उत्तराखंड में हिमनद झीलों का वैज्ञानिक अध्ययन शुरू, नेपाल आपदा के बाद दो तालों पर विशेष फोकस…….
देहरादून: नेपाल में आई आपदा के बाद उत्तराखंड में भी हिमनद झीलों को लेकर सरकार सतर्क हो गई है। इसी कड़ी में अब जोखिम की श्रेणी में शामिल चमोली जिले की सरस्वती ताल और उत्तरकाशी के केदार ताल झीलों का वैज्ञानिक अध्ययन कराया जा रहा है।
इसके लिए शासन ने छह संस्थानों के विशेषज्ञों की 15 सदस्यीय टीम घोषित कर दी है। यह टीम आठ सितंबर को सरस्वती ताल के लिए रवाना होगी। वहां का अध्ययन करने के बाद केदार ताल जाएगी। वैज्ञानिक अध्ययन में इन झीलों की वर्तमान स्थिति, फटने पर ये कितनी खतरनाक हाे सकती हैं, ऐसे तमाम बिंदुओं पर तस्वीर साफ होगी। आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन के अनुसार विशेषज्ञों की टीम यह भी सुझाएगी कि सुरक्षा की दृष्टि से वहां क्या-क्या उपाय किए जा सकते हैं।
अध्ययन टीम में शामिल विशेषज्ञ
अध्ययन टीम में डा. विशाल व दीपक भट्ट (यूएलएमएमसी, देहरादून), शेख नवाज अली, शुभजीत घोष व प्रकाश रंजन जेना (बीएसआइपी, लखनऊ), डा.पिंकी बिष्ट, स्वप्निल बिष्ट व शिव्यांक सिंह नेगी (डब्लूआइएचजी, देहरादून), डा.शिवानंद महेंद्रा, डा.लकुश के.पटेल व शिव शंकर यादव (एनआइएच, रुड़की), नरेश खेतवाल व संदीप सिंह (एसडीआरएफ) को शामिल किया गया है, जबकि केंद्रीय जल आयोग जल्द ही अपना प्रतिनिधि नामित करेगा।
13 झीलें ज्यादा खतरनाक
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने राज्य में 13 हिमनद झीलों को अधिक जोखिमपूर्ण श्रेणी में रखा है। इनमें पिथौरागढ़ की छह, चमोली, की चार और बागेश्वर, टिहरी व उत्तरकाशी की एक-एक झील शामिल हैं।
इन झीलों का हो चुका सर्वे
राज्य स्तर पर अब तक चार ग्लोफ (ग्लेशियल लेक आउटब्रर्स्ट फ्लड) संभावित झीलों का सर्वेक्षण किया जा चुका है। इनमें चमोली की वसुधारा ताल, पिथौरागढ़ की मबांग, स्यांतियांकी और प्युनग्रू शामिल हैं। वसुधारा में बाथीमेट्री और ग्लेशियोलाजी अध्ययन किया गया, जबकि पिथोरागढ़ की तीनों झीलों का ग्लेशियोलाजी अध्ययन के साथ ही विशेष वैज्ञानिक सर्वेक्षण भी कराया जा चुका है।
राज्य में हिमनद झीलें
जिला, संख्या
चमोली, 192
उत्तरकाशी, 83
पिथौरागढ़, 40
रुद्रप्रयाग, 11
टिहरी, 10
बागेश्वर, 08

