उत्तराखंड में 800 करोड़ के LUCC घोटाले पर आज HC में अहम सुनवाई…….

नैनीताल: उत्तराखंड के बहुचर्चित LUCC चिटफंड मामले में आज हाईकोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई होनी है। 800 करोड़ रुपये से अधिक की इस वित्तीय धोखाधड़ी की जांच को लेकर दायर याचिकाओं पर न्यायमूर्ति रविन्द्र मैठाणी और न्यायमूर्ति शिद्धार्थ साह की खंडपीठ सुनवाई करेगी। अदालत ने संबंधित एजेंसियों को अब तक की जांच की विस्तृत रिपोर्ट आज, 18 मार्च 2026 तक प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

इस प्रकरण में लोनी अर्बन मल्टी स्टेट क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट कोऑपरेटिव सोसायटी (LUCC) पर आरोप है कि उसने राज्यभर में एजेंटों के माध्यम से निवेशकों से बड़ी राशि जुटाई और बाद में कंपनी के संचालक फरार हो गए। मामले में सीबीआई जांच की मांग को लेकर दायर याचिका पर पहले भी सुनवाई हो चुकी है, जिसमें अदालत ने पीड़ितों को अपनी शिकायतें सीधे केंद्रीय जांच ब्यूरो को सौंपने की सलाह दी थी।

राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया है कि पुलिस इस मामले की जांच कर रही है और अब तक कई शिकायतों के आधार पर कंपनी और उसके पदाधिकारियों के खिलाफ विभिन्न मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं। हालांकि, 27 प्रभावित निवेशकों की ओर से यह आपत्ति जताई गई कि उनकी शिकायतों पर अब तक प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई है, जिससे उन्हें राहत मिलने में देरी हो रही है।

इस पर अदालत ने स्पष्ट किया कि जिन लोगों की शिकायतें अभी दर्ज नहीं हुई हैं, वे अपने दस्तावेजों और भुगतान के प्रमाण के साथ सीधे सीबीआई से संपर्क कर सकते हैं। यह मामला देहरादून, ऋषिकेश सहित कई जिलों के प्रभावितों द्वारा जनहित याचिका के माध्यम से उठाया गया है।

गौरतलब है कि 28 नवंबर 2025 को इस मामले में सीबीआई/एसीबी देहरादून ने 46 आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया था। यह कार्रवाई हाईकोर्ट के निर्देश पर की गई थी। राज्य के देहरादून, हरिद्वार, पौड़ी गढ़वाल, चमोली, टिहरी गढ़वाल, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी, बागेश्वर और नैनीताल जिलों में इस प्रकरण से जुड़े कुल 18 मामले दर्ज हैं।

इस घोटाले की शुरुआत 1 जून 2024 को पौड़ी गढ़वाल के कोटद्वार में तृप्ति नेगी द्वारा दी गई शिकायत से हुई थी। जांच में सामने आया है कि LUCC ने उत्तराखंड में 35 शाखाएं संचालित कीं और निवेशकों को कम समय में अधिक लाभ का प्रलोभन देकर धन एकत्र किया। कंपनी ने विदेशों में सोना, तेल और रिफाइनरी जैसे क्षेत्रों में निवेश के नाम पर लोगों को आकर्षित किया, लेकिन कई निवेशकों को उनकी परिपक्व राशि भी वापस नहीं मिल सकी।

इस मामले में पुलिस पहले ही कुछ आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है, जबकि जांच एजेंसियां अब पूरे नेटवर्क की गहन पड़ताल में जुटी हैं।

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