उत्तराखंड के हरिद्वार जमीन घोटाला में सस्पेंड रहेंगे उत्तराखंड ये दो IAS अफसर, केंद्र से भी नहीं मिली राहत……….

देहरादून: हरिद्वार नगर निगम जमीन घोटाले में फंसे दो IAS अधिकारियों का मुश्किलें कम होती नहीं दिख रही है. राज्य के बाद केंद्र ने भी IAS अधिकारियों का सस्पेंशन जारी रखा है. इसके बाद IAS कर्मेंद्र सिंह और वरुण चौधरी अगले 6 महीने के लिए सस्पेंड रहेंगे। गृह सचिव शैलेश बगौली ने दोनों आईएएस अधिकारियों के निलंबन की अवधि बढ़ाए जाने की पुष्टि की है. उनके अनुसार केंद्र सरकार द्वारा जारी आदेश के तहत कर्मेंद्र सिंह और वरुण चौधरी का निलंबन आगामी छह महीने तक प्रभावी रहेगा।

सस्पेंड IAS अधिकारियों को कोई राहत नहीं: उत्तराखंड के चर्चित हरिद्वार भूमि घोटाला मामले में आरोपी बनाए गए दो वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों को फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है. राज्य सरकार के बाद केंद्र सरकार ने भी उनके निलंबन को जारी रखने का फैसला किया है। इसके तहत तत्कालीन हरिद्वार जिलाधिकारी कर्मेंद्र सिंह और तत्कालीन नगर निगम आयुक्त वरुण चौधरी का निलंबन अगले छह महीने के लिए बढ़ा दिया गया है. इस फैसले के बाद दोनों अधिकारी नवंबर तक सस्पेंड रहेंगे।

सस्पेंड हुए दोनों अधिकारियों को एक साल हुआ: हरिद्वार नगर निगम से जुड़े इस भूमि प्रकरण को उत्तराखंड के इतिहास के सबसे बड़े जमीन घोटालों में से एक माना जा रहा है। करोड़ों रुपये के इस मामले ने राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था और सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं. इसी मामले में जांच के दायरे में आने के बाद दोनों आईएएस अधिकारियों को निलंबित किया गया था और पिछले एक वर्ष से वे निलंबन की स्थिति में हैं।

केंद्र सरकार ने निलंबन 6 महीने के लिए बढ़ाया: दरअसल, 3 जून को दोनों अधिकारियों के निलंबन का एक वर्ष पूरा हो गया था. नियमानुसार इस अवधि के बाद उनके मामले की समीक्षा की जानी थी और यह उम्मीद लगाई जा रही थी कि उन्हें कुछ राहत मिल सकती है. हालांकि, समीक्षा के बाद केंद्र सरकार ने निलंबन को समाप्त करने के बजाय उसे छह महीने के लिए और बढ़ाने का निर्णय लिया। इससे साफ संकेत मिलता है कि जांच एजेंसियां और सरकार अभी इस मामले को पूरी तरह समाप्त मानने के पक्ष में नहीं हैं।

हरिद्वार भूमि घोटाले में करोड़ों रुपये की सरकारी जमीन की खरीद और भुगतान को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं. इसी आधार पर हरिद्वार के तत्कालीन जिलाधिकारी कर्मेंद्र सिंह और नगर निगम आयुक्त वरुण चौधरी को जिम्मेदार मानते हुए कार्रवाई की गई थी. अब केंद्र सरकार के इस फैसले के बाद दोनों अधिकारियों को कम से कम अगले छह महीने तक बहाली का इंतजार करना पड़ेगा।

पीसीएस अफसर को भी राहत मिलने की कम ही उम्मीद: इस निर्णय का असर इस मामले में निलंबित अन्य अधिकारियों पर भी पड़ सकता है। विशेष रूप से पीसीएस अधिकारी अजयवीर सिंह के लिए भी फिलहाल राहत की संभावनाएं कम नजर आ रही हैं. अजयवीर सिंह भी इसी प्रकरण में निलंबन झेल रहे हैं।

हालांकि, उनके मामले में छह महीने के भीतर होने वाली समीक्षा समिति की बैठक अब तक आयोजित नहीं हो सकी है. ऐसे में उनके निलंबन को बढ़ाने या बहाल करने को लेकर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है. लेकिन आईएएस अधिकारियों के निलंबन को आगे बढ़ाए जाने के बाद यह माना जा रहा है कि अजयवीर सिंह को भी जल्द राहत मिलने की संभावना कम है।

54 करोड़ रुपए का कथित भूमि घोटाला: उधर इस पूरे मामले में कई ऐसे सवाल हैं जिनका जवाब अभी तक सामने नहीं आ पाया है. करीब 54 करोड़ रुपये के इस कथित भूमि घोटाले को लेकर सरकार ने विजिलेंस जांच भी कराई थी। विजिलेंस विभाग अपनी प्रारंभिक जांच पूरी कर रिपोर्ट सरकार को सौंप चुका है. इसके बावजूद जांच के कई महत्वपूर्ण पहलुओं को सार्वजनिक नहीं किया गया है।

विस्तृत रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई: सबसे बड़ा सवाल 54 करोड़ रुपये के कथित वित्तीय लेन-देन यानी मनी ट्रेल को लेकर उठ रहा है। अब तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि इतनी बड़ी राशि का प्रवाह किन-किन स्तरों से होकर गुजरा और इस पूरे लेन-देन में किन अधिकारियों अथवा अन्य व्यक्तियों की भूमिका रही। सरकार की ओर से इस संबंध में कोई विस्तृत रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है, जिसके कारण मामले को लेकर लगातार अटकलें लगाई जा रही हैं।

जानकारों का मानना है कि यदि मनी ट्रेल की पूरी जानकारी सार्वजनिक होती है तो यह स्पष्ट हो सकेगा कि क्या केवल वही अधिकारी जिम्मेदार थे जिनके हस्ताक्षर संबंधित फाइलों और दस्तावेजों पर मौजूद हैं या फिर इस पूरे प्रकरण में अन्य अधिकारी, कर्मचारी अथवा बाहरी लोग भी किसी न किसी रूप में शामिल थे. फिलहाल इस संबंध में स्थिति पूरी तरह साफ नहीं हो सकी है।

विपक्षी दल और विभिन्न सामाजिक संगठन भी लगातार मांग कर रहे हैं कि सरकार इस मामले की पूरी जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करे, ताकि जनता को वास्तविक स्थिति का पता चल सके। उनका कहना है कि जब मामला करोड़ों रुपये की सरकारी संपत्ति और सार्वजनिक धन से जुड़ा है तो जांच की पारदर्शिता बेहद आवश्यक है।

दूसरी ओर सरकार का कहना है कि जांच प्रक्रिया अभी विभिन्न स्तरों पर जारी है और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सभी तथ्यों को सार्वजनिक किया जाएगा।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नगर निगम हरिद्वार में हुए जमीन घोटाले पर सख्त रुख अपनाते हुए, दो आईएएस, एक पीसीएस अधिकारी सहित सात अधिकारियों को निलंबित करने के निर्देश दिए हैं, इस मामले में तीन अधिकारी पूर्व में निलंबित हो चुके हैं।

क्या है पूरा मामला: उत्तराखंड में हरिद्वार नगर निगम से जुड़े करीब 54 करोड़ रुपये के कथित जमीन घोटाले का मामला बीते साल 2025 में सामने आया था। मामला 2024 का है। दरअसल, 2024 निकाय चुनाव के दौरान हरिद्वार नगर निगम का पूरा सिस्टम नगर आयुक्त के पास था। IAS वरुण चौधरी नगर आयुक्त की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। निकाय चुनाव का समय था तो पूरे जिले में आचार संहिता लगी हुई थी लेकिन उस दौरान हरिद्वार नगर निगम ने 33 बीघा जमीन खरीदी जिसकी कीमत करीब 54 करोड़ रुपए थी।

जांच में पता चला कि जो जमीन खरीदी गई उसके आसपास हरिद्वार नगर निगम का कूड़ा डंप किया जाता रहा है, इस कारण उस जमीन की कीमत ज्यादा नहीं थी। लेकिन नगर निगम और कुछ प्रशासनिक अफसरों ने कृषि भूमि को 143 में दर्ज करवाकर सरकारी बजट से 54 करोड़ रुपए में खरीदा।

मामला उजागर होते ही राज्य की राजनीति में हलचल मच गई थी. आरोप लगे थे कि नगर निगम की जमीन से जुड़े लेनदेन में गंभीर अनियमितताएं की गईं। इसके बाद शासन ने तत्काल जांच के आदेश दिए और IAS अधिकारी रणवीर सिंह चौहान को जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई।

जांच रिपोर्ट में प्रथम दृष्टया गड़बड़ियां सामने आने के बाद मुख्यमंत्री के निर्देश पर कड़ी कार्रवाई की गई थी और तत्कालीन हरिद्वार जिलाधिकारी कर्मेंद्र सिंह और हरिद्वार नगर निगम के तत्कालीन नगर आयुक्त वरुण चौधरी को निलंबित कर दिया गया था। इनके अलावा तत्कालीन एसडीएम अजयवीर सिंह समेत नगर निगम के कई अन्य कर्मचारियों पर भी निलंबन की कार्रवाई हुई थी।

By admin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *