उत्तराखंड में एवरेस्ट विजेता बछेंद्री पाल पहुंची आदि कैलास, पूरा किया अपनी सहेली का अधूरा सपना……..

धारचूला: भारत की प्रथम महिला एवरेस्ट विजेता और प्रख्यात पर्वतारोही बछेंद्री पाल ने सीमांत जनपद पिथौरागढ़ के आदि कैलास यात्रा मार्ग पर हैं। ब्यास घाटी पहुंचने पर स्थानीय होमस्टे संचालकों और ग्रामीणों द्वारा परंपरा के अनुसार उनका भव्य स्वागत किया गया। इस दौरान बछेंद्री पाल के साथ देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए वरिष्ठ पर्वतारोहियों का एक विशेष दल भी रहा। उन्होंने कहा कि उनका आदि कैलास दर्शन का सपना पूरा हुआ।

बछेंद्री पाल ने अपने इस सफर को बेहद भावुक और यादगार बताया। उन्होंने भावुक होते हुए साझा किया कि आदि कैलाश के दर्शन करना उनका एक पुराना और संजोया हुआ सपना था।

दिवंगत सहेली के सपने को किया पूरा
वर्ष 2004-05 में कुमाऊं मंडल विकास निगम और टाटा स्टील के सहयोग से उन्होंने यहां के लिए एक विशेष अभियान की रूपरेखा भी तैयार की थी, परंतु ऐन वक्त पर मां की अचानक तबीयत खराब हो जाने के कारण वे इस यात्रा पर नहीं आ सकी थीं।

पर्वतारोही पाल ने बताया कि यह विशेष यात्रा उनकी बेहद करीबी मित्र और एवरेस्ट अभियान की साथी रहीं दिवंगत।

रीता गोम्बू मारवा को एक सच्ची श्रद्धांजलि है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष वे दोनों एक साथ आदि कैलास आने की योजना बना रही थीं, लेकिन दुर्भाग्यवश अब रीता उनके बीच नहीं रहीं।

ऐसे में अपनी दिवंगत सहेली के अधूरे सपने को पूरा करने और उन्हें नमन करने के उद्देश्य से उन्होंने इस बार शत-प्रतिशत संकल्प के साथ यह यात्रा पूरी की है। उन्होंने स्थानीय लोगोंसे बातचीत में सीमांत क्षेत्र के अद्वितीय प्राकृतिक सौंदर्य और स्थानीय लोगों के आत्मीय व्यवहार की सराहना करते हुए उ यात्रा को अपने जीवन का यादगार अनुभव बताया।

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