उत्तराखंड में नहीं मिली सैलरी तो छोड़ दी रोडवेज की नौकरी, अब गांव लौटकर कर रहे खेती…….

देहरादून: उत्तराखंड परिवहन निगम में समय पर वेतन न मिलने से परेशान होकर भवाली डिपो के दो ड्राइवरों ने नौकरी छोड़ दी है। आर्थिक तंगी के चलते अब वे अपने गांवों में खेती और पशुपालन कर परिवार का गुजारा कर रहे हैं।

उत्तराखंड परिवहन निगम में समय पर वेतन नहीं मिलने से अब कर्मचारियों के सब्र का बांध टूटने लगा है। हालात नौकरी छोड़ने तक पहुंच गए हैं। इसी की एक बानगी भवाली डिपो के चालक देवेंद्र सिंह और नेत्र सिंह हैं। अब दोनों अपने पैतृक गांव में लौटकर खेती और पशुपालन के काम में जुट गए हैं। निगम ने दोनों को नोटिस देकर नहीं आने का कारण पूछा लेकिन कोई जवाब नहीं आने पर नेत्र सिंह को निकाल दिया गया। जबकि देवेंद्र सिंह को अंतिम नोटिस दिया गया है।

महीनों से नहीं मिला वेतन
भवाली डिपो के ये दोनों चालक महीनों से वेतन नहीं मिलने, रिकवरी किए जाने से आर्थिक संकट से जूझ रहे थे। मूल रूप से पीरूमदारा निवासी देवेंद्र सिंह एजेंसी चालक थे, जबकि बिंदुखत्ता निवासी नेत्र सिंह विशेष श्रेणी में कार्यरत थे। नियमित ड्यूटी, जिम्मेदारियों और यात्रियों की सुरक्षा का भार उठाने के बावजूद, जब घर का चूल्हा जलाना मुश्किल हो गया, तो दोनों ने नौकरी से तौबा करना ही बेहतर समझा। देवेंद्र का कहना है कि जब मेहनत की कमाई समय पर न मिले तो परिवार को भूखा नहीं रखा जा सकता। अब खेतों में पसीना बहा रहे हैं, कम से कम पेट भरने की चिंता तो नहीं है। वहीं, नेत्र सिंह ने बताया कि पशुपालन से धीरे-धीरे आमदनी शुरू हो रही है।

नौकरी छोड़ने को मजबूर कई ड्राइवर
भवाली डिपो में अभी भी कई चालक-परिचालक ऐसे हैं जिन्हें महीनों से वेतन नहीं मिला है। कर्मचारियों का कहना है कि यदि हालात नहीं सुधरे तो और भी लोग नौकरी छोड़ने को मजबूर हो सकते हैं।

एआरएम भवाली मधुसूदन मिश्रा ने बताया कि नेत्र सिंह को तीन महीने में तीन नोटिस भेजे, जवाब नहीं आने पर उसे हटा दिया गया है। देवेंद्र सिंह को नोटिस भेजे गए हैं। जवाब नहीं मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।

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