उत्तराखंड में तमन्ना की धुंधली आँखों में सजे सुनहरे सपने, मेहंदी के रंगों से बनती हैं अनोखा आर्ट, बनना चाहती हैं आईएएस………
देहरादून: तमन्ना की आँखों की रोशनी बचपन से ही केवल 40% है. उनके लिए रंगों और आकृतियों को देख पाना कभी आसान नहीं था, लेकिन उनकी इच्छाशक्ति उनके शारीरिक अवरोधों से कहीं ज्यादा मज़बूत निकली। अपनी बड़ी बहनों को मेहंदी लगाते देख उन्होंने इस कला को अपनाया। जो मेहंदी आमतौर पर हाथों की शोभा बढ़ाती है, उसे तमन्ना ने एक ‘यूनिक आर्ट’ के रूप में कागज़ पर उतारना शुरू किया।
देहरादून: ईश्वर ने इस संसार की सुंदरता को निहारने के लिए हमें दो आँखें दी हैं, लेकिन कुछ लोग ऐसे होते हैं जो आँखों की रोशनी कम होने के बावजूद अपने हुनर की चमक से दुनिया को रोशन कर देते हैं. उत्तराखंड की राजधानी देहरादून की रहने वाली तमन्ना ऐसी ही एक मिसाल हैं. बचपन से ही दृष्टि संबंधी बाधाओं का सामना करने वाली तमन्ना आज अपनी ‘मेहंदी आर्ट’ के जरिए कला जगत में एक नई पहचान बना रही हैं. जहाँ आम लोग बारीकियों को देखने में संघर्ष करते हैं, वहीं तमन्ना मेहंदी के कोनों से कागज़ पर ऐसी अद्भुत पेंटिंग्स उकेरती हैं कि देखने वाले दांतों तले उँगली दबा लेते हैं।
मेंहदी से बनाती हैं पेपर आर्ट।
तमन्ना की आँखों की रोशनी बचपन से ही केवल 40% है. उनके लिए रंगों और आकृतियों को देख पाना कभी आसान नहीं था, लेकिन उनकी इच्छाशक्ति उनके शारीरिक अवरोधों से कहीं ज्यादा मज़बूत निकली। अपनी बड़ी बहनों को मेहंदी लगाते देख उन्होंने इस कला को अपनाया. जो मेहंदी आमतौर पर हाथों की शोभा बढ़ाती है, उसे तमन्ना ने एक ‘यूनिक आर्ट’ के रूप में कागज़ पर उतारना शुरू किया। आज उनकी बनाई गई बारीक पेंटिंग्स न केवल उनकी रचनात्मकता को दर्शाती हैं, बल्कि उनके अटूट धैर्य का भी सबूत हैं।
थक जाती हैं आंखे पर नहीं कम होता है जुनून
तमन्ना की यह कला उनके लिए शारीरिक रूप से चुनौतीपूर्ण भी है. तमन्ना बताती हैं कि मेहंदी की इन बेहद बारीक डिज़ाइनों पर घंटों काम करने के चलते अक्सर उनकी आँखों में सूजन आ जाती है. दर्द और थकान के बावजूद उनका जज्बा कम नहीं होता है .वह कुछ देर आराम करती हैं और फिर उसी ऊर्जा के साथ अपने कैनवास पर वापस लौट आती हैं. उनका कहना है कि यह केवल एक शौक नहीं, बल्कि उनका जुनून है जो उन्हें हर कठिनाई से लड़ने की ताकत देता है।
पढ़ाई में भी होनहार है देहरादून की तमन्ना।
तमन्ना न सिर्फ कला के क्षेत्र में माहिर हैं, बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में भी उन्होंने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है.82% अंकों के साथ उत्तराखंड बोर्ड से दसवीं की परीक्षा उत्तीर्ण करने वाली तमन्ना अब देश की सेवा के लिए आईएएस अधिकारी बनने का सपना देख रही हैं. उनकी इस यात्रा में ‘उदयन केयर फेलोशिप प्रोग्राम’ ने एक अहम भूमिका निभाई है। यह संस्था न सिर्फ आर्थिक रूप से कमजोर मेधावी छात्राओं की मदद करती है, बल्कि विभिन्न वर्कशॉप के माध्यम से उनके व्यक्तित्व और आत्मविश्वास को भी निखारती है और तमन्ना में आत्मविश्वास और स्किल सुधारने के लिए इस संस्था की मेंटर्स ने उसे बहुत सपोर्ट किया।

