उत्तराखंड के दून-दिल्ली एक्सप्रेसवे पर दो किमी में हादसों का कहर, एक्सपेरिमेंट में उलझा ”सिस्टम”………

देहरादून: दिल्ली-दून एक्सप्रेसवे पर आशारोड़ी-मोहब्बेवाला का दो किलोमीटर का हिस्सा हादसे रोकने की प्रयोगशाला बन गया है। हर हादसे के बाद नया उपाय, नई कवायद और नई उम्मीद, लेकिन बेकाबू ट्रकों पर लगाम अब भी नहीं लग पा रही।

कभी वाहनों की रफ्तार थामने के लिए रंबल स्ट्रिप बिछाई गईं तो कभी जांच और चालकों को जागरूक करने के लिए 24 घंटे टास्क फोर्स तैनात कर दी गई। अब जिग-जैग बैरिकेडिंग और गति सीमा कैमरों के लिए 25 लाख रुपये जारी करने की संस्तुति की गई है।

उधर, ट्रकों को दुर्घटनाग्रस्त हिस्से में आने से रोकने के लिए वैकल्पिक मार्ग बनाने और हादसे वाले स्थान पर हनुमान मंदिर बनाने तक के सुझाव सामने आ चुके हैं। इसके बावजूद हादसों का सिलसिला नहीं थम रहा। सवाल है कि आखिर प्रयोग दर प्रयोग के बीच स्थायी समाधान कब निकलेगा।

हर बार नया उपाय, हादसों पर बेअसर
करीब 500 मीटर में रंबल स्ट्रिप लगाकर वाहनों की गति कम करने का प्रयास हुआ। डाटकाली-आशारोड़ी-मोहब्बेवाला मार्ग पर 24 घंटे टास्क फोर्स तैनात कर भारी वाहनों की जांच शुरू की गई। पहले दिन 350 से अधिक मध्यम और भारी वाहनों की जांच हुई।

चालकों को जागरूक करने के लिए सूचना पट लगाने की तैयारी हुई। अब दो किलोमीटर के दायरे में जिग-जैग बैरिकेडिंग और गति सीमा उल्लंघन पकड़ने वाले कैमरों की योजना है। लेकिन उपायों की इस लंबी फेहरिस्त के बीच गुरुवार को सुबह के बाद देर रात फिर ट्रक हादसा हो गया।

पिछले छह माह में एक दर्जन से अधिक बड़े हादसे हो चुके हैं। 20 सितंबर को सीमेंट लदा ट्रक पलटने से बाइक सवार की मृत्यु हुई थी, जबकि छह अक्टूबर को तेज रफ्तार ट्रक ने पुलिस बस को टक्कर मार दी थी। लगातार हादसे बता रहे हैं कि अब तक किए गए उपाय अपेक्षित नतीजे नहीं दे पाए हैं।

ढलान की समस्या, समाधान टुकड़ों में
डाटकाली सुरंग से निकलने के बाद भारी वाहन ढलान पर उतरते हैं, जिससे उनकी गति बढ़ने का खतरा रहता है। आगे चेकपोस्ट और स्थानीय यातायात की चुनौती है।

पहले तकनीकी निरीक्षण में भी गति नियंत्रण, संकेतक, प्रकाश व्यवस्था और चेकपोस्ट के सामने कट सुधारने जैसे उपाय सुझाए गए थे। इसके बावजूद अब तक अलग-अलग प्रयोगों के बीच ऐसा समन्वित समाधान सामने नहीं आया, जो हादसों पर निर्णायक रोक लगा सके।

वैकल्पिक मार्ग से मंदिर तक के सुझाव
स्थानीय विधायक विनोद चमोली ने निर्माणाधीन आशारोड़ी-झाझरा फोरलेन से ट्रांसपोर्टनगर तक वैकल्पिक मार्ग बनाने का सुझाव दिया है, ताकि ट्रकों को मोहब्बेवाला की ओर आने से रोका जा सके।

स्थानीय आस्था को देखते हुए हादसे वाले स्थान पर मंदिर बनाने का प्रस्ताव भी दिया गया है। लेकिन सवाल यही है कि जब रफ्तार, सड़क की बनावट और भारी वाहनों के सुरक्षित संचालन की चुनौतियां सामने हैं, तो स्थायी तकनीकी समाधान पर निर्णायक कार्रवाई कब होगी।

जिला प्रशासन, पुलिस, परिवहन विभाग और एनएचएआइ को अब तक किए गए प्रयोगों की प्रभावशीलता की समीक्षा कर समयबद्ध कार्ययोजना बनानी होगी। क्योंकि हर हादसे के बाद नया प्रयोग शुरू करना और फिर अगली दुर्घटना का सामना करना समाधान नहीं है। अब प्रयोग नहीं, नतीजे चाहिए। -विनोद चमोली, विधायक धर्मपुर

आशारोड़ी चेकपोस्ट से मोहब्बेवाला तक सिक्स-लेन को जिग-जैग बैरियर लगाए जाएंगे, ताकि वाहनों की गति नियंत्रित की जा सके। स्पीड लिमिट के डिस्प्ले बोर्ड लगाए जा रहे हैं और आनलाइन चालान के लिए कैमरे भी लगाए जा रहे हैं। हादसे रोकने को जो प्रयास हो सकते हैं, प्रशासन वह कर रहा है। :डा. आशीष चौहान, डीएम

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