नेपाल जैसी तबाही का डर, देश की 5 ग्लेशियर झीलें अति संवेदनशील, मंडरा रहा बड़ा खतरा………

देहरादून: नेपाल की तबाही में 538 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। मौत का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। इस बीच देश में बड़ा खतरा मंडरा रहा है। मौसम के बदलते ट्रेंड की वजह से 5 झीलें आपदा के लिहाज बेहद संवेदनशील होती जा रही है।

नेपाल में मची बाढ़ की तबाही ने 538 से अधिक जिंदगियां लील ली हैं। 1500 लोग अब भी लापता हैं, इनमें 290 भारतीय नागरिक हैं। जिनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है। विदेश मंत्रालय के अनुसार कैलाश मानसरोवर यात्रा पर पहुंचे करीब 200 लोग तिब्बत में फंसे हुए हैं लेकिन वे सुरक्षित हैं। इस भीषण जलप्रलय ने देश की ग्लेशियर झीलों को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है। इनमें से हिमालयी क्षेत्र पर 5 झीलें आपदा के लिहाज से बड़ा खतरा बनती जा रही हैं। इन्हें अति संवेदनशील श्रेणी में रखा गया है।

देश की संवेदनशील झीलों की लिस्ट में उत्तराखंड की 13 झील शामिल हैं। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण-एनडीएमए ने वर्ष 2024 में देश भर में करीब 200 ग्लेशियर झीलों की सूची जारी थी। ये वो झीले हैं जिन्हें संवेदनशील और अति संवेदनशील श्रेणी का माना गया है।

कहां हैं ये 5 ग्लेशियर झीलें
अतिसंवेदनशील श्रेणी में शामिल पांच झीलें उत्तराखंड में हैं। इनमें से चार झील नेपाल सीमा से सटे पिथौरागढ़ जिले में है। जबकि एक वसुधारा ग्लेशियर झील चमोली में हैं। उत्तराखंड के सचिव-आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनेाद कुमार सुमन ने बताया कि राज्य की सभी ग्लेशियर झीलों की नियमित रूप से निगरानी की जा रही है। फिलहाल चिंता जैसी स्थिति नहीं है। प्राथमिक सर्वेक्षण के आधार पर झीलों की निगरानी और वहां सुरक्षा के उपायों को मजबूत किया जाएगा।

मौसम के बदलते ट्रेंड से खतरनाक हो रहीं झीलें
विशेषज्ञों के अनुसार मौसम के बदलते ट्रेंड की वजह से देश भर में ग्लेशियर झील आपदा के लिहाज संवेदनशील होती जा रही है। भूस्खलन अथवा हिमस्खलन की वजह से इन झीलों के फटने का खतरा बढ़ जाता है। जो कि बाढ़ के रूप में सामने आता है। केंद्र सरकार ने इसे गंभीरता से लेते हुए राज्यों को ग्लेशियर झीलों की भी विशेष निगरानी करने को कहा है। ताकि भविष्य में सुरक्षा के मजबूत उपाय किए जा सकें।

तीन झीलों का प्राथमिक सर्वेक्षण पूरा
दो साल में राज्य की संवेदनशील झीलों में से तीन का प्राथमिक वैज्ञानिक सर्वेक्षण पूरा हो पाया है। गुरुवार को आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास सचिव विनेाद कुमार सुमन ने हिन्दुस्तान से बातचीत में कहा कि प्रथम चरण में चमोली की वसुधारा ग्लेशियर झील का सर्वेक्षण किया गया था। उसके बाद पिथौरागढ़ की दो ग्लेशियर झीलों भी सर्वे कर लिया गया है। बाकी दो झील का मई में सर्वेक्षण किया जाना तय था, लेकिन झीलों के जमे होने की वजह से इसे टालना पड़ा है। कोशिश की जा रही है बर्फ पिघलने पर सितंबर में इनका सर्वेक्षण भी करा लिया जाए।

कंट्रोल रूम स्थापित
विदेश मंत्रालय में 24 घंटे संचालित एक नियंत्रण कक्ष स्थापित किया गया है। इससे प्रभावित लोगों के परिजनों को सूचनाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। नियंत्रण कक्ष का नंबर -01123088718 तथा 23089719 है। जबकि वाट्स ऐप मोबाइल नंबर 9968291988 है।

नेपाल बोला, बचाव दल की जरूरत नहीं
नेपाल में आई बाढ़ के बाद भारत सहित कई देशों ने आपदा से निपटने के लिए राहत और बचाव दल भेजने की पेशकश की थी। इस पर नेपाल सरकार ने कहा कि उसे बचाव दल की जरूरत नहीं है हम इससे निपटेन में सक्षम है। अधिकारियों का कहना है कि पुनर्निर्माण के चरण में अतिरिक्त आर्थिक सहायता और दूसरी तरह की मदद मांगी जाएगी।

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