उत्तराखंड के इस जिले में फिर डोली धरती, 3.7 तीव्रता के झटके……….

पिथौरागढ़: उत्तराखंड में रविवार दोपहर एक बार फिर भूकंप के झटके महसूस किए गए। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) के अनुसार, पिथौरागढ़ जिले में रिक्टर पैमाने पर 3.7 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। भूकंप दोपहर 12 बजकर 51 मिनट 44 सेकंड पर आया। इसका केंद्र पिथौरागढ़ जिले के मूनाकोट क्षेत्र में जमीन से करीब 11 किलोमीटर की गहराई में स्थित था। भूकंप के झटके महसूस होने के बाद लोगों में हलचल रही। हालांकि, शुरुआती जानकारी के अनुसार, भूकंप से किसी तरह के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं मिली है।

मूनाकोट क्षेत्र में दर्ज हुआ भूकंप का केंद्र
राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, रविवार दोपहर आए भूकंप की तीव्रता 3.7 मापी गई। इसका केंद्र पिथौरागढ़ जिले के मूनाकोट क्षेत्र में दर्ज किया गया। भूकंप की गहराई करीब 11 किलोमीटर होने के कारण क्षेत्र में झटके महसूस किए गए। भूकंप के बाद किसी बड़े नुकसान की तत्काल सूचना सामने नहीं आई। आपदा प्रबंधन से जुड़ी एजेंसियां स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील है उत्तराखंड
उत्तराखंड भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील हिमालयी राज्य है। यहां की भौगोलिक परिस्थितियों और सक्रिय भूगर्भीय संरचनाओं के कारण समय-समय पर भूकंपीय गतिविधियां दर्ज की जाती हैं। ऐसे में भूकंपरोधी निर्माण और भवनों की संरचनात्मक सुरक्षा महत्वपूर्ण मानी जाती है।

भूकंपीय क्षेत्रों के निर्धारण और भवन निर्माण के मानकों को लेकर भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) की ओर से जारी मानकों का विशेष महत्व है। भूकंपरोधी डिजाइन के प्रावधानों के अनुरूप निर्माण से भूकंप के दौरान भवनों को होने वाले नुकसान और जनहानि के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।

हिमालयी क्षेत्र में भूकंपीय गतिविधियां चिंता का विषय
हिमालयी क्षेत्र भूगर्भीय दृष्टि से सक्रिय माना जाता है। भारतीय और यूरेशियाई टेक्टोनिक प्लेटों के बीच लगातार होने वाली हलचल के कारण इस क्षेत्र में भूकंप आने की संभावना बनी रहती है। उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में भूकंप के जोखिम को देखते हुए भवन निर्माण में निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन और आपदा प्रबंधन की तैयारियां महत्वपूर्ण हैं।

पिथौरागढ़ में दर्ज भूकंप के बाद फिलहाल किसी बड़े नुकसान की जानकारी नहीं है। हालांकि, भूकंप जैसी प्राकृतिक घटनाओं के मद्देनजर स्थानीय स्तर पर सतर्कता और सुरक्षित निर्माण व्यवस्था की आवश्यकता बनी रहती है।

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