उत्तराखंड के देहरादून समेत 9 जिलों में भारी बारिश को लेकर येलो अलर्ट जारी, यात्राकी गाइड और यात्रा की जानकारी……..
देहरादून: उत्तराखंड में मानसून की सक्रियता लगातार बनी हुई है। पहाड़ से मैदान तक बारिश का दौर जारी है और पिछले 24 घंटे में खासकर कुमाऊं मंडल के कई जिलों में तेज बारिश दर्ज की गई। इसके मुकाबले गढ़वाल मंडल में हल्की से मध्यम वर्षा हुई। कुमाऊं में हुई भारी बारिश का असर जनजीवन के साथ-साथ नदी-नालों और सड़कों पर भी दिखाई दे रहा है। मौसम विभाग ने गुरुवार को भी प्रदेश के नौ जिलों में भारी बारिश की संभावना को देखते हुए येलो अलर्ट जारी किया है।
कुमाऊं में बारिश ने दिखाया रौद्र रूप
पिछले 24 घंटे में सबसे अधिक बारिश नैनीताल जिले में दर्ज की गई। नैनीताल में 217 एमएम और भीमताल में 161 एमएम बारिश रिकॉर्ड हुई। हल्द्वानी में भी बारिश का जोर रहा और यहां 122.2 एमएम वर्षा दर्ज की गई। इसके अलावा मुक्तेश्वर में 107.7 एमएम, बेतालघाट में 80.5 एमएम और चंपावत में 74 एमएम बारिश रिकॉर्ड की गई। लोहाघाट में 41.5 एमएम, रुद्रप्रयाग में 41.2 एमएम और रानीखेत में 41.1 एमएम बारिश दर्ज हुई। लगातार हो रही बारिश से कुमाऊं के कई इलाकों में नदी-नाले उफान पर हैं, जबकि निचले इलाकों में जलभराव और बाढ़ जैसे हालात बनने की स्थिति बनी हुई है।
अलकनंदा, मंदाकिनी और गंगा का बढ़ा जलस्तर
लगातार बारिश का असर प्रदेश की प्रमुख नदियों के जलस्तर पर भी पड़ा है। रुद्रप्रयाग में अलकनंदा और मंदाकिनी तथा हरिद्वार में गंगा नदी का जलस्तर खतरे के स्तर के करीब पहुंच गया है। नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार वर्षा के कारण भूस्खलन की आशंका भी बनी हुई है और संवेदनशील मार्गों पर आवाजाही प्रभावित हो सकती है।
आज नौ जिलों में भारी बारिश का येलो अलर्ट
मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार गुरुवार, 3 सितंबर को प्रदेश के सभी जिलों में अनेक स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश और गरज के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है। वहीं देहरादून, टिहरी, उत्तरकाशी, चमोली, नैनीताल, चंपावत, ऊधम सिंह नगर, पिथौरागढ़ और बागेश्वर में कहीं-कहीं भारी बारिश हो सकती है। इन नौ जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है। अन्य जनपदों में भी बारिश के तीव्र दौर की संभावना जताई गई है। मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार प्रदेश में 6 सितंबर तक मानसून की सक्रियता तेज रहने की संभावना है।
अगले तीन घंटे भी बारिश का दौर रहेगा जारी
मौसम विज्ञान केंद्र की ओर से गुरुवार को जारी तात्कालिक मौसम पूर्वानुमान के अनुसार अगले तीन घंटे देहरादून के पर्वतीय क्षेत्र, उत्तरकाशी, चंपावत, ऊधम सिंह नगर और नैनीताल में कहीं-कहीं हल्की से मध्यम बारिश तथा कुछ इलाकों में वर्षा के तीव्र दौर की संभावना है। इन क्षेत्रों के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है।
इसके अलावा राज्य के अन्य जनपदों में गर्जन वाले बादल विकसित होने और हल्की बारिश की संभावना जताई गई है।
बुधवार को भी उत्तराखंड में मौसम का मिजाज बिगड़ा रहा। देहरादून समेत आसपास के क्षेत्रों में दिनभर बादल छाए रहे और रुक-रुककर हल्की बारिश होती रही। कुछ इलाकों में तेज बौछारें भी पड़ीं। पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार बारिश के चलते भूस्खलन का खतरा बना हुआ है। मंगलवार रात से बुधवार सुबह तक नैनीताल में हुई भारी बारिश से जनजीवन प्रभावित हुआ। कुमाऊं के कई क्षेत्रों में भारी बारिश के कारण नदी-नाले उफान पर आ गए, जबकि भूस्खलन के कारण पहाड़ी मार्गों पर आवाजाही प्रभावित होती रही। लगातार वर्षा के चलते तापमान भी सामान्य से कम बना हुआ है।
बारिश के बीच 152 सड़कें बंद, नैनीताल सबसे ज्यादा प्रभावित
उत्तराखंड में बारिश और भूस्खलन के कारण लगातार दूसरे दिन भी 150 से अधिक सड़कें बंद रहीं। मंगलवार को प्रदेश में 172 सड़कें बंद थीं, जबकि बुधवार को भी 152 मार्ग बंद रहे। इनमें अल्मोड़ा में आठ, बागेश्वर में 15, चमोली में 21, देहरादून में 11, नैनीताल में 47, पौड़ी में आठ, पिथौरागढ़ में 15, रुद्रप्रयाग में 10, टिहरी में 11 और उत्तरकाशी में छह मार्ग बंद हैं। सबसे ज्यादा 47 सड़कें नैनीताल जिले में प्रभावित हैं, जबकि चमोली में 21 और बागेश्वर तथा पिथौरागढ़ में 15-15 मार्ग बंद हैं। सड़कों के बंद होने से पहाड़ी क्षेत्रों में लोगों की आवाजाही प्रभावित हो रही है और कई इलाकों में यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। संबंधित विभाग बंद मार्गों को खोलने के लिए लगातार काम कर रहे हैं।
6 सितंबर तक सक्रिय रहेगा मानसून
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार उत्तराखंड में अगले कुछ दिन बारिश के लिहाज से महत्वपूर्ण रहने वाले हैं। 6 सितंबर तक मानसून की सक्रियता तेज रहने की संभावना है। ऐसे में पहाड़ी जिलों में भूस्खलन, सड़क बाधित होने और नदी-नालों का जलस्तर बढ़ने का खतरा बना रह सकता है। भारी बारिश के दौरान संवेदनशील पहाड़ी मार्गों और नदी-नालों के आसपास जाने से बचने तथा स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग की ओर से जारी advisories का पालन करने की सलाह दी गई है।

