उत्तराखंड के उत्तरकाशी में वर्षा-बर्फबारी सेब बागवानी के लिए संजीवनी, अर्ली फ्लावरिंग का खतरा टला……..

उत्तरकाशी: मौसम का मिजाज बदलने के साथ शुरू हुआ वर्षा व बर्फबारी का दौर सेब बागवानी के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है। हर्षिल घाटी की बात करें तो यहां मौसम गर्माने से सेब के पेड़ों में अर्ली फ्लावरिंग का खतरा बना हुआ था। लेकिन वर्षा व बर्फबारी से अब यह खतरा काफी हद तक दूर हो गया है।

बता दें कि उत्तरकाशी जनपद प्रदेश में सेब उत्पादन के क्षेत्र में पहले पायदान पर है। यहां गंगा व यमुना दोनों घाटियों में प्रदेश का सर्वाधिक करीब 29 हजार मीट्रिक टन सेब का उत्पादन होता है।

इसमें भी हर्षिल के रसीले सेबों की देशभर की मंडियों में खासी मांग होती है। लेकिन पिछले कुछ सालों से यहां सेब उत्पादन पर मौसम पर ही निर्भर करता है।

शीतकालीन बर्फबारी में देरी, बेमौसम वर्षा व ओलावृष्टि से कई बार उत्पादन प्रभावित होता है। इस सीजन में भी यहां शीतकालीन वर्षा व बर्फबारी देरी से हुई थी।

इसके बाद वर्षा की कमी व मौसम गर्माने के चलते सेब के पेड़ों पर अर्ली फ्लावरिंग का खतरा बना हुआ था। अमूमन जो फ्लावरिंग 10 अप्रैल के बाद होती है।

वहीं, फ्रूट सेटिंग के लिए अच्छी मानी जाती है। लेकिन यहां मौसम गर्माने से बागवानों को भी अर्ली फ्लावरिंग का डर सता रहा था।

घाटी के सेब बागवान मोहन राणा, संजय पंवार व राजेश पंवार आदि ने बताया कि मौसम के मेहरबान होने से पेड़ों व मिट्टी में नमी लौटने की उम्मीद है।

इससे अर्ली फ्लावरिंग का खतरा भी काफी हद तक कम हो गया है। अब अपने निर्धारित समय अप्रैल माह में ही फ्लावरिंग होगी तो फ्रूट सेटिंग भी अच्छी होनी की उम्मीद है।

रामा व कमल सिरांई में मटर की फसल को नुकसान
पुरोला। रवांई घाटी के पुरोला क्षेत्र की रामा व कमल सिरांई में प्रमुख नकदी फसल मटर को वर्षा से नुकसान की खबर है।

काश्तकार श्यालिकराम नौटियाल, हुकुमत रावत, जीतपाल सिंह व राजपाल पंवार आदि का कहना है कि जब फसल बढ़वार पर थी, तब वर्षा की जरूरत थी। लेकिन वर्षा नहीं हुई। इस कारण फसल सूखने की कगार पर पहुंच गई।

उन्होंने बताया कि इस वर्षा से फसल को कोई लाभ नहीं मिलेगा। हालांकि उन्होंने गेहूं की फसल को इससे लाभ मिलने की बात कही।

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