उत्तराखंड में हाईकोर्ट सख्त: वन SDO की गिरफ्तारी पर रोक, पूरे थाने के ट्रांसफर की बात…….

देहरादून: उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने विकासनगर के वन एस.डी.ओ.के खिलाफ दर्ज एफ.आई.आर.में उनको अरेस्ट स्टे देते हुए उस थाने के सारे कर्मियों का रिकॉर्ड मांग लिया है। न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ ने अवैध खनन पर गंभीर टिप्पणी की और उसपर रोक लगाने को सरकार से कहा है। मामले में अगली सुनवाई सोमवार को होगी।

मामले के अनुसार, देहरादून के विकासनगर में वन अधिकारियों से मारपीट हुई थी, जिसका वीडियो सामने आया था। प्रकरण में दोनों पक्षों की शिकायत पर पुलिस ने अलग-अलग मुकदमे दर्ज कर जांच शुरू की।कालसी के उप प्रभागीय वनाधिकारी राजीव नयन नौटियाल ने विकासनगर पुलिस को बताया कि 27 फरवरी की शाम जब वह कार्यालय से लौट रहे थे तो यमुना नदी की ओर जा रहे एक डंपर की गतिविधि संदिग्ध प्रतीत होने पर उन्होंने उसका वीडियो बनाया। उन्होंने आरोप लगाया कि वहां मौजूद कुछ लोगों ने इसका विरोध किया और हाथापाई करते हुए शासकीय कार्य में व्यवधान डाला।

पुलिस ने प्राप्त शिकायत के आधार पर 27 फरवरी 2026 को भारतीय न्याय संहिता बी.एन.एस.की धारा 115(2), 352, 324(2), 121(1), 132 और 191(2) के अंतर्गत मामला पंजीकृत किया। दूसरी ओर, बड़वाला निवासी मनीष चौहान की ओर से भी प्रतिवाद दायर किया गया जिसमें उनके खिलाफ बी.एन.एस.की धारा 115(2), 324(2), 351(3), 352 तथा एस.सी./एस.टी.एक्ट की धारा 3(1)(द) और 3(1)(ध)में मुकदमा दर्ज किया गया।

न्यायमूर्ति थपलियाल ने सरकारी अधिकारियों के साथ मारपीट और अभद्रता पर कहा कि वह इसको गंभीरता से ले रहे हैं। उन्होंने नाराज होते हुए कहा कि “यहां हो क्या रहा है ? आप अपने अधिकारियों को ही सुरक्षा प्रदान नहीं कर पा रहे हैं”। न्यायमूर्ति ने सरकारी अधिवक्ताओं से कहा कि पुलिस ने एफ.आई.आर.दर्ज कर दी।

कहा कि एस.डी.ओ.का ट्रांसफर किया जिसे न्यायालय ने स्टे किया तो अब एफ.आई.आर.दर्ज कर दी।

उन्होंने पुलिस की कार्यशैली पर नाराजगी जताते हुए थानाध्यक्ष के कदम पर सवाल उठाए और आशंका जताई कि किसी की खनन माफियाओं के साथ मिलीभगत है। एकलपीठ ने इस क्षेत्र में खनन पर प्रतिबंध लगाने की बात भी कही।

अधिवक्ताओं द्वारा न्यायालय को बताया गया कि घटना के समय राकेश उत्तराखंडी और शिकायतकर्ता मनीष चौहान के वाहनों को देखा गया। न्यायमूर्ति को वो वीडियो भी दिखाए गए जिसमें सरेआम वन अधिकारी को गाड़ी से निकालकर पीटा गया। न्यायमूर्ति थपलियाल ने कहा कि डी.जी.पी.और एस.एस.पी.से उस थाने के हर कर्मचारी/अधिकारी का ट्रांसफर करने के लिए कहा जाए।

न्यायमूर्ति ने एफआईआर पर सवाल उठाते हुए थानाध्यक्ष से मुकदमा दर्ज करने के कारण पूछे हैं।

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