IAS के कोचिंग संस्थानों में पढ़ाए जा रहे IFS संजीव चतुर्वेदी की ईमानदारी और साहस के अफसाने…….
नई दिल्ली: 11 मार्च 2026 – सिविल सेवाओं की तैयारी कर रहे लाखों अभ्यर्थियों के लिए अब भारतीय वन सेवा (IFS) अधिकारी संजीव चतुर्वेदी का संघर्ष और अटूट अखंडता (Integrity) एक जीवंत केस स्टडी बन चुकी है। VisionIAS, Rau’s IAS Study Circle, IAS Baba, Drishti IAS और अन्य प्रमुख कोचिंग संस्थानों के GS Paper-4 (Ethics, Integrity and Aptitude) मटेरियल में उनके कार्यों को अब नियमित रूप से शामिल किया जा रहा है। ये संस्थान चतुर्वेदी के हरियाणा और AIIMS के भ्रष्टाचार-विरोधी अभियान को “Public Service Values”, “Probity in Governance”, “Whistleblowing” और “Moral Courage” के व्यावहारिक उदाहरण के रूप में पढ़ा रहे हैं।
2002 बैच के IFS अधिकारी संजीव चतुर्वेदी (हरियाणा कैडर से उत्तराखंड कैडर) आज UPSC मुख्य परीक्षा के एथिक्स पेपर की सबसे चर्चित केस स्टडीज में से एक हैं। कोचिंग नोट्स में उनके नाम के साथ लिखा जाता है – “Ethical resistance can invite backlash but boosts long-term faith in the system.” उनके कार्य न केवल सैद्धांतिक नैतिकता सिखाते हैं, बल्कि दिखाते हैं कि सिस्टम के अंदर रहते हुए भी भ्रष्टाचार से लड़ना कैसे संभव है।
हरियाणा में शुरू हुआ संघर्ष: फेक प्लांटेशन और हर्बल पार्क घोटाला
संजीव चतुर्वेदी की पहली पोस्टिंग के बाद से ही उनकी कहानी शुरू हो गई। 2005-2012 के दौरान हरियाणा में उन्होंने सरास्वती वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी में अवैध नहर निर्माण, सरकारी फंड से हाई-प्रोफाइल व्यक्ति की निजी जमीन पर हर्बल पार्क बनाने, फर्जी प्लांटेशन स्कीम (90% पौधे कागजों पर), अवैध कटाई, खनन और शिकार के रैकेट उजागर किए। एक विदेशी फंडेड वनरोपण कार्यक्रम में उन्होंने पाया कि फर्जी हस्ताक्षर और गैर-मौजूद मजदूरों के नाम पर करोड़ों की हेराफेरी हो रही थी।
परिणाम? मात्र पांच साल में 12 ट्रांसफर, 2007 में सस्पेंशन, चार्जशीट और प्रमोशन ब्लॉक। हरियाणा के तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा और वन मंत्री किरण चौधरी तक पर आरोप लगे। लेकिन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने 2008 में सस्पेंशन रद्द कर दिया और राज्य सरकार को फटकार लगाई। बाद में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने भी चार बार उनके पक्ष में हस्तक्षेप किया। 40 वन अधिकारी निलंबित हुए, CBI जांच की सिफारिश हुई और सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा पर ₹1 करोड़ का जुर्माना लगाया।
कोचिंग मटेरियल में यह केस “Conscience vs Institutional Pressure” और “Short-term personal loss for long-term public good” के तहत पढ़ाया जाता है।
AIIMS में 200+ भ्रष्टाचार के मामले: CVO के रूप में साहस
2012 में AIIMS, दिल्ली में डिप्टी सेक्रेटरी और चीफ वीजिलेंस ऑफिसर (CVO) बनने के बाद चतुर्वेदी ने 200 से अधिक भ्रष्टाचार के मामले दर्ज किए – फर्जी दवाइयों की सप्लाई, प्रोक्योरमेंट घोटाले, भर्ती अनियमितताएं, निर्माण में किकबैक, मृत पेंशनरों की पेंशन चोरी, सिक्योरिटी कॉन्ट्रैक्ट फ्रॉड आदि। उच्च पदाधिकारियों (IAS/IPS स्तर) तक पर कार्रवाई हुई, 78 मामलों में सैंक्शन, 87 में चार्जशीट और 20+ CBI को सौंपे गए।
2014 में उन्हें CVO पद से हटा दिया गया। स्वास्थ्य मंत्रालय ने 2015-16 में उन्हें “जीरो” APAR रेटिंग दी – ठीक उसी साल जब उन्हें Ramon Magsaysay Award मिला। फिर भी AIIMS स्टाफ और AAP ने उनका समर्थन किया। सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में केंद्र सरकार पर “vindictive action” का आरोप लगाते हुए जुर्माना लगाया।
VisionIAS और IAS Baba के एथिक्स नोट्स में यह उदाहरण “Probity in Governance” और “Whistleblower Protection” के अंतर्गत दिया जाता है। Rau’s IAS स्टडी सर्कल में लिखा है – “Sanjiv Chaturvedi exposed corruption despite immense threats. His persistence in battling systemic corruption is a classic case of administrative ethics.”
Ramon Magsaysay Award और उत्तराखंड में नया अध्याय
2015 में मात्र 40 साल की उम्र में संजीव चतुर्वेदी भारत के सबसे युवा सिविल सेवक बने जिन्हें Ramon Magsaysay Award मिला (Emergent Leadership के लिए)। पुरस्कार राशि उन्होंने गरीब मरीजों के इलाज के लिए AIIMS को दान कर दी। S.R. Jindal Prize (2011) और Manjunath Shanmugam Integrity Award भी मिल चुके हैं।
2015 में उत्तराखंड कैडर ट्रांसफर के बाद उन्होंने संरक्षण का नया आयाम जोड़ा – भारत का पहला मॉस गार्डन, लाइकेन पार्क, क्रिप्टोगैमिक गार्डन, फॉरेस्ट हीलिंग सेंटर, बायोडायवर्सिटी पार्क, जुरासिक पार्क आदि। लेकिन भ्रष्टाचार से लड़ना जारी रखा – मुनस्यारी इको-हट स्कैम, चंपावत फॉरेस्ट स्कैम, मसूरी में 7375 बॉर्डर पिलर्स गायब, मियावाकी प्रोजेक्ट ओवरकॉस्टिंग आदि उजागर किए।
UPSC अभ्यर्थियों के लिए प्रेरणा और नैतिक सबक
आज के कोचिंग क्लासरूम में संजीव चतुर्वेदी के केस स्टडीज से अभ्यर्थी सीखते हैं:
Integrity और Courage: व्यक्तिगत हानि (ट्रांसफर, सस्पेंशन, जीरो रेटिंग) के बावजूद सत्य का साथ।
Public Interest vs Personal Safety: “मैंने कभी सेवा छोड़ने के बारे में नहीं सोचा” – उनका खुद का कथन।
System Reform: RTI, PIL, न्यायपालिका और मीडिया का सही उपयोग।
Ethical Dilemma: नियमों का पालन करते हुए भी conscience का उपयोग।
IAS Baba के TLP और VisionIAS के PYQ डिकंस्ट्रक्शन में उनका नाम बार-बार आता है। एक नोट में लिखा है – “Ethical actions may sometimes lead to short-term losses but ensure long-term gains for society. Example: Sanjiv Chaturvedi faced harassment but exposed corruption.”
आज का संदर्भ: 16 जजों ने केस सुनने से किया इनकार
2025-26 में चतुर्वेदी के 16 से अधिक केसों में जजों ने रिक्यूजल कर दिया (CAT और हाई कोर्ट स्तर पर)। यह घटना भी अब चर्चा में है कि ईमानदार अधिकारी को न्याय मिलने में कितनी चुनौतियां आती हैं। फिर भी वे ट्रेनिंग एकेडमी में IAS/IPS/IFS अधिकारियों को एंटी-करप्शन स्ट्रैटजी सिखाते रहते हैं।
संजीव चतुर्वेदी की कहानी अब सिर्फ एक अधिकारी की कहानी नहीं, बल्कि UPSC एथिक्स पेपर की “Living Case Study” बन चुकी है। जैसा कि Ramon Magsaysay Award साइट पर लिखा है – “He has become a role model in the bureaucracy… for a public often overwhelmed by inertia and powerlessness.”
UPSC अभ्यर्थियों के लिए यह संदेश साफ है: “The path isn’t a cakewalk… but if you remain true to your principles, these things cannot break your spirit.” (संजीव चतुर्वेदी)
यह केस स्टडी न केवल परीक्षा पास कराने वाली है, बल्कि सच्चे सिविल सेवक बनाने वाली भी है।

