उत्तराखंड में विश्व धरोहर फूलों की घाटी पर्यटकों के लिए खुली, पहले दिन 108 ने किया दीदार……
गोपेश्वर: विश्व धरोहर फूलों की घाटी सोमवार को पर्यटकों के लिए खोल दी गई। सुबह आठ बजे बेस कैंप घांघरिया के पास पूजा-अर्चना के बाद फूलों की घाटी जाने वाले पैदल मार्ग का गेट खोला गया। पहले दिन 108 पर्यटकों ने घाटी मनमोहक संसार की सैर की।
वन क्षेत्राधिकारी फूलों की घाटी चेतना कांडपाल व पुलिस चौकी के प्रभारी उप निरीक्षक अमनदीप सिंह समेत वनकर्मियों, स्थानीय नागरिकों, पर्यटकों की मौजूदगी में घाटी का गेट खोला गया।
इसके बाद भगवान लोकपाल व वन देवताओं का आह्वान कर पर्यटकों को फूलों की घाटी में प्रवेश दिया गया।
वन क्षेत्राधिाकारी चेतना कांडपाल ने बताया कि पहले दिन दोपहर 12 बजे तक 108 पर्यटकों ने फूलों की घाटी जाकर फूलों के इस रंग-विरंगे संसार का दीदार किया। पर्यटकों में 70 पुरुष, 11 महिलाएं, 24 छात्र-छात्राएं व तीन बच्चे शामिल थे।
चमोली जिले में समुद्रतल से 12,995 फीट की ऊंचाई पर 87.5 वर्ग किमी क्षेत्र में फूलों की घाटी एक जून से 31 अक्टूबर तक पर्यटकों के लिए खुली रहती है।
घाटी में जैवविविधता का अनूठा खजाना बिखरा हुआ है। 500 से अधिक प्रजाति के रंग-विरंगे फूलों के साथ दुलर्भ वन्य जीवों का यह क्षेत्र प्राकृतिक आवास है।
यहां पर हिमालयन थार, कस्तूरा मृग, हिम तेंदुआ, काला भालू, भूरा भालू, नीली भेड़ व उड़न गिलहरी समेत अन्य वन्य जीव आसानी से देखे जा सकते हैं।
फूलों की घाटी का आकर्षण कभी कम नहीं होता। यहां हर 15 दिन के अंतराल में अलग-अलग प्रजाति के फूल खिलने से घाटी का रंग बदल जाता है। फूलों की घाटी में सुबह जाकर शाम पांच बजे तक वापस आना जरूरी है।
घाटी में पर्यटकों को रुकने की अनुमति नहीं है। पर्यटकों को भोजन व अन्य जरूरी सामग्री भी अपने साथ ले जानी पड़ती है, क्योंकि घांघरिया से आगे खाद्य सामग्री की कोई दुकान नहीं है। फूलों की घाटी में पांच किमी क्षेत्र तक जाने की अनुमति है।
यहां पर पुष्पावती नदी भी बहती है, जिसका साफ पानी लोगों को मोहित करता है। वन क्षेत्राधिकारी चेतना कांडपाल ने बताया कि घाटी का पैदल रास्ता पूरी तरह सुरक्षित है।
यहां पर वनकर्मी पर्यटकों की मदद के लिए तैनात हैं। घाटी की यात्रा को लेकर पर्यटकों में उत्साह है और लगातार इस संबंध में वन विभाग से जानकारी ले रहे हैं।
ऐसे पहुंचें
फूलों की घाटी में आने के लिए बदरीनाथ हाईवे पर ज्योतिर्मठ से गोविंदघाट-पुलना पहुंचना पड़ता है। यहां से 10 किमी पैदल चलकर फूलों की घाटी के बेस कैंप घांघरिया पहुंचा जाता है और फिर शुरू होता है घाटी के लिए तीन किमी का पैदल सफर।
इससे पूर्व, घांघरिया स्थित पंजीकरण केंद्र में पर्यटकों को निर्धारित शुल्क जमा कराना पड़ता है। घाटी से लौटते हुए पर्यटकों को प्लास्टिक कचरा भी अनिवार्य रूप से वापस लाना पड़ता है। घाटी में किसी भी वनस्पति को तोड़ने की सख्त मनाही है।

