उत्तराखंड में केदारनाथ के पीछे लगातार आ रहें एवलॉन्च, आपदा प्रबंधन विभाग ने बनाई समिति…..

देहरादून: केदारनाथ के पीछे लगातार आ रहे हैं एवलॉन्च जिसको देखते हुए आपदा प्रबंधन विभाग ने कमेटी का गठन कर दिया है जिनके द्वारा संभावित खतरे को लेकर अलर्ट रहा जा सकें।

जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग के पत्र संख्या – 305 / डी०डी०एम०ए०-विविध / 2022-23 दिनांक 23 सितम्बर, 2022 द्वारा सूचित किया गया कि दिनांक 22 सितम्बर, 2022 को सांय 4:30 बजे केदारनाथ मन्दिर से लगभग 03 से 04 किमी० पीछे पहाड़ी से आंशिक रूप से हिमस्खलन हुआ एवं पुनः अपर जिलाधिकारी, रूद्रप्रयाग के पत्र संख्या-317 / डी०डी०एम०ए० – विविध /2022-23 दिनांक 01 अक्टूबर, 2022 द्वारा सूचित किया गया है कि दिनांक 01 अक्टूबर, 2022 की प्रातः लगभग 5:30 से 6:00 के मध्य श्री केदारनाथ मंदिर से लगभग 6 से 7 किमी0 पीछे अचानक आंशिक हिमस्खलन हुआ है। यद्यपि यह अवगत कराया गया है कि उपरोक्तानुसार वर्णित आंशिक हिमस्खलन से किसी भी प्रकार की जान-माल की क्षति नहीं हुयी है तथा श्री केदारनाथ धाम के निकट बह रही मंदाकिनी एवं सरस्वती नदी के जल स्तर में भी कोई वृद्धि नहीं होना बताया गया है, तथापि आंशिक हिमस्खलन की घटना की पुनरावत्ति को दृष्टिगत रखते हुये एवं किसी भी प्रकार की संभावित खतरे के दृष्टिगत आपदा प्रबन्धन अधिनियम-2005 की सुसंगत धाराओं के अन्तर्गत उक्त क्षेत्र का सर्वेक्षण / स्थलीय अध्ययन किये जाने हेतु निम्नानुसार समिति का गठन किया जाता है:-

1. उप महानिदेशक, भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग, देहरादून द्वारा नामित प्रतिनिधि / विशेषज्ञ

सदस्य

2. निदेशक, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, रूड़की द्वारा नामित

सदस्य

3. प्रतिनिधि / निदेशक, वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान, देहरादून द्वारा नामित प्रतिनिधि / विशेषज्ञ ।

सदस्य

4. निदेशक, भारतीय सुदूर संवेदन संस्थान, देहरादून द्वारा नामित प्रतिनिधि / विशेषज्ञ ।

सदस्य

5. अधिशासी निदेशक, उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ।

सदस्य / सचिव

उपरोक्त परिप्रेक्ष्य में शासन के निर्देशानुसार उपरोक्त गठित समिति उक्त स्थल का सर्वेक्षण / स्थलीय अध्ययन का कार्य तात्कालिक प्रभाव से प्रारम्भ करेगी एवं अपनी आख्या प्राथमिकता के साथ शासन / उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को उपलब्ध कराना सुनिश्चित करेगी।

2- उक्त कार्यों पर होने वाले समस्त व्यय का वहन वास्तविक व्यय / मूल बिल बॉउचर

के आधार पर उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबन्धन प्राधिकरण के द्वारा किया जायेगा।

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