उत्तराखंड में हाईकोर्ट ने गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति की नियुक्ति को किया बरकरार, याचिका खारिज……..

नैनीताल: उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय, श्रीनगर के कुलपति की नियुक्ति को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर अहम फैसला सुनाया है।

अदालत ने सुनवाई के बाद कुलपति की नियुक्ति को वैध ठहराते हुए याचिका को खारिज कर दिया।

कुलपति नियुक्ति को दी गई थी चुनौती
यह मामला हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय (केंद्रीय विश्वविद्यालय) के कुलपति की नियुक्ति से जुड़ा हुआ था।

याचिकाकर्ता प्रो. नवीन प्रकाश नौटियाल ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल कर आरोप लगाया था कि यह नियुक्ति केंद्रीय विश्वविद्यालय अधिनियम 2009 और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के 2018 के विनियमों का उल्लंघन करते हुए की गई है।

याचिका में कहा गया था कि कुलपति के रूप में प्रो. श्री प्रकाश सिंह की नियुक्ति निर्धारित पात्रता मानकों और विज्ञापन की शर्तों के अनुरूप नहीं है।

इसके साथ ही आरोप लगाया गया कि यह नियुक्ति मनमानी और अवैध है, जिससे मेरिट-आधारित चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता प्रभावित होती है।

याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि इस तरह की नियुक्ति संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 (समानता के अधिकार) का उल्लंघन करती है और शैक्षणिक संस्थानों में निष्पक्षता पर सवाल खड़े करती है।

हाईकोर्ट ने क्या कहा
मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि कुलपति की नियुक्ति UGC और केंद्रीय विश्वविद्यालय के नियमों के अनुरूप की गई है।

अदालत ने पाया कि नियुक्ति प्रक्रिया में कोई ऐसी अनियमितता नहीं है, जो इसे अवैध ठहराए। इसी आधार पर अदालत ने जनहित याचिका को खारिज कर दिया।

इस फैसले के बाद कुलपति की नियुक्ति पर उठे विवाद खत्म हो गए हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन को स्थिरता मिलने की उम्मीद है।साथ ही भविष्य में नियुक्ति प्रक्रियाओं को लेकर स्पष्टता बढ़ेगी।

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