मंत्री सतपाल महाराज ने विकास नगर में किया करोड़ों रु. की कई विकास योजनाओं का शिलान्यास

देहरादून: प्रदेश के सिंचाई मंत्री सतपाल महाराज ने शुक्रवार को विकासनगर विधानसभा क्षेत्र के डाकपत्थर में कई विकास योजनाओं का शिलान्यास किया. इस विकास योजनाओं में लघु सिंचाई उपखंड कार्यालय के भवन का लोकार्पण के साथ कई विकासखण्ड विकास नगर में क्षतिग्रस्त नहरों और गूलों के व कच्ची गूलों को पक्का करने सहित अनेक सिंचाई योजनाओं का शिलान्यास किया गया.

 

विकास नगर स्थित डाकपत्थर में 50.91 लाख की लागत से निर्मित लघु सिंचाई उपखंड कार्यालय भवन के लोकार्पण और करोड़ों रुपये की सिंचाई योजनाओं के शिलान्यास अवसर पर प्रदेश के सिंचाई मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि उन्हें खुशी है कि आज पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती पर सिंचाई एवं लघु सिंचाई की अनेक योजनाओं का लोकार्पण किया जा रहा है.

 

इन योजनाओं का हुआ शिलान्यास-

 

लघु सिंचाई उपखंड कार्यालय डाकपत्थर परिसर में सिंचाई विभाग की 466.87 लाख की योजनाएं का शिलान्यास किया गया है. जिसमें विकासखंड विकास नगर के कटापत्थर, पृथ्वीपुर, जामनखाता, लाखनवाला, तेलपुरा, टी-कट एवं लांघा पसौली नहरों के कुलावें का शिलान्यास किया है.

इसके साथ ही करीब 156.55 लाख की लागत से तेलपुरा नहर के आधुनिकरण और नवीनीकरण की योजना का शिलान्यास किया.

सिंचाई मंत्री सतपाल महाराज ने जनपद देहरादून के सहसपुर विकासखंड में 227.28 लाख की लागत से हरियावाला नहर के पुनरुद्धार की योजना का शिलान्यास किया.

इसके अलावा विकासनगर में 254.62 लाख रुपए की लागत से तेलपुरा नहर सेवा मार्ग के आधुनिकरण नवीनीकरण योजना का शिलान्यास किया है.

विकासनगर में विभिन्न आबादी क्षेत्रों उदियाबाग, करौन्दी नाला और ग्राम जमनीपुर थप्पड़ की जल निकासी व बाढ़ सुरक्षा कार्य की 472.27 लाख रुपए की योजनाओं का शिलान्यास किया.

 

इस मौके पर सिंचाई मंत्री महाराज ने कहा कि लघु सिंचाई विभाग के प्रदेश में जितने भी उपखंड परिसर हैं, उनमें एक्सफोनिक या हाइड्रोफोनिक कृषि तकनीकी के मॉडल प्रदर्शित करने की भी व्यवस्था होनी चाहिए. ऐसा करने से इसका लाभ कृषकों को भी मिल सकेगा.

 

सिंचाई मंत्री ने कहा कि आमतौर पर लोग सिंचाई के लिए पूरे खेत को पानी से भर देते हैं. जिससे काफी पानी बेकार चला जाता है. आज पानी का संरक्षण बहुत जरूरी हो गया है. दुनिया के कई देशों में स्प्रिंकलर सिस्टम, ड्रिप सिस्टम आदि साधनों का प्रयोग हो रहा है. इसलिए यहां के किसानों को भी इस प्रकार की तकनीकी का इस्तेमाल करना चाहिए. वह नई तकनीकी के समर्थक हैं. इसलिए उनका प्रयास होगा कि प्रदेश में बनने वाले डैमों में दक्षिण कोरियाई तकनीकी जो कि रबड़ डैम बनाती है, उसका इस्तेमाल हो.

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