सुनील अरोड़ा होंगे गोवा के नए राज्यपाल, क्या अच्छे चुनाव कराने का इनाम ?

चंद दिनों या यूं कहें चंद घँटों पहले केंद्रीय निर्वाचन आयुक्त पद से रिटायर होकर आराम से सोये भी नहीं थे कि सुनील अरोड़ा को मिलेगा वफादारी का ईनाम मिलने की खबरें आ गई। उन्हें गोवा का नया राज्यपाल बनाया जायेगा। अगर खबरों की माने तो यह देश के संविधान और लोकतंत्र के लिए क्या स्वस्थ परंपरा है ? मेरी जानकारी के मुताबिक कोई भी वरिष्ठ अधिकारी के सेवानिवृत्त होने के कम से कम साल तक किसी पद पर ज्वाइन नहीं कर सकता। लेकिन इनके मामले में इस प्रकार की कोई दखलंदाजी नही दिखाई पड़ती।

इसी परंपरा के तहत भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश गोगोई को उनके सेवानिवृत्त होने के चार महीने बाद ही पिछले साल मार्च में राज्यसभा के सदस्य के रूप में नामित किया गया था। मेरे विचार से जहां वह देश की सर्वोच्च संस्था के सर्वोच्च पद पर रहे, उसके बाद उनका उच्च सदन के कुछ गिने-चुने सदस्यों के बीच में बैठना उनके और उनके पद और गरिमा को सुशोभित नहीं करता।

महामहिम सुनील अरोड़ा जी राजस्थान कैडर के 1980 बैच के आईएएस अफसर हैं। हाल ही में सोमवार को मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) के रूप में सेवानिवृत्त हुए हैं। अरोड़ा 1 सितंबर, 2017 को चुनाव आयोग में शामिल होने से पहले सूचना एवं प्रसारण सचिव रहे हैं। राजस्थान में भाजपा और कांग्रेस दोनों सरकारों में अपनी प्रशासनिक दक्षता का लोहा मनवाने के बाद पीएम मोदी के विश्वसनीय अफसरों में शामिल रहे सुनील अरोड़ा, गोवा का राज्यपाल बनने जा रहे हैं।

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