उत्तराखंड के हरिद्वार में सती घाट से बैरागी कैंप की राह होगी आसान, 1.59 करोड़ से बनेगा पैदल पुल…………
हरिद्वार: अर्धकुंभ की तैयारियों के बीच सती घाट और बैरागी कैंप के बीच आवागमन आसान बनाने की दिशा में एक और अहम कदम उठाया गया है। लोक निर्माण विभाग मायापुर एस्केप चैनल पर 48 मीटर लंबे स्टील के पैदल पुल का निर्माण कराएगा। इस पुल पर करीब 1.59 करोड़ रुपये खर्च होंगे। पुल का निर्माण चार महीने में पूरा करने का लक्ष्य है।
नया पुल सती घाट को बैरागी कैंप से जोड़ेगा। इससे दोनों क्षेत्रों के बीच पैदल आने-जाने वाले श्रद्धालुओं को मायापुर एस्केप चैनल के ऊपर सुरक्षित रास्ता मिलेगा। पुल की चौड़ाई 4.2 मीटर होगी। दोनों तरफ रेलिंग की व्यवस्था भी की जाएगी। सती घाट और बैरागी कैंप हरिद्वार के महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं। बैरागी कैंप में बड़े आयोजनों के दौरान श्रद्धालुओं और साधु-संतों की आवाजाही बढ़ जाती है।
ऐसे में इस पुल का निर्माण महत्वपूर्ण होगा। अर्धकुंभ जैसे बड़े आयोजन में अलग-अलग क्षेत्रों से आने वाली भीड़ को एक ही रास्ते पर निर्भर रखने के बजाय अलग पैदल मार्ग उपलब्ध कराना भीड़ नियंत्रण की दृष्टि से महत्वपूर्ण होगा। यह सुविधा भविष्य में बड़े स्नान पर्वों और धार्मिक आयोजनों के दौरान भी उपयोगी साबित होगी।
मजबूती का रखा जाएगा विशेष ध्यान
पुल को केवल स्टील का ढांचा खड़ा करके तैयार नहीं किया जाएगा, बल्कि इसके दोनों सिरों पर मजबूत आधार भी तैयार किए जाएंगे। निर्माण में नींव के पीछे पत्थरों की भराई, जल निकासी के लिए वीप होल, एप्रोच स्लैब और इंटरलाकिंग कंक्रीट ब्लाक का काम भी प्रस्तावित है। इससे पुल तक पहुंचने वाला रास्ता भी व्यवस्थित रहेगा। डिजाइन में पुल की सुरक्षा और मजबूती पर भी खास ध्यान दिया गया है।
60 मीटर स्टील गर्डर पुल भी हो रहा तैयार
इससे पहले मार्च में मायापुर एस्केप चैनल पर एक अलग 60 मीटर लंबा डबल लेन स्टील गर्डर पुल भी स्वीकृत किया गया था। वह पुल मौजूदा पुल के डाउनस्ट्रीम में दक्षद्वीप और बैरागी कैंप को जोड़ने और दक्षद्वीप क्षेत्र में विकसित हो रही पार्किंग को बैरागी कैंप से जोड़ने के लिए बनाया जा रहा है। इस तरह मायापुर एस्केप चैनल के आसपास अर्धकुंभ से पहले पैदल और वाहनों के आवागमन के लिए अलग-अलग कनेक्टिविटी विकसित करने की योजना है। इससे मेले के दौरान भीड़ को अलग-अलग दिशाओं में बांटने और संवेदनशील स्थानों पर दबाव कम करने में मदद मिलेगी।
निर्माण के दौरान निर्धारित नियमों करना होगा पालन।
पुल के निर्माण के दौरान नदी या चैनल में मलबा और प्रदूषक जाने से रोकने की शर्त भी रखी गई है। निर्माण सामग्री अथवा मलबे को जलधारा में जाने से रोकना होगा। साथ ही वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए निर्धारित नियमों का पालन करना होगा।
निर्माण नवीनतम भारतीय मानकों, लोक निर्माण विभाग के नियमों और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के तकनीकी मानकों के अनुरूप किया जाएगा। अर्धकुंभ के मद्देनजर इसमें चरणबद्ध तरीके से पहले महीने तक 15 प्रतिशत, ढाई महीने तक 55 प्रतिशत और चार महीने में 100 प्रतिशत काम पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

