचित प्रमाणपत्र लगाकर नौकरी पाने का गंभीर आरोप है।

क्या है पूरा मामला
मामला डोईवाला क्षेत्र के राजकीय प्राथमिक विद्यालय जौलीग्रांट प्रथम का है, जहां सहायक अध्यापिका सीमा देवी तैनात थीं। आरोप है कि उन्होंने अनुसूचित जाति का फर्जी प्रमाणपत्र प्रस्तुत कर आरक्षित वर्ग का लाभ उठाते हुए सरकारी नौकरी प्राप्त की थी।

शिक्षा विभाग को इस संबंध में शिकायत मिलने के बाद पूरे मामले की जांच कराई गई। जांच में संबंधित दस्तावेजों की वैधता को विभिन्न अभिलेखों से मिलान किया गया, जिसमें प्रमाणपत्र फर्जी पाया गया।

जांच रिपोर्ट के आधार पर जिला शिक्षा अधिकारी (प्रारंभिक शिक्षा) ने तत्काल प्रभाव से शिक्षिका की सेवा समाप्त कर दी थी। विभाग ने इसे गंभीर अनियमितता मानते हुए कड़ा रुख अपनाया।

पुलिस में दर्ज हुई शिकायत
उपशिक्षा अधिकारी प्रारंभिक शिक्षा डोईवाला शिवानी कौशल ने कोतवाली में तहरीर देकर पूरे मामले की जानकारी दी। शिकायत में बताया गया कि आरोपी शिक्षिका को उपशिक्षा अधिकारी, विकासखंड प्रतापनगर (टिहरी गढ़वाल) के नियुक्ति आदेश दिनांक 8 अगस्त 2013 के तहत अनुसूचित जाति श्रेणी में नियुक्त किया गया था।

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लेकिन जांच में यह स्पष्ट हुआ कि प्रस्तुत जाति प्रमाणपत्र कूटरचित था, जिसके आधार पर नियुक्ति प्राप्त की गई थी। शिकायत के आधार पर पुलिस ने संबंधित शिक्षिका के खिलाफ धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेजों के उपयोग सहित अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। मामले की जांच आगे जारी है।

शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी पाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और किसी भी तरह की अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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