उत्तराखंड में जीबी पंत यूनिवर्सिटी के कुलसचिवऔर पूर्व निदेशक सहित चार लोगों के खिलाफ समन जारी। लटकी गिरफ्तारी की तलवार……….

पंतनगर: उत्तराखंड के प्रतिष्ठित जीबी पंत अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (GBPEC), घुड़दौड़ी में वर्ष 2019 की भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के मामले में बड़ा कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) पौड़ी की अदालत ने संस्थान के कुलसचिव, पूर्व निदेशक और दो अन्य अधिकारियों सहित चार आरोपियों को समन जारी किया है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त को निर्धारित की है।

45 पदों पर भर्ती के बाद शुरू हुआ था विवाद
वर्ष 2019 में जीबी पंत अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संस्थान, घुड़दौड़ी में प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर और कुलसचिव समेत कुल 45 पदों पर नियुक्तियां की गई थीं।

भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद चयन प्रक्रिया पर सवाल उठे। विभागीय जांच में अनियमितताओं के संकेत मिलने पर संस्थान प्रशासन ने स्वयं पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद मामला जांच एजेंसियों तक पहुंचा।

दो एफआईआर के बाद SIT को सौंपी गई जांच
इस प्रकरण में पहला मुकदमा 30 अक्टूबर 2021 को तत्कालीन कुलसचिव डॉ. संजीव नैथानी की शिकायत पर पौड़ी कोतवाली में दर्ज किया गया।

इसके बाद 26 नवंबर 2022 को तत्कालीन निदेशक प्रो. वाई. सिंह ने भी इसी मामले में दूसरी एफआईआर दर्ज कराई।

मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तराखंड शासन ने नवंबर 2021 में एसएसपी पौड़ी की अध्यक्षता में विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया और पूरे मामले की जांच एसआईटी को सौंप दी।

2 हजार से अधिक पन्नों की चार्जशीट अदालत में दाखिल।

लंबी जांच के बाद एसआईटी ने भर्ती प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर 2 हजार से अधिक पन्नों का आरोप पत्र (चार्जशीट) मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, पौड़ी की अदालत में दाखिल किया।

चार्जशीट का परीक्षण करने के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट शहजाद ए. वाहिद ने मामले का संज्ञान लेते हुए चार आरोपियों को अदालत में उपस्थित होने के लिए समन जारी किए हैं।

इन चार लोगों को कोर्ट ने किया तलब।
अदालत ने जिन लोगों को समन जारी किया है, उनमें शामिल हैं—

संदीप कुमार – कुलसचिव
प्रो. एम.पी.एस. चौहान – पूर्व निदेशक
लोकेश कुमार – असिस्टेंट प्रोफेसर, मैकेनिकल विभाग
मनोज पाठक
अदालत ने सभी आरोपियों को निर्धारित तिथि पर उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं।

कानूनी जानकारों के अनुसार, यदि समन जारी होने के बावजूद आरोपी अदालत में उपस्थित नहीं होते या आत्मसमर्पण नहीं करते हैं, तो उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

हाईकोर्ट पहले ही खारिज कर चुका है याचिका
इस मामले में एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि संस्थान के कुलसचिव संदीप कुमार ने भर्ती अनियमितता से जुड़े मुकदमे को निरस्त करने की मांग करते हुए उत्तराखंड हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।

हालांकि, अक्टूबर 2025 में हाईकोर्ट ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया था। इसके बाद अब मामले की सुनवाई निचली अदालत में आगे बढ़ रही है।

3 अगस्त को होगी अगली सुनवाई
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने इस मामले में 3 अगस्त की तिथि निर्धारित की है। इस दिन आरोपियों की उपस्थिति और आगे की न्यायिक प्रक्रिया पर फैसला होगा।

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