उत्तराखंड में नैनीताल हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, बैंक मैनेजर की बर्खास्तगी का आदेश रद्द, सजा पर होगा दोबारा विचार…….

​नैनीताल: उधम सिंह नगर जिले में चक्की मोड़ स्थित उत्तराखंड ग्रामीण बैंक के तत्कालीन शाखा प्रबंधक जुहेब अहमद की बर्खास्तगी के आदेश को हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया है. न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की खंडपीठ ने रिट याचिका को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए यह फैसला सुनाया. वहीं, डॉक्टर मोनिका जोशी खर्कवाल की स्थानांतरण याचिका पर भी सुनवाई हुई.

याचिकाकर्ता को साल 2017 में उधम सिंह नगर की चक्की मोड़ शाखा में निरीक्षण के दौरान सरकारी योजनाओं के तहत दिए गए ऋणों के रिकॉर्ड में कथित अनियमितताओं और दस्तावेज उपलब्ध न होने के चलते 31 दिसंबर 2019 को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था, जिसकी पुष्टि अपीलीय प्राधिकारी ने भी की थी. कोर्ट ने विभागीय जांच की रिपोर्ट को तो बरकरार रखा, लेकिन बर्खास्तगी की इस कठोर सजा को अत्यधिक और चौंकाने वाला माना।

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि लोन रिकॉर्ड के रख-रखाव में लापरवाही की बात साबित हुई है, लेकिन बैंक को इस कारण कोई वित्तीय हानि नहीं हुई है. इसके अलावा याचिकाकर्ता ने बाद में वे दस्तावेज पेश कर दिए थे और उनके खिलाफ किसी भी प्रकार के गबन या व्यक्तिगत आर्थिक लाभ का आरोप नहीं था. ऐसे में सेवा से बर्खास्तगी की चरम सजा देना न्यायसंगत नहीं है।

न्यायालय ने मामले को वापस अनुशासनात्मक प्राधिकारी को भेजते हुए निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ता की सेवा अवधि, पिछले अच्छे रिकॉर्ड और वित्तीय नुकसान न होने जैसी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सेवा से बर्खास्तगी के अलावा कोई अन्य उचित और आनुपातिक सजा तय की जाए और 8 हफ्ते के भीतर एक नया तर्कसंगत आदेश पारित किया जाए।

हल्द्वानी की मेडिकल ऑफिसर मोनिका जोशी खर्कवाल की स्थानांतरण याचिका पर सुनवाई:नैनीताल हाईकोर्ट ने हल्द्वानी उप जिला अस्पताल में संयुक्त निदेशक ग्रेड पर तैनात मेडिकल ऑफिसर डॉ. मोनिका जोशी खर्कवाल की स्थानांतरण याचिका पर सुनवाई करते हुए तबादला आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है. न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि स्थानांतरण सेवा की एक अनिवार्यता है।

याचिकाकर्ता पिछले 8 सालों से लगातार हल्द्वानी में सेवा दे रही थीं, जिसके चलते उनका तबादला अवैध नहीं माना जा सकता. कोर्ट ने ये भी संज्ञान में लिया कि डॉ. मोनिका का तबादला नैनीताल शहर में किया गया है और उनके पति (जो कि बाल रोग विशेषज्ञ हैं) का तबादला भी ‘स्पौस पॉलिसी’ के तहत नैनीताल के बीडी पांडे जिला अस्पताल में किया गया है।

24 घंटे के भीतर ईमेल के माध्यम से संबंधित सचिव को प्रत्यावेदन भेजने का मौका:​हालांकि, न्यायालय ने याचिकाकर्ता को राहत देते हुए रिट याचिका को इस शर्त के साथ निस्तारित किया है कि वे 24 घंटे के भीतर ईमेल के माध्यम से संबंधित सचिव को अपना प्रत्यावेदन भेज सकती हैं, जिस पर एक हफ्ते के भीतर कानूनन निर्णय लिया जाएगा।

इसके साथ ही कोर्ट ने आदेश दिया है कि आगामी 10 दिनों तक याचिकाकर्ता की पोस्टिंग के संबंध में यथास्थिति बहाल रहेगी, लेकिन यदि याचिकाकर्ता निर्धारित 24 घंटे के भीतर अपना प्रत्यावेदन देने में विफल रहती हैं, तो वे इस आदेश के तहत मिलने वाले किसी भी संरक्षण या राहत की हकदार नहीं होंगी।

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