उत्तराखंड में गैरसैंण के भराड़ीसैंण में धारा 163 लागू, प्रधान संगठन ने किया विधानसभा घेराव का ऐलान………
गैरसैंण:उत्तराखंड में ग्राम पंचायतों के अधिकारों में कटौती और लंबे समय से लंबित मांगों पर सरकार के उदासीन रवैये के खिलाफ प्रदेश के ग्राम प्रधानों ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है. प्रदेश प्रधान संगठन उत्तराखंड ने 27 अक्टूबर को विधानसभा सत्र के दौरान विधानसभा घेराव कार्यक्रम की घोषणा की है. इस आंदोलन में राज्य के सभी जिलों और ब्लॉकों से हजारों की संख्या में ग्राम प्रधान और संगठन के पदाधिकारी शामिल होंगे। वहीं, प्रशासन ने भराड़ीसैंण क्षेत्र में धारा 163 लागू कर दी है।
प्रधान संगठन के गैरसैंण ब्लॉक अध्यक्ष मनोज नेगी ने बताया कि प्रधान संगठन अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर लंबे समय से संघर्ष कर रहा है. इससे पहले देहरादून में किए गए सचिवालय कूच के दौरान सरकार ने मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई का आश्वासन दिया था, लेकिन लंबा समय बीत जाने के बाद भी फाइलें शासन स्तर पर ही विचाराधीन हैं. सरकार की इस कथित लेटलतीफी और टालमटोल की नीति से प्रदेशभर के ग्राम प्रधानों में भारी नाराजगी व्याप्त है।
इस बार आंदोलन का सबसे बड़ा कारण ग्राम पंचायतों के प्रशासनिक और वित्तीय अधिकारों को सीमित करना है. मनोज नेगी ने बताया कि सरकार की ओर से नए पंचायत भवनों के निर्माण, उनके पुनर्निर्माण एवं सुधारीकरण के कार्यों को ग्राम पंचायतों से छीनकर अन्य सरकारी कार्यदायी संस्थाओं को सौंपने का तुगलकी फरमान जारी किया गया है।

आंदोलन को सफल बनाने के लिए संगठन ने बनाई रूपरेखा: प्रधानों का आरोप है कि यह सीधे तौर पर पंचायती राज व्यवस्था को कमजोर करने और लोकतांत्रिक अधिकारों पर कैंची चलाने का प्रयास है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आंदोलन को सफल बनाने के लिए संगठन ने अपनी पूरी रूपरेखा तैयार कर ली है।
27 अक्टूबर को सुबह ठीक 11 बजे प्रदेश के सभी प्रधान, ब्लॉक व जिला अध्यक्ष और प्रांतीय पदाधिकारी गैरसैंण स्थित क्रीड़ा मैदान में एकत्रित होंगे। इस दौरान क्रीड़ा मैदान में एक संक्षिप्त सभा के बाद सभी क्षेत्रों से आए प्रधान एकजुट होकर रैली के रूप में आगे बढ़ेंगे। दोपहर 1 बजे क्रीड़ा मैदान से विधानसभा भराड़ीसैंण की ओर विशाल हुजूम के साथ कूच किया जाएगा।
10 सूत्रीय मांगों पर तत्काल जारी हो शासनादेश: संगठन के शीर्ष नेतृत्व ने चेतावनी दी है कि यदि 27 अक्टूबर के घेराव के बाद भी सरकार ने ग्राम पंचायतों के अधिकारों को बहाल नहीं किया और 10 सूत्रीय मांगों पर तत्काल शासनादेश जारी नहीं किया, तो उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होना पड़ेगा. जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी।
जनविरोधी नीतियों के खिलाफ कांग्रेस का विधानसभा घेराव: वहीं, दूसरी ओर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के आह्वान पर 27 अक्टूबर को ग्रीष्मकालीन राजधानी भराड़ीसैंण (गैरसैंण) में विशाल विधानसभा घेराव कार्यक्रम आयोजित किया गया है. इस प्रदर्शन को लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह है और पूरे राज्य से बड़ी संख्या में कांग्रेसियों के गैरसैंण पहुंचने की संभावना है।
कांग्रेस के मुख्य मुद्दों में बदहाल स्वास्थ्य सेवाएं, सड़कों की दुर्दशा, पेयजल संकट, शिक्षा व्यवस्था, स्थायी राजधानी गैरसैंण का मुद्दा, पेपर लीक प्रकरण, अंकिता भंडारी हत्याकांड, बढ़ता भ्रष्टाचार,अग्निपथ योजना एवं महिलाओं और दलितों पर हो रहे उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाना शामिल है।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि सरकार को इन गंभीर मुद्दों पर जवाब देना ही होगा. इसके साथ ही कांग्रेस ने आगामी 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में ‘वोट चोरी’ के खिलाफ एक और विशाल प्रदर्शन करने का निर्णय लिया है. कांग्रेस नेताओं ने सभी कार्यकर्ताओं से घेराव कार्यक्रम में बढ़-चढ़कर भाग लेने का आह्वान किया है।
भराड़ीसैंण में धारा 163 लागू:गैरसैंण में विधानसभा सत्र को लेकर पुलिस पूरी तरह मुस्तैद है. जिसके तहत भराड़ीसैंण क्षेत्र में धारा 163 लागू कर दिया गया है। इस दौरान नारेबाजी, प्रदर्शनों के मद्देनजर शांति और कानून-व्यवस्था को बनाए रखने के लिए सख्त पाबंदियां लगाई गई हैं. अगर कोई इसका उल्लंघन करेगा, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
