उत्तराखंड के शीतकाल में अब तुंगनाथ नहीं जा पाएंगे पर्यटक, चंद्रशिला ट्रैक के लिए वैकल्पिक मार्ग बनाया जाएगा…….

रुद्रप्रयाग: तृतीय केदार तुंगनाथ में शीतकाल में कपाट बंद होने के बाद पर्यटकों की लगातार हो रही आवाजाही पर मक्कूमठ के हक-हकूकधारी पंच पुरोहित आपत्ति कर रहे थे।

शीतकाल में तृतीय केदार तुंगनाथ में पर्यटकों की आवाजाही को प्रतिबंधित किए जाने को लेकर बैठक हुई। इसमें चोपता के दुगलविट्टा में प्रशासन, वन विभाग, मंदिर समिति, हक-हकूकधारी पंच पुरोहितों, क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों एवं वन पंचायतों के पदाधिकारी शामिल हुए जिन्होंने चंद्रशिला ट्रैक पर जाने वाले पर्यटकों को वैकल्पिक रास्ता बनाने के लिए सुझाव दिए।

तृतीय केदार तुंगनाथ में शीतकाल में कपाट बंद होने के बाद पर्यटकों की लगातार हो रही आवाजाही पर मक्कूमठ के हक-हकूकधारी पंच पुरोहित आपत्ति कर रहे थे। तुंगनाथ के मठाधिपति राम प्रसाद मैठाणी का कहना था कि धाम के कपाट बंद होने के बाद मन्दिर परिसर में पर्यटकों की आवाजाही से धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण व बुग्यालों को क्षति हो रही है। वहीं तुंगनाथ घाटी में व्यवसाय करने वालों का कहना था कि चंद्रशिला के लिए पैदल ट्रैक बंद होने से उनका रोजगार प्रभावित हो जाएगा।

सभी बिंदुओं पर चर्चा के बाद उपजिलाधिकारी ऊखीमठ अनिल शुक्ला ने कहा कि चंद्रशिला ट्रेक के लिए नया रास्ता बनाने की कार्ययोजना बनाई जाएगी, जिससे आस्था भी बनी रहे और रोजगार भी प्रभावित न हो।

बैठक में तय हुआ कि तुंगनाथ में कोई पर्यटक आवाजाही न करे इसके लिए मंदिर समिति, वन पंचायत प्रतिनिधि, वन विभाग, पंच पुरोहितों के सदस्यों की एक कमेटी बनाई जाएगी जो साफ-सफाई से लेकर सभी व्यवस्थाओं की निगरानी करेगा। इसके लिए तुंगनाथ मंदिर परिसर से सीमा निर्धारित की जाएगी जिससे कोई भी सैलानी इस क्षेत्र में प्रवेश न कर सके।

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