उत्तराखंड में हल्द्वानी के जमरानी बांध क्षेत्र में टाइगर कॉरिडोर पर असमंजस, लोकेशन तय न होने से पुलों का डिजाइन अटका………
हल्द्वानी: जमरानी बांध क्षेत्र में टाइगर कॉरिडोर की लोकेशन तय न होने से असमंजस है। प्रस्तावित झील में बाघों के लिए दो विशेष पुल बनाने हैं, लेकिन वन विभाग कॉरिडोर की पहचान नहीं कर पाया, जिससे परियोजना इकाई पुलों की लोकेशन और डिजाइन तय नहीं कर पा रही।
तराई के जंगलों में बाघों की सुरक्षित आवाजाही के लिए महत्वपूर्ण माने जाने वाले जमरानी बांध क्षेत्र में टाइगर कॉरिडोर को लेकर असमंजस बना हुआ है। 10 किमी में फैली प्रस्तावित झील में बाघों के विचरण के लिए दो विशेष पुल बनाए जाने हैं लेकिन वन विभाग अभी तक यह तय ही नहीं कर पाया है कि कॉरिडोर है कहां। ऐसे में जमरानी बांध परियोजना इकाई पुलों की लोकेशन और डिजाइन तय नहीं कर पा रही है।
जमरानी बांध परियोजना के अधिकारियों के अनुसार झील बनने से जंगल का बड़ा हिस्सा जलमग्न होगा। ऐसे में वन्यजीवों, खासकर बाघों के लिए वैकल्पिक मार्ग देना अनिवार्य है। इसी के तहत झील में दो वन्यजीव पुल प्रस्तावित किए गए हैं। नियम है कि वन विभाग कॉरिडोर चिह्नित कर स्थल बताएगा और उसी के अनुरूप पुलों की ऊंचाई, चौड़ाई और डिजाइन तय होगी, ताकि बाघ निर्बाध रूप से आवाजाही कर सकें।
व्यापक क्षेत्र में फैला है बाघों का यह हाईवे।
जमरानी क्षेत्र हल्द्वानी रेंज, अमृतपुर और फतेहपुर के जंगलों को आपस में जोड़ता है। यह कॉरिडोर कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के बफर और तराई पूर्वी वन प्रभाग के बीच कनेक्टिविटी का सबसे अहम लिंक है। विशेषज्ञों के अनुसार बाघ एक बड़े टेरिटरी वाला जीव है और नर बाघ 60 से 100 वर्ग किमी तक विचरण करता है। यह कॉरिडोर गौला नदी के किनारे चलता है जो बाघों के साथ ही हाथी, तेंदुआ, सांभर और अन्य वन्यजीवों के लिए प्राकृतिक हाईवे है।
बांध के बाद कैसे चलेगा पारिस्थितिकी तंत्र
जमरानी बांध उत्तराखंड की महत्वाकांक्षी पेयजल और सिंचाई परियोजना है, जिससे हल्द्वानी समेत कई क्षेत्रों को पानी मिलेगा। लेकिन पारिस्थितिकी तंत्र के लिहाज से चुनौती बड़ी है। झील बनने पर बाघों का परंपरागत मार्ग डूब क्षेत्र में आएगा। ऐसे में पुलों का ऐसा डिजाइन जरूरी है जो पानी के ऊपर से जंगल को जोड़े रखे, शोर और रोशनी से मुक्त हो और वनस्पतियों से आच्छादित हो ताकि बाघ उसका उपयोग कर सकें। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि कॉरिडोर को चिह्नित करने के लिए कैमरा ट्रैप, पगमार्क और पिछले 10 वर्षों के मूवमेंट डेटा का विश्लेषण जरूरी है।
वन विभाग को बाघों के मूवमेंट के साथ ही पुल के लिए स्थल बताने को कहा गया है। वन विभाग से स्थल बताए जाने के बाद पुलों के निर्माण की कार्रवाई की जाएगी। – बीबी पांडेय, उप महाप्रबंधक, जमरानी बांध परियोजना इकाई

