उत्तराखंड में अब हड़ताल पर पाबंदी पर राज्य कर्मचारी सयुक्त परिषद का आया बड़ा बयान……..

देहरादून: राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के प्रदेश अध्यक्ष अरुण पांडे एवं प्रदेश महामंत्री शक्ति प्रसाद भट्ट ने राज्य सरकार द्वारा राज्य कर्मियों की हड़ताल पर जो 6 महीने का प्रतिबंध लगाया गया है पर प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से बयान जारी कर बताया कि वह अनावश्यक रूप से कर्मचारियों को उदलित करने का प्रयास है।

नेता द्वय ने कहा कि कभी भी कोई कर्मचारी संगठन हड़ताल का विकल्प तभी चुनता है जब उसके पास कोई रास्ते नहीं रह जाते हैं ।यदि समय-समय पर निचले स्तर पर कर्मचारियों की सुनवाई होती रहे और सुनवाई होने के साथ-साथ समस्याओं का सकारात्मक रूप से समाधान होता रहे तो कभी भी इस प्रकार की नौबत नहीं आएगी कि कर्मचारी संगठनों को हड़ताल की घोषणा करनी पड़े।

दोनों नेताओं ने बताया कि वर्ष 2023 से एसीपी के अंतर्गत पदोन्नति वेतनमान हेतु शासन के वित्त विभाग द्वारा सूचना चाही गई है किंतु आज तिथि तक विभिन्न विभागों द्वारा सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई है, इसी प्रकार राज्य कर्मियों ने बड़ी आशा से कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए अपने वेतन और पेंशन से अंशदान देना स्वीकार किया था किंतु आज उस व्यवस्था का भी बहुत बुरा हाल है और सारे कर्मचारी अपना पैसा प्रतिमाह जमा करने के बावजूद अपने खर्चे से इलाज करने को मजबूर है।

इस संबंध में परिषद के अरे रोड पर बनी मुख्यमंत्री जी द्वारा शासन को बैठक कर समस्या के निस्तारण के निर्देश दिए गए थे किंतु अतिथि तक वह भी बैठक नहीं की जा सकी है। परिषद सहित तमाम संगठनों द्वारा शासन स्तर पर समस्याओं के समाधान हेतु ,समस्याओं पर चर्चा हेतु बैठक की मांग की जा रही है किंतु किंतु बैठकों का आयोजन किए जाने के कारण समस्याओं का समाधान भी रुका पड़ा है।

माननीय मुख्यमंत्री जी एवं मुख्य सचिव,उत्तराखंड शासन को इस संबंध में अपने स्तर से पहल करके समीक्षा करनी चाहिए कि शासन स्तर पर दिए गए निर्देशों का पालन नीचे के अधिकारी कर भी रहे हैं या नहीं कर रहे हैं और यदि नहीं कर रहे हैं तो उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए, जिससे कि शासन को इस तरह के निर्णय न करने पड़े। जहां तक कर्मचारी संगठनों का सवाल है तो जब उनके पास कोई विकल्प नहीं रह जाएगा तो उन्होंने अपने मांगों को पूर्ण करने के लिए अप्रिय कदम उठाना ही होगा और इसका पूर्ण दायित्व अधिकारियों का है।

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