उत्तराखंड में हरिद्वार के इंजीनियर प्रधान के प्रयास से 214 घरों में जल रहे बेफिक्री के चूल्हे, गैस संकट का निकला समाधान……

हरिद्वार: हरिद्वार के इब्राहिमपुर गांव में इंजीनियर प्रधान स्वामी घनश्याम ने सामुदायिक बायोगैस संयंत्रों और लेमनग्रास खेती के माध्यम से गांव की तस्वीर बदल दी है। बहुराष्ट्रीय कंपनी की नौकरी छोड़ गांव लौटे मैकेनिकल इंजीनियर और इब्राहिमपुर ग्राम प्रधान स्वामी घनश्याम ने अपने तकनीकी सोच और सामुदायिक प्रयासों से हरिद्वार के इब्राहिमपुर गांव की तस्वीर बदल दी है।

गांव में गोबर प्रबंधन की समस्या और रसोई गैस पर बढ़ती निर्भरता को देखते हुए उन्होंने सामुदायिक बायोगैस संयंत्र स्थापित कराया, जिसका परिणाम यह हुआ कि ग्राम पंचायत के अंतर्गत हलजौरा गांव एलपीजी मुक्त हो गया है, जबकि 300 परिवारों वाली इस ग्राम पंचायत में 214 परिवार बायोगैस पर भोजन पका रहे हैं।

इतना ही नहीं, प्रधान ने जंगल से सटे क्षेत्र में जंगली जानवरों से फसलों को बचाने के लिए ग्रामीणों को लेमनग्रास खेती के लिए प्रेरित किया। नतीजन वर्तमान में 100 से ज्यादा किसान करीब 400 बीघा भूमि पर लेमनग्रास उगा रहे हैं और पंचायत के संयंत्र में प्रतिवर्ष लगभग 20 टन तेल का उत्पादन हो रहा है।

स्वामी घनश्याम वर्ष 2015 तक एक मल्टीनेशनल कंपनी में कार्यरत थे। गांव लौटने के बाद उन्होंने वर्ष 2016 में धन्वंतरि आश्रम ट्रस्ट की स्थापना कर ग्रामीणों को स्वरोजगार से जोड़ना शुरू किया। अचार, जैम और जूस आदि उत्पाद तैयार कराने शुरू किए। वर्ष 2022 में वह प्रधान निर्वाचित हुए।

गांव में मवेशियों की अधिकता के कारण गोबर से गंदगी बढ़ रही थी। इसी चुनौती को अवसर में बदलते हुए उन्होंने स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत 45 घनमीटर क्षमता वाला सामुदायिक बायोगैस संयंत्र और 16 छोटे बायोगैस संयंत्र स्थापित कराए। सामुदायिक बायोगैस संयंत्र के पास पंचायत की एक गोशाला भी बनाई।

संयंत्र में प्रतिदिन लगभग 900 किलो गोबर डाला जाता है, जिससे करीब 18 किलो गैस तैयार होती है। इसके अतिरिक्त प्रधान घनश्याम ने ग्राम पंचायत इब्राहिमपुर के 178 घरों में सीएसआर के सहयोग से छोटे बायोगैस संयंत्र लगवाए। संयंत्रों से निकलने वाली स्लरी का उपयोग किसान जैविक खाद के रूप में कर रहे हैं।

खेती में भी नया प्रयोग
प्रधान के प्रयास से इब्राहिमपुर पंचायत ने खेती में भी नया प्रयोग किया है। गांव जंगल से सटे होने के कारण जंगली जानवर पारंपरिक फसलों को नुकसान पहुंचाते थे। इसके समाधान के तौर पर ग्रामीणों को लेमनग्रास खेती के लिए प्रेरित किया गया। आज लेमनग्रास तेल 1100 से 1500 रुपये प्रति लीटर तक बिक रहा है। इसके अलावा महिला समूह मसाले, सरसों तेल, आटा और अचार तैयार कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती दे रहे हैं।

इब्राहिमपुर पंचायत में का यह माडल रसोई गैस संकट के समाधान के साथ स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण व लेमनग्रास की खेती, जैविक खेती को भी बढ़ावा दे रहा है। पारंपरिक संसाधनों को आधुनिक तकनीक से जोड़कर इब्राहिमपुर के प्रधान ने साबित कर दिखाया कि इच्छाशक्ति और सामुदायिक सहयोग से आत्मनिर्भरता कोई दूर की बात नहीं। -ललित नारायण मिश्रा, मुख्य विकास अधिकारी, हरिद्वार।

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