उत्तराखंड के नैनीताल में परीक्षार्थियों की संख्या घटी, निजी स्कूलों की ओर बढ़ रहा रुझान……..

हल्द्वानी: निजी विद्यालय आधुनिक संसाधनों से युक्त पढ़ाई की सुविधा दे रहे हैं। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से संबद्ध स्कूलों में समय की मांग के अनुसार गतिविधियां भी कराई जा रही हैं। ऐसे में अभिभावकों का रुझान निजी स्कूलों की ओर बढ़ गया है।

बच्चों को प्राइवेट संस्थानों में पढ़ाना एक ट्रेंड भी बन गया है। जिस वजह से राज्य बोर्ड से संबद्ध सरकारी और निजी स्कूलों में संख्या कम हो रही है। नैनीताल जिले की बात करें तो हाईस्कूल और इंटरमीडिएट में पिछले वर्ष की अपेक्षा इस बार पांच प्रतिशत परीक्षार्थी कम हुए हैं।

शिक्षा विभाग के आंकड़े इसकी पुष्टि करते हैं। आवेदनों की स्थिति अनुसार उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद की परीक्षाओं में 2024 में 17887 विद्यार्थियों का पंजीकरण हुआ था। 2025 में वृद्धि हुई और संख्या बढ़कर 19,143 पहुंच गई। लेकिन इस बार पिछले साल की तुलना में करीब पांच प्रतिशत परीक्षार्थी कम हो गए हैं। संख्या लुढ़क कर 18,234 पहुंच गई है। इसमें हाईस्कूल में कुल 9573 बच्चे शामिल होंगे।

इसमें 4459 छात्र और 5114 छात्राएं परीक्षा देंगी। दसवीं में संस्थागत विद्यार्थियों की संख्या 9386 हैं। जबकि, 187 व्यक्तिगत परीक्षा देंगे। वहीं, इंटरमीडिएट स्तर पर 8661 विद्यार्थी शामिल होंगे। इसमें 3777 छात्र और 4884 छात्राएं हैं। इनमें 8345 संस्थागत और 316 व्यक्तिगत विद्यार्थी हैं। इधर, राज्य बोर्ड से संबद्ध स्कूलों में प्रवेशों की स्थिति को देख शिक्षा विभाग के अधिकारी आगामी वर्षों में स्थिति और ज्यादा खराब होने की संभावना जता रहे हैं।

1300 सरकारी स्कूल, लेकिन 60 प्रतिशत बच्चे प्राइवेट में
नैनीताल जिले में 1825 सरकारी और निजी स्कूल संचालित हो रहे हैं। इसमें से 1300 सरकारी और 525 प्राइवेट संस्थान हैं। राजकीय व सहायता प्राप्त स्कूलों की संख्या अधिक होने के बावजूद अधिकांश बच्चे निजी विद्यालयों में पढ़ाई कर रहे हैं। शिक्षा विभाग के रिकार्ड के अनुसार जिले में अध्ययनरत एक लाख से अधिक छात्र-छात्राओं में 40 प्रतिशत सरकारी स्कूलों में हैं। जबकि, 60 प्रतिशत प्राइवेट में पढ़ रहे हैं।

परीक्षा केंद्रों पर अन्य स्कूलों के शिक्षक करेंगे ड्यूटी
उत्तराखंड बोर्ड की परीक्षाएं फरवरी के तीसरे सप्ताह से प्रारंभ होनी है। इसके लिए शिक्षा विभाग स्थानीय स्तर पर तैयारियों में जुटा हुआ है। मुख्य शिक्षा अधिकारी जीआर जायसवाल ने परीक्षाओं को देखते हुए निर्देश जारी किए हैं। पत्र के अनुसार सभी परीक्षा केंद्रों पर संबंधित स्कूल के प्रधानाचार्य को केंद्र व्यवस्थापक का जिम्मा सौंपा जाएगा। परीक्षा प्रभारी भी उसी विद्यालय के होंगे। लेकिन कक्ष निरीक्षक और आंतरिक सचल दल के शिक्षक अन्य स्कूलों के नियुक्त किए जाएंगे। साथ ही प्रश्न पत्रों की सुरक्षा के लिए दो चौकीदार तैनात किए जाने के निर्देश दिए हैं।

राज्य बोर्ड से हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा देने वाले बच्चों की संख्या में कमी देखने को मिली है। यह भी देखा जा रहा है कि निजी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं की संख्या अधिक है। बोर्ड परीक्षा में पंजीकृत बच्चों की संख्या में कमी का यह मुख्य कारण है। :जीआर जायसवाल, मुख्य शिक्षा अधिकारी

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