पर्यटन यात्रा का प्रमुख द्वार बनकर उभरा बरेली, कुमाऊँ, रामनगर, नीम करौली का प्रवेश द्वार ……..

हल्द्वानी: उत्तर प्रदेश का शहर बरेली आज एक ऐतिहासिक नगर होने के साथ-साथ उत्तराखंड की आध्यात्मिक और पर्यटन यात्रा का प्रमुख द्वार बनकर उभर रहा है. कुमाऊँ का प्रवेश द्वार और उत्तराखंड का प्रवेश द्वार के रूप में पहचाना जाने वाला यह शहर हर साल हजारों पर्यटकों और श्रद्धालुओं की यात्रा का शुरुआती पड़ाव बनता है. यहां से निकलने वाले कई प्रमुख मार्ग सीधे पहाड़ी क्षेत्रों की ओर जाते हैं।

उत्तर प्रदेश का शहर बरेली आज एक ऐतिहासिक नगर होने के साथ-साथ उत्तराखंड की आध्यात्मिक और पर्यटन यात्रा का प्रमुख द्वार बनकर उभर रहा है. कुमाऊँ का प्रवेश द्वार और उत्तराखंड का प्रवेश द्वार के रूप में पहचाना जाने वाला यह शहर हर साल हजारों पर्यटकों और श्रद्धालुओं की यात्रा का शुरुआती पड़ाव बनता है. यहां से निकलने वाले कई प्रमुख मार्ग सीधे पहाड़ी क्षेत्रों की ओर जाते हैं।

जिनसे होकर लोग कुमाऊँ, रामनगर, नीम करौली, जागेश्वर धाम, गिरिजा देवी, चंपावत होते हुए पाताल लोक जिसे हम लोग पाताल भुवनेश्वर के नाम से भी जानते है और सबसे महत्वपूर्ण कैलाश मानसरोवर की यात्रा भी बरेली के डमरु चौराहे से ही होते हुए शुरू होती है. और भक्त अपने गंतव्य की ओर पहुंचते हैं. विशेष रूप से कुमाऊँ क्षेत्र की यात्रा करने वाले श्रद्धालु और पर्यटक बरेली से ही अपनी यात्रा की शुरुआत करते हैं. जिससे इस शहर का महत्व और बढ़ जाता है।

बरेली के वरिष्ठ इतिहासकार डॉ. राजेश शर्मा बताते हैं कि बरेली की अपनी एक अलग पहचान है, जिसे नाथों की नगरी के रूप में भी जाना जाता है. यहां से आगे की यात्रा में श्रद्धालुओं को कई प्रमुख धार्मिक स्थलों के दर्शन का अवसर मिलता है. यात्रा के दौरान आगे बढ़ते हुए जागेश्वर धाम, नीम करौली बाबा आश्रम, बागेश्वर धाम और पूर्णागिरि मंदिर जैसे प्रमुख स्थानों के दर्शन होते हैं. पाताल भुवनेश्वर एवं कैलाश मानसरोवर तक,आगे बढ़ने पर श्रद्धालु कैलाश पर्वत की ओर जाने वाले मार्गों से भी जुड़ते हैं, जिसे अत्यंत पवित्र माना जाता है. पूरा कुमाऊँ क्षेत्र देवभूमि के रूप में जाना जाता है, जहां हर ओर आस्था और प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।

पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि बरेली की भौगोलिक स्थिति इसे उत्तर भारत के धार्मिक और पर्वतीय पर्यटन का महत्वपूर्ण केंद्र बनाती है. यही कारण है कि यहां से उत्तराखंड के प्रवेश द्वार की शुरुआत मानी जाती है, और बरेली के बाद ही पहाड़ी क्षेत्रों की वास्तविक यात्रा आरंभ हो जाती है. इस प्रकार, बरेली उत्तराखंड की आध्यात्मिक और प्राकृतिक यात्रा का मुख्य प्रवेश द्वार है, जहां से देवभूमि की अनोखी यात्रा शुरू होती है।

By admin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *