उत्तराखंड की राजधानी की सड़कों पर आधी हो गई सिटी बसें, सार्वजनिक वाहनों के नाम पर दौड़ रहे विक्रम-ऑटो…….

देहरादून: राजधानी में पिछले कुछ सालों में करीब 170 सिटी बसें सड़कों से गायब हो चुकी हैं. साल 2015 तक शहर के 10 मुख्य रूटों पर 319 सिटी बसें दौड़ती थीं. पीएम मोदी ने हाल ही में सार्वजनिक वाहनों का उपयोग करने की अपील की है. लोगों को अब इन बसों की याद आ रही है. लोकल 18 से देहरादून के रहने वाले मोहन खत्री कहते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी ने अच्छी अपील की है. भविष्य में पेट्रोल-डीजल के संकट से हमें जूझना न पड़े इसके लिए ये जरूरी है.

पीएम मोदी ने हाल ही में सार्वजनिक वाहनों का उपयोग करने की अपील की है, लेकिन इसे साकार करने के लिए राजधानी देहरादून में सार्वजनिक परिवहन की स्थिति इसके विपरीत है. देहरादून में पिछले कुछ सालों में करीब 170 सिटी बसें सड़कों से गायब हो चुकी हैं. साल 2015 तक शहर के 10 मुख्य रूटों पर 319 सिटी बसें दौड़ती थीं। 2020 तक यह संख्या घटकर 270 हुई और कोरोनाकाल के बाद अब सिर्फ 150 बसें ही सड़कों पर बची हैं. नालापानी-सीमाद्वार, रायपुर-प्रेमनगर, पुरकुल-मोथरोवाला, डाट मंदिर-एमडीडीए कॉलोनी और जैसे रूटों पर कभी दिनभर बसें दौड़ती थीं, जो आज यहां आधी से कम हो गई है. दूसरी ओर देहरादून की आबादी बढ़ती जा रही है।

प्रधानमंत्री की तारीफ
लोकल 18 से देहरादून के स्थानीय निवासी मोहन खत्री कहते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी जनता से अच्छी अपील कर रहे हैं. भविष्य में पेट्रोल डीजल के संकट से हमें जूझना न पड़े इसलिए पहले से ही खर्चे पर नियंत्रण जरूरी है. पीएम मोदी ने अपने काफिले की गाड़ियों को कम कर दिया है, यह एक अच्छा उदाहरण है. अब राज्य के जितने भी मंत्री हैं और जो सचिव हैं, उन पर भी यह नियम लागू किया जाए। एक-एक सचिव के पास 3 से 4 गाड़ियां होती हैं, उन पर लगाम लगाया जाए. साल 2005 में कोई भी स्कॉट मंत्री को नहीं मिलती थी।

इन चार पर निर्भर।
मोहन खत्री कहते हैं कि साल 2015 से अब तक 320 सिटी बसों में से 150 ही बची हैं। सार्वजनिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए देहरादून में नियो मेट्रो शुरू करने की बात की जा रही थी, जो धरातल पर नजर नहीं आई। सिटी बसें कम हैं. इलैक्ट्रिक बसों के प्रस्ताव पड़े हैं. सार्वजनिक वाहनों की संख्या बढ़ाई जाएगी तभी पब्लिक इनका उपयोग कर पाएगी। देहरादून में सार्वजनिक वाहनों के नाम पर मैजिक, विक्रम, ई-रिक्शा और ऑटो पर ही लोगों को निर्भर रहना पड़ता है. कई मार्गों पर बसों के बंद होने से यात्री ऑटो का महंगा सफर करने को मजबूर हैं।

इलेक्ट्रिक बसों का इंतजार।
देहरादून में पंजीकृत 784 विक्रम और लगभग 500 से ज्यादा मैजिक चल रही हैं. पीएमई बस योजना के अंतर्गत देहरादून को 100 इलेक्ट्रिक बसें मिलनी थी, जिसका एक साल से इंतजार हो रहा है. मौजूदा समय में देहरादून में 10 लाख से ज्यादा प्राइवेट गाड़ियां सड़कों पर दौड़ रही है. यहां लगभग 70 हजार से ज्यादा निजी वाहनों में वृद्धि हुई है।

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