उत्तराखंड में अब सरकारी स्कूलों के टीचरों के लिए नया आदेश, गर्मी की छुट्टियों से पहले 30% सिलेबस करना होगा पूरा……
हल्द्वानी: सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को नए सत्र में पाठ्यक्रम का प्रबंधन ज्यादा दुरुस्त करना होगा। पिछले वर्षों की तुलना में कोर्स को जल्दी पूरा करने की चुनौती भी होगी।
नई योजना के साथ एक अप्रैल से सत्र शुरू होते ही जुटना पड़ेगा। जिससे गर्मी की छुट्टियों से पहले 30 प्रतिशत पाठ्यक्रम पूर्ण किया जा सके। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर), जनगणना के साथ ही विधानसभा चुनाव की तैयारियों में ड्यूटियों की संभावनाओं को देख इस पर जोर दिया जा रहा है। इसे लेकर शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने मौखिक निर्देश दिए हैं।
दरअसल, स्कूलों में प्रतिवर्ष न्यूनतम 222 दिन पढ़ाई का प्रविधान है। शिक्षकों की शिक्षण कार्य के अलावा अन्य गतिविधियों में भी ड्यूटी लगाई जाती है। वहीं, यह वर्ष अधिक व्यस्तताओं वाला है। एसआइआर को लेकर कवायद शुरू हो चुकी है।
अप्रैल से प्रक्रिया प्रस्तावित है। जनगणना का कार्य भी प्रारंभ होने वाला है। इसी के साथ अगले वर्ष होने वाले चुनावों की तैयारियां भी होनी हैं। इन सभी कार्यों में शिक्षकों की ड्यूटी लगने की प्रबल संभावनाएं हैं। ऐसे में 150 दिन से भी कम शिक्षण दिवस मिलने का अनुमान लगाया जा रहा है। एसआइआर, जनगणना और निर्वाचन भी अनिवार्य काम हैं। परिस्थितियों को देखते हुए अधिकारियों ने कोर्स को इसी हिसाब से पूरा कराने को कहा है।
शिक्षकों के लिए पाठ्यक्रम प्रबंधन होगा चुनौती
संभावित परिस्थितियों को देख अधिकारियों ने शिक्षकों से पाठ्यक्रम का प्रबंधन दुरुस्त करने को कह दिया है। लेकिन तमाम प्रशिक्षण और स्कूल से जुड़े अन्य कामों की उलझन में कोर्स मैनेजमेंट चुनौती होगा। अब अधिकारियों को इस बारे में सोचना होगा कि शिक्षकों को दूसरे कामों में उलझाए बिना पढ़ाने में फोकस करने दिया जाए।
सत्र शुरू होने से पहले आने लगी किताबें
पिछले वर्षों तक सरकारी स्कूलों में बच्चों को मिलने वाली निश्शुल्क किताबें जुलाई में सप्लाई होती थीं। इससे पढ़ाई प्रभावित होती थी, लेकिन इस बार नया सत्र शुरू होने से पहले ही किताबें आने लगी हैं।
राजपुरा स्थित जिला वितरण केंद्र में कक्षा एक और दो की किताबें पहुंच गई हैं। पहली में सारंगी और मृदंग की 2500-2500 और आनंदमय गणित की 2400 पुस्तकें पहुंची हैं। कक्षा दो के लिए सारंगी और मृदंग की 1700-1700 और आनंदमय गणित की 1600 किताबें सप्लाई की गई हैं। ऐसे में बच्चों को समय पर किताबें मिल जाएंगी।
शिक्षकों की बात
एसआइआर, जनगणना और निर्वाचन कार्य महत्वपूर्ण है, लेकिन अन्य कार्यों में शिक्षकों का न उलझाया जाए। शिक्षक पूरी मेहनत करते हैं, मगर अन्य कामों में नहीं लगाया जाए तो कोर्स समय पर पूरा हो सकता है। – गिरीश चंद्र जोशी, जिलाध्यक्ष, राजकीय शिक्षक संघ
शिक्षकों से बीएलओ ड्यूटी करवाई जा रही है। इसका प्रभाव पढ़ाई पर पड़ता है। कई स्कूलों में लिपिकों का काम भी शिक्षक कर रहे हैं। शिक्षण, जनगणना और निर्वाचन के अलावा अन्य काम न करवाए जाएं तो कोर्स पूरा हो जाएगा। – डिकर सिंह पडियार, पूर्व जिला मंत्री, प्राथमिक शिक्षक संघ
एसआइआर, जनगणना और निर्वाचन संबंधित कार्य में कितने शिक्षकों की ड्यूटी लगेगी यह देखना होगा। लेकिन पाठ्यक्रम का प्रबंधन दुरुस्त करने को कहा गया है। गर्मी की छुट्टियों से पहले 30 प्रतिशत कोर्स पूरा करने को कहा है। :जीआर जायसवाल, मुख्य शिक्षा अधिकारी

