उत्तराखंड में खुल सकता है अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का रास्ता, हब एंड स्पोक मॉडल को लागू कर बनेगी राह आसान……….
देहरादून: उत्तराखंड से विदेश जाने वाले हवाई यात्रियों के लिए आने वाले समय में सफर और आसान हो सकता है। यदि देहरादून एयरपोर्ट पर आवश्यक सुविधाएं विकसित कर हब एंड स्पोक मॉडल लागू किया जाता है, तो मौजूदा रनवे के साथ भी यात्रियों को अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की कनेक्टिविटी का लाभ मिल सकता है।
देहरादून एयरपोर्ट पर जरूरी सुविधाएं जुटाकर हब एंड स्पोक मॉडल को लागू कर हवाई पैसेंजरों को अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की सुविधा का लाभ मिल सकता है। इस मॉडल के लागू होने के बाद दून एयरपोर्ट को दिल्ली जैसे बड़े केंद्रीय हवाई अड्डे से जोड़ा जा सकता है। जिससे हवाई यात्रियों को केंद्रीय एयरपोर्ट तक पहुंचने के बाद अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का लाभ मिल सकता है।
देहरादून एयरपोर्ट को अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट बनाने के प्रयास लंबे समय से किए जा रहे हैं। जिसके लिए भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया भी काफी पहले शुरू की जा चुकी है लेकिन सरकार और एयरपोर्ट प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती रनवे विस्तार की है, जिसके लिए थानो वन रेंज की जमीन की आवश्यकता है।
इसका प्रस्ताव भारत सरकार के पास लंबित है। दून एयरपोर्ट पर मौजूदा रनवे की लंबाई करीब 2140 मीटर है। जबकि बड़ी या अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए रनवे की लंबाई करीब तीन हजार मीटर होना जरूरी है। लेकिन यदि दून एयरपोर्ट को हब एंड स्पोक मॉडल की तर्ज पर विकसित किया जाए तो कम समय में दून एयरपोर्ट केंद्रीय एयरपोर्ट से जुड़कर मौजूदा रनवे के साथ ही हवाई यात्रियों को अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का लाभ दे सकता है।
जानकारों की माने तो देहरादून एयरपोर्ट पर इमिग्रेशन, कस्टम आदि की सुविधाएं मुहैया करवाकर हवाई पैसेंजरों को अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का लाभ दिया जा सकता है। इसमें सरकार या एएआई बिना अधिक खर्च किए दून एयरपोर्ट पर पैसेंजरों को हब एंड स्पोक मॉडल अपनाकर पैसेंजरों को लाभ दे सकती है। जबकि रनवे विस्तार और जरूरी संसाधन जुटाने के बाद एयरपोर्ट को अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट बनाने का विकल्प तब भी मौजूद रहेगा। चारधाम, हरिद्वार, ऋषिकेश, मसूरी, राजधानी और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के कारण लंबे समय से दून एयरपोर्ट को अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट बनाने की मांग की जा रही है।
क्या है हब एंड स्पोक मॉडल
हब एंड स्पोक मॉडल विमानन कंपनियों की एक नेटवर्क व्यवस्था है, जो एक पहिए की तरह काम करती है। जिसमें छोटे एयरपोर्ट को किसी केंद्रीय एयरपोर्ट जैसे दिल्ली से जोड़ा जाता है। इस मॉडल के तहत छोटे शहरों से पैसेंजर केंद्रीय हब जैसे दिल्ली एयरपोर्ट तक पहुंचते हैं। फिर वहां से अंतरराष्ट्रीय उड़ान भरते हैं। इसमें यात्रियों को बार-बार चेक इन, इमिग्रेशन या कस्टम क्लीयरेंस से नहीं गुजरना पड़ता है। यह छोटे एयरपोर्ट पर पहले ही कर लिया जाता है। पैसेंजरों के सामान आदि को संबंधित कंपनी द्वारा खुद ही अंतरराष्ट्रीय उड़ान में शिफ्ट कर दिया जाता है। देश में पहली बार 25 जून से वाराणसी एयरपोर्ट से इस मॉडल की शुरुआत की जा चुकी है।
युकाड़ा में उनके पदभार ग्रहण करने से पहले इस तरह का एक प्रस्ताव भारत सरकार को भेजा गया था। इस पर क्या कार्रवाई हुई है। ये जानकारी लेने के बाद ही बताया जा सकता है। :प्रतीक जैन, यूकाडा सीईओ

