उत्तराखंड में 26 अल्पसंख्यक संस्थानों को मिलेगी मान्यता, दो सितंबर को सीएम धामी सौंपेगे प्रमाण पत्र……….
देहरादून: उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से पंजीकृत और शिक्षा विभाग से मान्यता लेने वाले मदरसे एवं अन्य शिक्षा संस्थानों को दो सितंबर को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अल्पसंख्यक शिक्षा संस्थान की मान्यता प्रमाण पत्र सौंपेंगे। उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के चेयरमैन डा. सुरजीत सिंह गांधी ने इसकी पुष्टि की।
प्राधिकरण ने एक जुलाई, 2026 को पहले दिन ही मुख्यमंत्री ने हाथों सात मदरसों समेत नौ अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को मान्यता प्रमाण पत्र सौंपे थे।
अब दो सितंबर को 26 और मदरसों को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी मान्यता प्रमाण पत्र प्रदान करेंगे। इसके अलावा 25 पंजीकृत मदरसों को मान्यता अक्टूबर तक दे दी जाएगी। इसके अलावा 200 मदरसों ने शिक्षा विभाग से मान्यता के लिए इनवेस्ट पोर्टल पर आवेदन किया है।
चंदा और संदिग्ध फंडिंग बंद होना सबसे बड़ी वजह
समाज कल्याण, शिक्षा विभाग एवं अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के सदस्यों की ओर से सभी जनपदों में चलाए जा रहे जागरूकता कार्यक्रम में यह बात सामने आई है कि एक धर्म के ठेकेदारों को डर है कि यदि मदरसों में पढ़ने वाले गरीब बच्चे आधुनिक शिक्षा लेकर जागरूक हो गए, तो मदरसों के नाम पर आने वाला चंदा और संदिग्ध फंडिंग हमेशा के लिए बंद हो जाएगी। यही कारण है कि प्राधिकरण के गठन के खिलाफ अदालतों में याचिकाओं की बाड़ लगा दी गई।
नौ अल्पसंख्यक शिक्षा संस्थानों को एक जुलाई को मिले प्रमाण पत्र
यक्ष प्रश्न यह है कि इन अवैध मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों को मिलने वाली मार्कशीट की कानूनी वैधता क्या होगी। अपनी निजी दुकानदारी और राजनीतिक रसूख बचाए रखने के लिए कट्टरपंथियों ने हजारों बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ अभी भी बंद नहीं किया है।
अवैध मदरसों की डिग्री की कानूनी वैधता नहीं
सरकार का कहना है कि मदरसों के बच्चों को भी आधुनिक शिक्षा के समान अवसर मिलना चाहिए। प्राधिकरण के गठन का उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था में समानता लाना और विद्यार्थियों को बेहतर भविष्य के लिए तैयार करना है।

