उत्तराखंड में अब ट्रैकिंग कंपनियों से वसूला जाएगा शुल्क। नियम तोड़े तो ₹50 हजार जुर्माना, जानिए मामला……….

उत्तरकाशी: उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में स्थित ग्राम सभा गंगाड़ ने ट्रैकिंग कंपनियों के लिए सख्त नियम लागू कर दिए हैं। ग्राम प्रधान की अध्यक्षता में आयोजित खुली बैठक में सर्वसम्मति से फैसला लिया गया कि ग्राम पंचायत क्षेत्र से होकर गुजरने वाले सभी ट्रैकिंग दलों को अब स्थानीय विकास एवं पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रति ग्रुप 2,000 रुपये शुल्क जमा करना होगा।

ग्राम सभा के इस निर्णय को क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों, बुग्यालों, जल स्रोतों और स्थानीय संस्कृति के संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

इन ट्रैकिंग रूटों पर लागू होंगे नए नियम-
ग्राम पंचायत गंगाड़ के अंतर्गत आने वाले प्रमुख ट्रैकिंग मार्ग—

जोन बाम्बे – रुईसारा ट्रैक
बाली पास ट्रैक
काला नाग (ब्लैक पीक) ट्रैक
धोनदार कांटी पास ट्रैक
पर आने वाले प्रत्येक ट्रैकिंग दल को ग्राम पंचायत में निर्धारित शुल्क जमा करना अनिवार्य होगा।

पर्यावरण से खिलवाड़ पड़ा भारी तो लगेगा ₹50 हजार तक जुर्माना।

ग्राम सभा ने पर्यावरण संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए स्पष्ट किया है कि ट्रैकिंग कंपनियों को अपने दल द्वारा उत्पन्न प्लास्टिक एवं अन्य कचरे को वापस लाना अनिवार्य होगा। ट्रैकिंग मार्गों, बुग्यालों और प्राकृतिक स्थलों पर किसी भी प्रकार का कचरा छोड़ना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।

नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों पर 50 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा।

धार्मिक स्थलों और स्थानीय संस्कृति का करना होगा सम्मान
ग्राम सभा द्वारा पारित प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि ट्रैकिंग कंपनियों को क्षेत्र के धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों का सम्मान करना होगा। बिना अनुमति किसी भी प्रकार का स्थायी कैंप स्थापित करने की अनुमति नहीं होगी।

साथ ही जल स्रोतों, चारागाहों और बुग्यालों को प्रदूषित करने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है।

ग्राम सभा ने सभी ट्रैकिंग कंपनियों को निर्देशित किया है कि वे 12 जून 2026 तक प्रति ग्रुप 2,000 रुपये की राशि ग्राम प्रधान के माध्यम से ग्राम पंचायत में जमा करना सुनिश्चित करें।

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि भविष्य में यदि कोई कंपनी नियमों का उल्लंघन करती पाई गई तो उसके खिलाफ ग्राम सभा क्षेत्र में ट्रैक संचालन पर प्रतिबंध लगाने की संस्तुति भी की जा सकती है।

प्राकृतिक धरोहर बचाने की पहल
ग्रामीणों का कहना है कि यह निर्णय क्षेत्र के संवेदनशील पर्यावरण, जल स्रोतों, बुग्यालों और स्थानीय सांस्कृतिक विरासत की रक्षा के उद्देश्य से लिया गया है। ग्राम सभा ने उम्मीद जताई कि ट्रैकिंग कंपनियां इन नियमों का पालन कर सतत एवं जिम्मेदार पर्यटन को बढ़ावा देंगी।

By admin

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