उत्तराखंड की राजधानी में रात को बार की समय सीमा पर मचा बवाल, एडीजी ने एसएसपी और आईजी से तलब की रिपोर्ट…….

देहरादून: राजपुर रोड स्थित रोमियो लेन बार-रेस्टोरेंट में शनिवार रात हुआ घटनाक्रम आज पूरे दिन सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना रहा । पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर लगातार सवाल उठाए गए। अब इस मामले में आईजी का बयान भी सामने आया हैं।

शनिवार रात रोमियो लेन बार-रेस्टोरेंट में आईजी अपने परिवार के साथ मौजूद थे, जबकि नीचे एक साथ छह थानों की पुलिस तैनात दिखी।

समय सीमा के बीच बढ़ा विवाद
सूत्रों के मुताबिक, वीकेंड पर बार-रेस्टोरेंट के संचालन का समय रात 12 बजे तक निर्धारित है। आईजी का कहना है कि वे तय समय के भीतर ही बाहर निकल आए थे और किसी तरह का उल्लंघन नहीं हुआ।

हालांकि, जैसे ही वे नीचे पहुंचे, वहां भारी पुलिस बल मौजूद था, जिस पर उन्होंने सवाल उठाया कि एक ही स्थान पर इतनी फोर्स क्यों तैनात की गई।

शहर में सुरक्षा कौन संभालेगा ?”
आईजी ने मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों से कहा कि यदि इसी दौरान शहर के अन्य हिस्सों में कोई घटना हो जाती, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेता।

बताया जा रहा है कि इस दौरान एक थानाध्यक्ष को फटकार लगाए जाने की चर्चा ने मामले को और संवेदनशील बना दिया।

शिकायत पर पहुंचे SSP, तब तक जा चुके थे IG
सूत्रों के अनुसार, प्रमेंद्र सिंह डोभाल (एसएसपी देहरादून) को शिकायत मिली थी कि बार तय समय के बाद भी खुला है।

वे मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक आईजी वहां से जा चुके थे। करीब 12:15 बजे बार बंद कराया गया और संचालक को नियमों का पालन करने के निर्देश दिए गए।

SP सिटी ने दी सफाई
प्रमोद कुमार (एसपी सिटी) ने कहा कि घटना के समय वे मौके पर मौजूद नहीं थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि अलग-अलग टीमें रात्रि चेकिंग में लगी थीं और उनका नाम गलत तरीके से जोड़ा जा रहा है।

पूरे घटनाक्रम के बाद पुलिस विभाग में चर्चा है कि अगर प्रतिष्ठान समय के भीतर ही बंद हो रहा था, तो इतनी बड़ी कार्रवाई क्यों हुई।

एक ही बार पर छह थानों की पुलिस की मौजूदगी को सामान्य चेकिंग से ज्यादा माना जा रहा है और इसे आंतरिक खींचतान से भी जोड़ा जा रहा है।

ADG ने मांगी 24 घंटे में रिपोर्ट
मामले की गंभीरता को देखते हुए वी मुरुगेशन (एडीजी कानून-व्यवस्था) ने आईजी और एसएसपी से 24 घंटे के भीतर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।

यह पूरा मामला अब सिर्फ एक बार की चेकिंग तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पुलिस महकमे के भीतर समन्वय और अधिकार क्षेत्र को लेकर बड़े सवाल खड़े कर रहा है।

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