उत्तराखंड के देहरादून में रिस्पना-बिंदाल एलिवेटेड रोड की SIA रिपोर्ट जारी, पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू……….

देहरादून: रिस्पना पुल से नागल पुल और हरिद्वार बाईपास में बिंदाल पुल से मालसी तक प्रस्तावित फोर लेन एलिवेटेड रोड को लेकर सामाजिक समाघात मूल्यांकन (एसआइए) अध्ययन रिपोर्ट तैयार कर ली गई है। विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी (एसएलओ) की ओर से तैयार यह रिपोर्ट अब देहरादून नगर निगम के नोटिस बोर्ड पर चस्पा कर दी गई है, ताकि प्रभावित लोग इसका अवलोकन कर सकें। रिपोर्ट नगर निगम की वेबसाइट पर भी उपलब्ध कराई गई है। वहीं, प्रभावितों के पुनर्वास की प्रक्रिया के लिए अपर जिलाधिकारी देहरादून को प्रशासक नियुक्त किया गया है।

नगर निगम क्षेत्र में आने वाली रिस्पना और बिंदाल नदी किनारे की अधिकांश भूमि सरकारी अभिलेखों में दर्ज है। एलिवेटेड रोड परियोजना के दायरे में नगर निगम की जमीनें भी शामिल हैं। इसी कारण जिलाधिकारी के माध्यम से कराए गए सर्वे की रिपोर्ट को सार्वजनिक किया गया है, जिससे लोग परियोजना से जुड़ी जानकारी देख सकें। रिस्पना पुल से नागल पुल तक प्रस्तावित एलिवेटेड रोड के दायरे में अजबपुरकलां, धर्मपुर, डालनवाला, अधोईवाला, कंडोली, चीड़ोवाली, जाखन, धोरणखास, किशनपुर, तरलानागल और ढाकपट्टी क्षेत्र शामिल हैं। इस पूरे रूट में कुल 5.5 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता दर्शाई गई है।

रिस्पना नदी से जुड़े इस सर्वे को ग्राफिक एरा विवि के प्रोफेसर द्वारा एसएसआई अध्ययन के तहत किया गया। नियम चार के अंतर्गत डीएम द्वारा गठित टीम की रिपोर्ट के आधार पर एसएलओ ने अंतिम रिपोर्ट तैयार की है। रिपोर्ट के अनुसार, यह भूमि मौजा अजबपुरकलां के नाम दर्ज है और अधिकांश हिस्सा सरकारी श्रेणी में आता है। एलिवेटेड रोड के दायरे में 12 प्रकार के पेड़, साथ ही नदी किनारे कच्चे और पक्के भवन भी चिहि्नत किए गए हैं।

बिंदाल रूट में 13.77 हेक्टेयर भूमि की जरूरत
हरिद्वार बाईपास पुल से मालसी तक प्रस्तावित एलिवेटेड रोड के लिए 13.77 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण प्रस्तावित है। इसके दायरे में कारगीग्रांट, ब्राह्मणवाला, देहराखास, निरंजनपुर, कांवली, चुक्खुवाला, डोभालवाला, हाथीबड़कला, विजयपुर, जाखन, जोहड़ी, मालसी, प्रतीतपुर संतौर, किशनपुर और ढाकपट्टी क्षेत्र शामिल हैं। इस रूट का एसआइए सर्वे एसजीआरआर के प्राचार्य की ओर से किया गया है, जिसे डीएम स्तर पर गठित टीम ने सत्यापित कर रिपोर्ट के रूप में प्रस्तुत किया।

सरकारी भूमि, लेकिन बस्तियां बड़ी चुनौती
रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि रिस्पना और बिंदाल नदी किनारे की अधिकांश भूमि सड़क, पटरी और नदी श्रेणी में आती है। हालांकि, इन क्षेत्रों में नदी किनारे बस्तियां भी बसी हुई हैं, जहां कच्चे और पक्के निर्माण मौजूद हैं। यही कारण है कि परियोजना के साथ-साथ बड़े स्तर पर पुनर्वास की आवश्यकता सामने आई है।

पुनर्वास की तैयारी शुरू, जमीन चिह्नित
एलिवेटेड रोड परियोजना के दायरे में आने वाले निर्माणों के चलते प्रशासन और नगर निगम ने पुनर्वास के लिए भूमि चिह्नित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। कुछ स्थानों पर पुनर्वास के लिए जमीन भी चिन्हित कर ली गई है। प्रभावित लोगों के पुनर्वास की समग्र जिम्मेदारी अपर जिलाधिकारी देहरादून को सौंपी गई है।

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