उत्तराखंड में अगले तीन महीने बंद रहेगा ऋषिकेश का रामझूला, मुनिकीरेती-स्वर्गाश्रम के बीच पसरा सन्नाटा, पर्यटक निराश……..

ऋषिकेश: मुनिकीरेती और स्वर्गाश्रम को जोड़ने वाले प्रसिद्ध रामझूला पर 25 जुलाई से आवाजाही पूरी तरह बंद कर दी गई है। मरम्मत कार्य के चलते पुल बंद होते ही पूरे क्षेत्र में सन्नाटा पसर गया है। सुबह से शाम तक चहल-पहल से गुलजार रहने वाली ये जगह अब वीरान दिख रही है।

लोक निर्माण विभाग, नरेंद्रनगर के अनुसार रामझूला का करीब 10 करोड़ रुपये की लागत से मरम्मतीकरण चल रहा है। इसी कारण सुरक्षा के मद्देनजर पुल को कांवड़ मेला शुरू होने से पहले पूरी तरह बंद करना पड़ा।

मार्च 2026 से शुरू था मरम्मत का काम
रामझूला का निर्माण 1980 के दशक में हुआ था। पहले यहां पैदल यात्रियों के साथ दोपहिया वाहन भी चलते थे। लेकिन 2022-23 में शासन-प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से दोपहिया वाहनों पर रोक लगा दी थी। इसके बाद से पुल पर सिर्फ पैदल आवाजाही ही हो रही थी। मरम्मत का काम मार्च 2026 से शुरू था, जिसे अब अंतिम चरण में ले जाकर पुल को पूरी तरह बंद कर दिया गया है।

रामझूला बंद होते ही मुनिकीरेती क्षेत्र के दर्जनों दुकानदारों, चाय-नाश्ते, पूजा सामग्री और स्मृति चिन्ह बेचने वाले व्यापारियों की कमर टूट गई है।

फिलहाल श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को लक्ष्मणझूला बजरंग सेतु और जानकीसेतु से आना-जाना पड़ रहा है, जिससे समय भी ज्यादा लग रहा है और बुजुर्ग यात्रियों को परेशानी हो रही है। लोनिवि के सहायक अभियंता सत्य प्रकाश राठौर ने बताया कि काम पूरा होने के बाद नवंबर 2026 से पुल पर फिर से आवाजाही शुरू हो सकेगी।

क्या कहते हैं व्यापारी ?
शासन प्रशासन को रामझूला पुल पर आवाजाही पूरी तरह प्रतिबंध नहीं करना चाहिए था। अब करीब चार महीने तक उन लोगों का व्यवसाय अब पूरी तरह प्रभावित रहेगा। कांवड़ मेला समाप्त होते ही पुल पर पैदल आवाजाही दोबारा शुरू होनी चाहिए। – सतीश अग्रवाल, जेम्स व्यापारी

कांवड़ मेले का समय ही उनके साल भर की कमाई का जरिया होता है, लेकिन ठीक उसी समय पुल बंद होने से उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। – अंकुर जैन, लघु व्यवसायी

रामझूला बंद होने से मुनिकीरेती क्षेत्र में सन्नाटा पसर गया। पर्यटकों की आवाजाही नहीं होने से उन्होंने अपनी दुकान बंद कर दी है। जब तक पुल का काम पूरा नहीं होगा, उनका रोजगार अब ऐसा ही रहेगा, तब तक के लिए हम लोगों को दूसरी जगह ठौर ठिकाना ढूंढ़ना पड़ेगा। – विनोद रस्तोगी, लघु व्यवसायी

रामझूला ही हमारी रीढ़ है। रोज हजारों श्रद्धालु और पर्यटक इसी रास्ते स्वर्गाश्रम जाते थे। अब ग्राहक ही नहीं आ रहे। सुबह से शाम तक दुकान खाली पड़ी है। :भगवान दास श्रीवास्तव, लघु व्यवसायी

By admin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *