उत्तराखंड में पांच साल तक काबू में रहा कर्जा, एक अप्रैल 2026 से छिन जाएगा सहारा……

देहरादून: पुष्कर सिंह धामी सरकार ने पिछले पांच साल ऋण लेकर घी पीने से हाथ पीछे खींचकर रखे तो उसका परिणाम काफी हद तक सुखद रूप में सामने आया है। कर्ज का मर्ज लाइलाज बनता, इससे पहले ही उत्तराखंड संभल गया। कोरोनाकाल में आर्थिक संकट के दौरान एक बार ऐसा भी लगने लगा था कि यह मध्य हिमालयी राज्य ऋण के बोझ तले दब जाएगा।

वित्तीय अनुशासन, अनाप-शनाप खर्चों पर अंकुश लगाने की हिम्मत दिखाई तो परिणाम देखिए, वार्षिक बजट आकार से भी कर्ज अधिक होने की नौबत आई, लेकिन टिक नहीं पाई। सरकार को इस मामले में 15वें वित्त आयोग के राजस्व घाटा अनुदान का भरपूर सहारा मिला। लेकिन, एक अप्रैल, 2016 से यह सहारा हटने जा रहा है। ऐसे में कर्ज को नियंत्रण में रखने के लिए सरकार को खासी मशक्कत करनी पड़ेगी।

उत्तराखंड के पास वित्तीय संसाधन अत्यंत सीमित हैं। केंद्र से मिलने वाले सहायता अनुदान, केंद्रीय करों में राज्य की हिस्सेदारी और केंद्रपोषित योजनाओं में विशेष राज्य के कारण 90:10 के अनुपात में मिलने वाली बड़ी सहायता पर बुनियादी ढांचे के विकास और विस्तार, कल्याण योजनाओं के संचालन का दारोमदार है।

राज्य अपने खर्चों की पूर्ति के लिए अपने संसाधनों पर निर्भर नहीं है। इस कारण राज्य बनने के बाद से ही कर्ज का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। वर्ष 2016-17 में 44,583 करोड़ रुपये कर्ज राज्य पर चढ़ गया। यह तत्कालीन वार्षिक बजट आकार के इर्द-गिर्द है। यह स्थिति आगे कई वर्षों तक बनी रही। वर्ष 2020 में कोरोना काल में कर्ज का संकट बढ़ने के हालात बने, लेकिन राज्य ने इसे नियंत्रित किया।

15वें वित्त आयोग की संस्तुतियों से ऋण नियंत्रण में मदद
वर्ष 2021-22 में प्रदेश की सत्ता पर धामी सरकार के आने के बाद वित्तीय अनुशासन को प्राथमिकता मिली है। यह संकेत कर्ज को लेकर वित्त विभाग के आंकड़ों से मिलते हैं। यद्यपि, वर्ष 2021-22 में कर्ज में वृद्धि 11.78 प्रतिशत हुई, लेकिन इसके बाद के चार वर्षों में यह साढ़े चार प्रतिशत से लेकर सवा दस प्रतिशत के बीच रही। यद्यपि, कर्ज को नियंत्रित करने के सरकार के इन प्रयासों को 15वें वित्त आयोग की संस्तुतियों से बड़ा बल मिला।

राजस्व घाटा अनुदान ने राज्य को हर माह वेतन, भत्ते के भुगतान के संकट से जूझने में राहत प्रदान की। आयोग की संस्तुतियों के अनुसार वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक यानी पांच वर्ष की अवधि में राज्य को 28147 करोड़ का अनुदान मिला। अगले वित्तीय वर्ष 2026-27 से यह अनुदान नहीं मिलेगा 16वें वित्त आयोग ने इस प्रकार का कोई अनुदान नहीं दिया है। कर्ज को नियंत्रित करने के लिए सरकार को पसीना बहाना पड़ेगा।

पिछले छह वर्षों में प्रदेश पर इस प्रकार रहा ऋण का बोझ (ऋण-करोड़ रुपये व ऋण वृद्धि प्रतिशत में):
वर्ष, कुल ऋण, ऋण वृद्धि
2025-26, 99,632 , 5.25
2024-25, 94,666, 10.19
2023-24, 85,914, 9.43
2022-23, 78,509, 1.93
2021-22, 77,023, 4.44

15वें वित्त आयोग की संस्तुतियों के अनुसार पांच वर्ष के लिए वर्षवार प्राप्त राजस्व घाटा अनुदान (धनराशि-करोड़ रुपये)
वर्ष, आवंटित धनराशि
2025-26, 2099
2024-25, 4916
2023-24, 6223
2022-23, 7137
2021-22, 7772

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