ऑल सीजन डेस्टिनेशन बनने की तैयारी: अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों के लिए डिजाइन होंगे देश के 50 शहर………
देहरादून: पर्यटन अब देश के विकास का नया ग्रोथ इंजन होगा। इस बजट में भारत को “ऑल-सीजन डेस्टिनेशन’ और “ग्लोबल टूरिस्ट हब’ बनाने की तैयारी की जा रही है। देश के 50 से ज्यादा शहरों का इंफ्रास्ट्रक्चर विश्वस्तरीय पर्यटन स्थलों जैसा होगा। मंदिरों के शहर के तौर पर पहचाने जाने वाले शहरों में बुनियादी सुविधाएं अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों की जरूरतों के अनुसार विकसित की जाएंगी। इसमें उत्तर प्रदेश के वाराणसी और मथुरा, जम्मू-कश्मीर का जम्मू, उत्तराखंड के ऋषिकेश और हरिद्वार, तमिलनाडु के मदुरै और कांचीपुरम, कर्नाटक का हम्पी, आंध्र प्रदेश का तिरुपति, ओडिशा का भुवनेश्वर और पुरी, पश्चिम बंगाल का बिश्नुपुर, मध्य प्रदेश का उज्जैन और खजुराहो, गुजरात का द्वारका और महाराष्ट्र का पंढरपुर शामिल होंगे।
“नेशनल डेस्टिनेशन डिजिटल नॉलेज ग्रिड’ के जरिए भारतीय पर्यटन स्थलों का डिजिटल डेटा तैयार होगा। इससे विदेशी पर्यटक आकर्षित होंगे। स्थानीय स्तर पर शोधार्थियों, इतिहासकारों, कंटेंट क्रिएटर्स, होटल, गाइड, ट्रांसपोर्ट, स्थानीय हस्तशिल्प, होम-स्टे और तकनीकी क्षेत्र में रोजगार के मौके बढ़ेंगे। इससे एक ऐसा इकोसिस्टम तैयार हो जाएगा, जिससे टियर 2-3 शहरों और गांवों की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। इससे देश का फॉरेक्स रिजर्व भी बढ़ेगा। इससे भारत की सॉफ्ट पावर और सांस्कृतिक पहचान मजबूत होगी।
भारत में होगी बिग कैट समिट।
भारत में इसी साल पहली “ग्लोबल बिग कैट समिट’ आयोजित होगी। दो साल पहले साल 2024 में भारत ने इंटरनेशनल बिग कैट गठबंधन स्थापित किया था। इसके तहत बाघ, शेर, तेंदुआ, हिम तेंदुआ, चीता, जगुआर, प्यूमा जैसे जानवरों के संरक्षण पर ध्यान दिया जाता है। इसमें दुनिया के 95 देशों के प्रमुख इन जानवरों के संरक्षण की सामूहिक रणनीति पर चर्चा करेंगे।
ट्रेल्स पर्यटन के जरिए पर्यावरण संरक्षण भी… एडवेंचर टूरिज्म से करेंगे ब्रांडिंग।
{हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर में माउंटेन ट्रेल्स (ट्रैकिंग के रास्ते) विकसित किए जाएंगे। इसे एडवेंचर टूरिज्म के तौर पर प्रचारित करेंगे। पूर्वी घाट के अरकू वैली और पश्चिमी घाट के पोधीगई मलई में भी माउंटेन ट्रेल्स बनेंगे। {ओडिशा, कर्नाटक और केरल में टर्टल ट्रेल्स बनेंगे। {आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में बर्ड वॉचिंग ट्रेल्स विकसित किए जाएंगे। इन टिकाऊ विकास के पर्यटन मॉडल से पर्यावरण संरक्षण करेंगे।
पर्यटन का बजट: 2438.40 करोड़(2026-27),2047 तक 10 करोड़ विदेशी पर्यटकों को देश लाने का लक्ष्य।
सरकार ने @2047 विजन के तहत 2047 तक 10 करोड़ विदेशी पर्यटकों को भारत लाने का लक्ष्य रखा है। वर्ल्ड ट्रेवल एंड टूरिज्म काउंसिल का अनुमान है कि 2034 तक देश की जीडीपी में पर्यटन का योगदान 43.25 लाख करोड़ रुपए हो सकता है। तब तक यह सेक्टर करीब 6.3 करोड़ लोगों को रोजगार देने में सक्षम होगा। पर्यटन मंत्रालय की इंडिया टूरिज्म स्टैटिक्स रिपोर्ट के अनुसार, भारत में हर साल करीब एक करोड़ विदेशी पर्यटक आते हैं। इनमें 6-7% बौद्ध पर्यटक होते हैं। पिछले साल 7.10 लाख बौद्ध पर्यटक भारत आए। इस बार पूर्वोत्तर के विकास के लिए 6,812 करोड़ दिए हैं, जो पिछली बार से 20% ज्यादा है। इस बजट से पूर्वोत्तर के राज्यों की लोकल इकोनॉमी मजबूत होगी।
05 राज्यों में 5 पर्यटन केंद्र विकसित किए जाएंगे, यहां 4000 ई बसें भी चलेंगी,पूर्वोत्तर में बौद्ध सर्किट मंदिरों व मठों का संरक्षण, सुविधाएं बढ़ेंगी
अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, असम, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में बौद्ध सर्किट का विकास किया जाएगा। इसमें मंदिरों और मठों का संरक्षण, कनेक्टिविटी और तीर्थयात्रियों के लिए सुविधाओं पर ध्यान दिया जाएगा।
15 पुरातात्विक स्थलों को अंतरराष्ट्रीय स्तर का पर्यटन स्थल बनाएंगे
लोथल, धोलावीरा, राखीगढ़ी, सारनाथ, लेह पैलेस, आदिचनल्लूर, हस्तिनापुर जैसे देश के 15 पुरातात्विक स्थल “एक्स्पिीरियंशियल कल्चरल डेस्टिनेशन्स’ के रूप में विकसित होंगे। यहां पर्यटक इतिहास को जीवंत रूप में महसूस कर सकेंगे। यहां पर्यटकों के लिए वॉकवे और इमर्सिव स्टोरीटेलिंग तकनीकों का उपयोग किया जाएगा।

