उत्तराखंड में अब दून-दिल्ली एक्सप्रेसवे बनेगा ‘ट्रैफिक का टेस्ट’, देहरादून में जाम का खतरा बढ़ा, पुलिस ने शासन को किया अलर्ट…….
देहरादून: दून-दिल्ली एक्सप्रेसवे के शुरू होने से जहां राजधानी देहरादून और दिल्ली के बीच सफर आसान होने की उम्मीद है, वहीं शहर के भीतर यातायात व्यवस्था पर इसका दबाव बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है। आशारोड़ी से ट्रांसपोर्ट नगर चौक तक करीब तीन किलोमीटर के मार्ग पर अभी से ट्रैफिक व्यवस्था चरमराने लगी है। हालात ऐसे हैं कि इस छोटी दूरी को तय करने में लगभग एक घंटा लग रहा है।
सूत्रों के मुताबिक एक्सप्रेसवे मार्च के अंतिम सप्ताह में शुरू हो सकता है। इसी को देखते हुए यातायात पुलिस ने संभावित दबाव को लेकर शासन को विस्तृत रिपोर्ट भेजते हुए पहले से ही सतर्क रहने की सलाह दी है।
स्थिति इसलिए भी चुनौतीपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि आने वाले समय में चारधाम यात्रा भी शुरू होने वाली है। ऐसे में पर्यटकों और श्रद्धालुओं के वाहनों की संख्या बढ़ने से शहर की सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव और अधिक बढ़ सकता है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो राजधानी के प्रमुख मार्गों पर जाम की स्थिति गंभीर हो सकती है।
इन क्षेत्रों में बढ़ेगा सबसे ज्यादा दबाव।
एक्सप्रेसवे शुरू होने के बाद दिल्ली, हरियाणा, गाजियाबाद, मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर और रुड़की से आने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ने की संभावना है। इसके चलते ट्रांसपोर्ट नगर, आईएसबीटी, शिमला बाईपास, जीएमएस रोड, राजपुर रोड, मसूरी और विकासनगर की ओर जाने वाले मार्गों पर यातायात का दबाव बढ़ सकता है। इसका असर इनसे जुड़े लिंक मार्गों पर भी दिखाई देगा।
रिस्पना पुल और जोगीवाला पहले से ही शहर के बड़े ‘बॉटल नेक’ प्वाइंट माने जाते हैं। इन मार्गों से भारी वाहनों, ट्रकों, टेंपो ट्रैवलर, स्कूल बसों और परिवहन निगम की बसों के साथ-साथ निजी वाहनों की भी बड़ी संख्या गुजरती है। एक्सप्रेसवे शुरू होने के बाद हरिद्वार मार्ग, रिस्पना पुल और जोगीवाला क्षेत्र में ट्रैफिक का दबाव और बढ़ने की आशंका है।
इसके अलावा आईएसबीटी क्षेत्र में बाहरी जिलों से आने वाली बसों, पर्यटक वाहनों और निजी गाड़ियों की संख्या बढ़ने से चंद्रबनी, ट्रांसपोर्ट नगर चौक और शिमला बाईपास जैसे इलाकों में जाम की स्थिति बनने की संभावना है।
घंटाघर और पलटन बाजार जैसे प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्रों में पर्यटकों की बढ़ती आवाजाही से पार्किंग संकट और आंतरिक यातायात दबाव भी बढ़ सकता है।
शहर के सामने ये बड़ी चुनौतियां।
यातायात पुलिस के मुताबिक शहर में वाहनों और आबादी की बढ़ती संख्या के मुकाबले पुलिसकर्मियों की कमी एक बड़ी चुनौती है। इसके अलावा पूर्ण विकसित बाईपास मार्ग न होने के कारण बाहरी जिलों से आने वाला ट्रैफिक भी शहर के अंदर से गुजरता है, जिससे आंतरिक मार्गों पर अनावश्यक दबाव पड़ता है।
राजधानी होने के कारण देहरादून में अक्सर धरना-प्रदर्शन, रैली और बड़े सरकारी-गैर सरकारी कार्यक्रम होते रहते हैं। इन आयोजनों में अन्य जिलों और राज्यों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं, जिससे यातायात व्यवस्था प्रभावित होती है।
शहर में बड़ी संख्या में कोचिंग सेंटर, स्कूल, कॉलेज और व्यावसायिक प्रतिष्ठान हैं। पर्याप्त पार्किंग न होने के कारण सड़कों के किनारे अनधिकृत पार्किंग भी जाम की बड़ी वजह बनती है। वहीं कई प्रमुख चौराहों और मार्गों की चौड़ाई कम होने से भी ‘बॉटल नेक’ की समस्या बनी रहती है।
एक्सप्रेसवे से आने वाले वाहनों के लिए डायवर्जन प्लान-
प्लान A:
यमुनोत्री और विकासनगर जाने वाले वाहनों को ट्रांसपोर्ट नगर तिराहे से बाईं ओर मोड़कर सेंट ज्यूड्स चौक होते हुए नया गांव के रास्ते विकासनगर और यमुनोत्री की ओर भेजा जाएगा।
प्लान B:
मसूरी जाने वाले वाहनों को ट्रांसपोर्ट नगर तिराहे से आईएसबीटी फ्लाईओवर के रास्ते शिमला बाईपास चौक से सेंट ज्यूड्स चौक, कमला पैलेस, बल्लूपुर चौक और कैंट होते हुए किमाड़ी रोड से हाथीपांव के रास्ते मसूरी भेजा जाएगा।
प्लान C:
गढ़वाल, ऋषिकेश और डोईवाला की ओर जाने वाले वाहनों को सामान्य दिनों में ट्रांसपोर्ट नगर तिराहे से आईएसबीटी चौक की सर्विस लेन से कारगी चौक होते हुए रिस्पना पुल, जोगीवाला और भानियावाला के रास्ते गंतव्य की ओर भेजा जाएगा।
यदि रिस्पना पुल और विधानसभा क्षेत्र में यातायात दबाव बढ़ता है तो वाहनों को कारगी चौक से दुधली होते हुए डोईवाला की ओर डायवर्ट किया जाएगा।
देहरादून के लिए शॉर्ट टर्म प्लान-
यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए कुछ तात्कालिक कदम भी प्रस्तावित किए गए हैं। इनमें ट्रांसपोर्ट नगर से कमला पैलेस तक लिंक मार्ग और पूरे जीएमएस रोड का चौड़ीकरण, शहर में नए वेंडिंग जोन तय करना और पुराने वेंडिंग जोन का पुनर्गठन शामिल है।
इसके अलावा पुराने बाईपास चौक से बंगाली कोठी और फाटक मार्ग तक स्प्रिंग पोस्ट लगाने, आईएसबीटी और प्रमुख मार्गों पर पार्किंग व्यवस्था विकसित करने तथा स्मार्ट पार्किंग क्षेत्र बनाने का भी प्रस्ताव है। ई-रिक्शा के रजिस्ट्रेशन नियमों को सख्त करने और एमकेपी चौक पर चंदन डायग्नोसिस की दीवार को पीछे करने का सुझाव भी दिया गया है।
रेलवे स्टेशन से सहारनपुर चौक तक सड़क पर बने अस्थायी डिवाइडरों को स्थायी रूप देने की भी योजना है।
यातायात पुलिस के अनुसार एक्सप्रेसवे शुरू होने के बाद आशारोड़ी से देहरादून, मसूरी और ऋषिकेश तक जाम की स्थिति बनने की आशंका है। इसी को देखते हुए यातायात प्रबंधन के लिए विस्तृत योजना तैयार कर शासन को भेजी गई है।
पुलिस अधीक्षक यातायात लोकजीत सिंह ने बताया कि संभावित दबाव को देखते हुए विस्तृत ट्रैफिक प्लान तैयार किया गया है और शासन को भी आवश्यक कदम उठाने के लिए अवगत कराया गया है।

