उत्तराखंड में भानियावाला-ऋषिकेश प्रोजेक्ट पर NHAI की सफाई, कहा- ‘अदालत के आदेशों का हो रहा है पूर्ण पालन’……..

देहरादून: भानियावाला-जालीग्रांट-ऋषिकेश फोर सिक्स लेन राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना में पर्यावरण एवं वन संरक्षण संबंधी सवालों पर एनएचएआइ ने स्पष्ट किया है कि परियोजना में पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीवों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।

प्राधिकरण ने हाइकोर्ट के आदेशों की अवहेलना कर पेड़ कटान किए जाने के दावों को भ्रामक बताया।

एनएचएआइ के परियोजना निदेशक (पीआइयू) सौरभ सिंह ने कहा कि परियोजना की डिजाइन तैयार करते समय पर्यावरणीय प्रभाव कम करने के लिए वन क्षेत्र में राइट आफ वे (आरओडब्ल्यू) 60 मीटर से घटाकर 23 मीटर किया गया है।

हाथियों और अन्य वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही के लिए एक ब्रिज-कम-एलीफेंट अंडरपास, चार एलीफेंट अंडरपास, छह बाक्स कल्वर्ट और 13 पाइप कल्वर्ट बनाए जा रहे हैं।

साथ ही ग्रीन गाइड हेज, साउंड बैरियर, एंटी-ग्लेयर स्क्रीन, वन्यजीव चेतावनी संकेतक और नो हार्न जोन जैसी व्यवस्थाएं भी की जा रही हैं।

उन्होंने बताया कि प्रतिपूरक वनीकरण और उसके 10 वर्षों के रखरखाव के लिए 1.97 करोड़ रुपये से अधिक तथा वन्यजीव राहत एवं मिट्टी-जल संरक्षण योजनाओं के लिए 6.04 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जमा कराई गई है।

राज्य सरकार ने प्रतिपूरक वनीकरण के लिए 40 हेक्टेयर गैर-वन भूमि भी वन विभाग को हस्तांतरित की है। परियोजना से प्रभावित 4,369 वृक्षों में से 754 का वैज्ञानिक तरीके से प्रत्यारोपण किया जाएगा।

सौरभ सिंह ने कहा कि परियोजना के खिलाफ दायर अवमानना याचिका को उच्च न्यायालय पहले ही खारिज कर चुका है।

उन्होंने कहा कि सभी आवश्यक वन एवं पर्यावरणीय स्वीकृतियां प्राप्त करने के बाद ही निर्माण कार्य शुरू किया गया है और प्रत्येक चरण में न्यायालय के निर्देशों व पर्यावरणीय शर्तों का पूर्ण पालन किया जा रहा है।

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