उत्तराखंड में अब दलबदल के खेल में ‘हरदा’ बोले हम भी चुप नहीं बैठने वाले…

 

देहरादून : उत्तराखंड में 2017 विधानसभा चुनाव से पहले दलबदल की राजनीति शुरू हो गई है, राजनीति 2022 विधानसभा चुनाव तक जारी रहेगी, विधानसभा चुनाव से ठीक पहले जहां भाजपा ने पुरोला से कांग्रेस विधायक राजकुमार, धनोल्टी के निर्दलीय विधायक प्रीतम पंवार सहित भीमताल विधायक राम सिंह कैड़ा को भाजपा में शामिल किए जाने के बाद कांग्रेस ने मास्टर स्टॉक खेलते हुए उत्तराखंड सरकार के कद्दावर मंत्री राज्य के सबसे बड़े दलित नेता यशपाल आर्य एवं उनके विधायक पुत्र संजीव आर्य को कांग्रेस में शामिल करा कर भाजपा को करारा जवाब दिया है।

ऐसे में एक बार फिर से पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव हरीश रावत ने यह साफ कर दिया है कि दलबदल की राजनीति में हम भाजपा से पीछे नहीं होंगे और दलबदल के खेल में हम किसी भी हालत में चुप नहीं बैठेंगे। विधानसभा चुनाव से ठीक पहले यशपाल आर्य की कांग्रेस में वापसी से हरीश रावत आत्मविश्वास के साथ उत्साहित नजर आ रहे हैं और वह पूरी तरीके से अब भाजपा के खिलाफ आक्रामक मोड में आ गए हैं।

हरीश रावत ने कहा कि वह हमेश से दलबदल की राजनीति के खिलाफ रहे हैं, लेकिन जिस तरह से भाजपा दलबदल का खेल कर रही है, ऐसे में उसको करारा जवाब देना बहुत जरूरी है, इसी क्रम में यशपाल आर्य और संजीव आर्य की घर वापसी इसका जीता जागता उदाहरण है। वही हरीश रावत ने यह भी संकेत दिए हैं कि भाजपा सरकार के कुछ और बड़े लोग उनके संपर्क में हैं, जो कि भाजपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो सकते है।

वहीं सूत्रों से यह भी जानकारी मिल रही है कि सरकार के कुछ कैबिनेट मंत्री और कुछ विधायक हरीश रावत के संपर्क में है जोकि कभी भी कांग्रेस की सदस्यता ले सकते हैं, यशपाल आर्य और संजीव आर्य की वापसी से कहीं ना कहीं उत्तराखंड में कांग्रेस को एक बहुत बड़ी संजीवनी मिली है। इस संजीवनी के दम पर कांग्रेस आने वाले समय में दल बदल की राजनीति में भाजपा से आगे निकल सकती है। जिसके संकेत पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव हरीश रावत ने साफ तौर से दे दिए हैं।

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