उत्तराखंड की राजधानी में दिल्ली-दून एक्सप्रेस-वे शुरू होने के बाद पहले ही वीकेंड पर यातायात सिस्टम ध्वस्त, दोगुना दिखा ट्रैफिक………

देहरादून: दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे शुरू होने के बाद पुलिस के लिए यातायात प्रबंधन बड़ी चुनौती बन गया है। वीकेंड आते ही मसूरी, देहरादून और ऋषिकेश की सड़कों पर वाहनों का दबाव दोगुना हो जाता है।

पर्यटन सीजन और छुट्टियों के चलते बड़ी संख्या में पर्यटक इन शहरों का रुख कर रहे हैं, जिससे यातायात व्यवस्था पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है। हालात यह हैं कि प्रमुख चौराहों और मार्गों पर लंबा जाम लग रहा है और लोगों को घंटों तक फंसना पड़ रहा है।

बीते शनिवार और रविवार को सबसे ज्यादा दबाव देहरादून-मसूरी मार्ग, ऋषिकेश-देहरादून हाईवे और शहर के अंदरूनी क्षेत्रों में देखने को मिला। मसूरी जाने वाले पर्यटकों के कारण राजपुर रोड से लेकर किंग्रेग रोड तक वाहनों की कतारें लग जाती हैं। वहीं, ऋषिकेश में लक्ष्मण झूला और तपोवन क्षेत्र के आसपास ट्रैफिक की स्थिति बेहद खराब हो जाती है।

कैमरों से डाटा निकालकर विश्लेषण किया
यातायात पुलिस की ओर से स्वचालित नंबर प्लेट पहचान (एएनपीआर) कैमरों से डाटा निकालकर विश्लेषण किया गया, तो नतीजे चौकाने वाले आए। 28 अप्रैल (मंगवाल) को देहरादून में छोटे-बड़े 25,884, 29 अप्रैल (बुधवार) को वाहनों की संख्या 25,432 जबकि 30 अप्रैल (गुरुवार) को 34,403 वाहन देहरादून शहर में दाखिल होकर मसूरी, ऋषिकेश व अन्य पर्यटन स्थलों को गए।

एक मई (शुक्रवार) से तीन मई (रविवार) तक वीकेंड था। एक मई को 51,800 वाहन इनमें 1800 बड़े वाहन, 35,000 छोटे वाहन, जबकि 1500 मोटरसाइकिल शहर में दाखिल हुईं। इसी तरह दो मई को 43,300 वाहन जिनमें 1300 बड़े वाहन, 42,000 छोटे वाहन और 1000 मोटरसाइकिल ने शहर में प्रवेश किया।

पुलिस के पास सीमित संसाधन।
ट्रैफिक पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती सीमित संसाधनों में बढ़ते वाहनों को नियंत्रित करना है। हर प्रमुख मोड़ और चौराहे पर पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं, लेकिन भीड़ इतनी ज्यादा होती है कि व्यवस्था बनाए रखना मुश्किल हो जाता है।

कई जगहों पर मैनुअल ट्रैफिक कंट्रोल करना पड़ रहा है, जिससे पुलिसकर्मियों पर दबाव बढ़ रहा है। यातायात पुलिस की ओर से हालात संभालने के लिए डायवर्जन प्लान लागू किया जाता है, लेकिन प्लान को लागू करने के लिए कर्मचारी ही तैनात नहीं हैं। इसके अलावा पार्किंग स्थलों की कमी भी समस्या को बढ़ा रही है।

बढ़ते वाहनों के दबाव से स्थानीय लोग भी परेशान।
स्थानीय लोगों को भी इस स्थिति से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। रोजमर्रा के कामों के लिए निकलने वाले लोगों को जाम में फंसना पड़ता है, जिससे उनका समय और काम दोनों प्रभावित हो रहे हैं। आने वाले समय में पर्यटन सीजन और बढ़ने के साथ यह समस्या और गंभीर हो सकती है।

ऐसे में ट्रैफिक प्रबंधन को और मजबूत करने की जरूरत महसूस की जा रही है। फिलहाल, हर वीकेंड पुलिस के लिए परीक्षा जैसा बन गया है, जहां बढ़ते ट्रैफिक के बीच व्यवस्था बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई।

वीकेंड पर यातायात प्रबंधन बड़ी चुनौती बन गई है। वीकेंड पर आशारोड़ी से मसूरी तक लगे भारी जाम को देखते हुए रूट को अलग-अलग सेक्टरों में विभाजित करते हुए सेक्टरवार ड्यूटी लगाई जाएगी। हर पांच किलोमीटर को एक सेक्टर में बांटते हुए वहां पर एक सब इंस्पेक्टर व सिपाही तैनात किया जाएगा। सेक्टर के पर्यवेक्षण की जिम्मेदारी सीओ की रहेगी। इसके अलावा वीकेंड पर अधिक से अधिक पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई जाएगी। –लोकजीत सिंह, पुलिस अधीक्षक, यातायात

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